त्रिपुरा के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर अपनी मताधिकार का प्रयोग किया। सोमवार दोपहर तक लगभग 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किए जाने की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव अनुराग सेन द्वारा दी गई। मतदान प्रक्रिया सुबह ठीक 7:00 बजे शुरू हुई थी, जिसमें कुल 587 ग्राम कमेटियों के लिए वोट डाले गए। ये सभी कमेटियां त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के अंतर्गत आती हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से पुख्ता सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
भारी तादाद में पहुंचे मतदाता और लंबी कतारें
राज्यभर में बनाए गए कुल 1,095 मतदान केंद्रों पर सुबह से ही वोटरों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। कई पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें नजर आईं, जो लोकतंत्र के प्रति लोगों के उत्साह को दर्शाती हैं। दूरदराज और दुर्गम इलाकों से भी लोग भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए अपने जनप्रतिनिधियों को चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचे। निर्वाचन आयोग के पास पहुंचे शुरुआती आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि कुल मतदान प्रतिशत शुरुआती घंटों में ही संतोषजनक रूप से करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच गया।
शांतिपूर्ण माहौल और त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, मतदान के दौरान राज्य के किसी भी हिस्से से किसी अप्रिय घटना या व्यवधान की कोई सूचना नहीं मिली। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तथा व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ी। सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। पोलिंग स्टेशनों पर त्रिपुरा पुलिस, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवानों के साथ-साथ केंद्रीय बलों की टुकड़ियां भी मुस्तैद रहीं ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।
सीटों का गणित और चुनावी मैदान
छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले इन क्षेत्रों में कुल 587 ग्राम कमेटियों की 4,597 सीटें हैं, जिनमें से 2,950 सीटों के लिए यह मतदान आयोजित किया गया। इसके अलावा बची हुई 1,644 सीटों पर विभिन्न दलों के मुकाबले निर्विरोध परिणाम सामने आ चुके हैं, जहां टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। वर्तमान में हो रहे चुनाव के लिए मैदान में कुल 8,176 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके भाग्य का फैसला मतदाता कर रहे हैं।



















