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त्रिपुरा में पूर्व उग्रवादियों की नाकेबंदी से दूसरे दिन भी ठप रहा रेल-सड़क यातायातत्रिपुरा
5 सित॰ 2026, 11:03 am (53 दिन पहले)· 2

त्रिपुरा में पूर्व उग्रवादियों की नाकेबंदी से दूसरे दिन भी ठप रहा रेल-सड़क यातायात

पूर्व उग्रवादियों के संगठन की 72 घंटे की नाकेबंदी शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे त्रिपुरा को देश से जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग जाम हो गया और कई ट्रेनें रद्द या पुनर्निर्धारित करनी पड़ीं।

त्रिपुरा में शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी सड़क और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। पूर्व उग्रवादियों के एक संगठन के आह्वान पर शुरू हुई 72 घंटे की नाकेबंदी थमने का नाम नहीं ले रही, जिससे राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग जाम हो गया है और रेलवे को कई ट्रेनें रद्द, आंशिक रूप से बंद या पुनर्निर्धारित करनी पड़ी हैं।

पश्चिम त्रिपुरा के तीन ठिकानों पर नाकेबंदी

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ऑल रिटर्नीज़ रिहैबिलिटेशन कमेटी के बैनर तले सैकड़ों पूर्व उग्रवादियों ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के तीन अलग-अलग स्थानों हटाईकोटर, ब्रिगुदासबाड़ी और खोवाई चौमुहनी पर नाकेबंदी कर रखी है। सड़क और रेल यातायात पर भारी असर के बावजूद पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शन अब तक शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है।

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त्रिपुरा की जीवनरेखा माने जाने वाले राजमार्ग पर सबसे ज्यादा मार

हटाईकोटर की नाकेबंदी का सबसे बड़ा असर असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ा है, जो त्रिपुरा को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग है। यह मार्ग व्यावहारिक रूप से बंद होने से पूर्वोत्तर का यह राज्य अपने प्रमुख सड़क संपर्क के जरिए मुख्य भूमि से कटा हुआ है।

पटरियों पर कब्जे के बाद कई ट्रेनें रद्द

ब्रिगुदासबाड़ी में प्रदर्शनकारी सीधे रेलवे पटरियों पर उतर आए, जिससे राज्य में ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया कि पटरियों पर कब्जे को देखते हुए उसने कई ट्रेनों को बीच रास्ते में ही समाप्त कर दिया, कुछ को रद्द किया और लंबी दूरी की ट्रेनों समेत कई सेवाओं का समय बदल दिया।

जड़ में 2024 का शांति समझौता

ऑल रिटर्नीज़ रिहैबिलिटेशन कमेटी सात आत्मसमर्पित उग्रवादी संगठनों के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है और उसने शुक्रवार से यह 72 घंटे का आंदोलन शुरू किया। संगठन की मुख्य मांग 11 सूत्री चार्टर को पूरी तरह लागू करने की है, जिसके केंद्र में 2024 में हुआ त्रिपक्षीय शांति समझौता है। इसी समझौते के तहत उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री मणिक साहा की मौजूदगी में हथियार डाले थे। चार्टर की अन्य प्रमुख मांगों में आदिवासी समुदायों के लिए भूमि अधिकार और आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के खिलाफ दर्ज सभी लंबित मामलों को वापस लेना शामिल है।

प्रशासन ने हटाईकोटर में की बातचीत

पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार ने बताया कि प्रशासन ने शुक्रवार को हटाईकोटर में पूर्व विद्रोही नेताओं के साथ शांति समझौते के लंबित बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगों पर सरकार काम करने को तैयार है और आगे जोड़ा, "सरकार समयबद्ध तरीके से समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।" कुमार ने बताया कि पूर्व उग्रवादी नेता सरकार के प्रस्तावों को अपने काडर के सामने रखने पर सहमत हुए हैं और जल्द ही प्रशासन को अपना जवाब देंगे।

72 घंटे की यह नाकेबंदी अभी जारी है, ऐसे में त्रिपुरा के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शुक्रवार की बातचीत किसी हल तक पहुंचती है या नहीं, ताकि राज्य के सड़क और रेल मार्गों पर सामान्य आवाजाही बहाल हो सके।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा में यातायात क्यों बाधित है?
ऑल रिटर्नीज़ रिहैबिलिटेशन कमेटी की 72 घंटे की नाकेबंदी के तहत शुक्रवार से सड़कों और रेलवे पटरियों को जाम किया गया है।
नाकेबंदी किन जगहों पर की गई है?
पश्चिम त्रिपुरा जिले के हटाईकोटर, ब्रिगुदासबाड़ी और खोवाई चौमुहनी में नाकेबंदी की गई है।
ट्रेनों पर क्या असर पड़ा है?
ब्रिगुदासबाड़ी में पटरियों पर कब्जे के बाद नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने कई ट्रेनें रद्द, बीच में समाप्त या पुनर्निर्धारित कर दी हैं, जिनमें लंबी दूरी की ट्रेनें भी शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?
वे 11 सूत्री चार्टर को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें 2024 का शांति समझौता, आदिवासी समुदायों के लिए भूमि अधिकार और लंबित मामलों की वापसी शामिल है।
क्या सरकार ने कोई जवाब दिया है?
पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार ने शुक्रवार को हटाईकोटर में पूर्व विद्रोही नेताओं से बातचीत की और कहा कि सरकार कुछ मांगों पर काम करने को तैयार है।
क्या असम-अगरतला राजमार्ग पूरी तरह बंद है?
हटाईकोटर की नाकेबंदी से त्रिपुरा को देश से जोड़ने वाला यह मुख्य राजमार्ग बुरी तरह प्रभावित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·52 दिन पहले

पूर्वोत्तर में शांति समझौतों के बाद आत्मसमर्पण करने वाले काडर्स के पुनर्वास और वादों के क्रियान्वयन में देरी अक्सर ऐसे गतिरोधों का कारण बनती है। प्रशासनिक स्तर पर बातचीत से समाधान की गुंजाइश है, लेकिन असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे पटरियों पर इस तरह की नाकेबंदी से राज्य की आवश्यक आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। समयबद्ध ढंग से लंबित मांगों का निपटारा न होने पर यह असंतोष भविष्य में और बड़े आंदोलनों का रूप ले सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·52 दिन पहले

त्रिपुरा के इस संकट से यह स्पष्ट होता है कि आत्मसमर्पण के बाद राजनीतिक और सामाजिक मुख्यधारा में समायोजन की प्रक्रिया कितनी नाज़ुक होती है। 2024 के त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों को समयबद्ध तरीके से लागू न किए जाने से विद्रोही समूहों में गहरा अतंरिम असंतोष उपजा है। यदि जिला प्रशासन की हालिया वार्ताओं से कोई ठोस और लिखित समाधान नहीं निकलता है, तो पूर्व उग्रवादियों के इन संगठनों द्वारा उठाई जा रही ज़मीनी अधिकारों और कानूनी मामलों की वापसी जैसी मांगें और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं।

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