पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में आवागमन को सुरक्षित बनाने की दिशा में चलाए जा रहे अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। बीते तीन वर्षों के दौरान राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। परिवहन मंत्री सुशांत चौधरी ने स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित एक विशेष सड़क सुरक्षा जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम में इन आंकड़ों का ब्योरा सामने रखा। उनके अनुसार, परिवहन विभाग और राज्य पुलिस के बीच बेहतर तालमेल, सघन चेकिंग अभियान और सुरक्षा नियमों की निरंतर निगरानी से यह सुधार संभव हुआ है।
तीन वर्षों के दौरान हादसों और मौतों का लेखा-जोखा
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में त्रिपुरा की सड़कों पर कुल 577 दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिनमें 261 लोगों की जान गई थी। इसके अगले साल 2024 में हादसों का आंकड़ा 578 रहा, जबकि जान गंवाने वालों की संख्या गिरकर 226 पर आ गई। सुधार का यह सिलसिला वर्ष 2025 में भी बना रहा, जब पूरे राज्य में सड़क हादसों की संख्या घटकर 527 हो गई और इनमें जान गंवाने वालों की तादाद सिमटकर 157 रह गई।
चालू वर्ष की स्थिति स्पष्ट करते हुए परिवहन मंत्री ने बताया कि इस साल अगस्त महीने तक सड़क दुर्घटनाओं में 134 लोगों की मृत्यु दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल दुर्घटनाएं रोकना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि संकट के समय पीड़ितों को तुरंत राहत और उचित इलाज दिलाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए घायलों और प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद की जा रही है।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
सड़कों पर मनमानी और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ भी प्रशासनिक शिकंजा कसा गया है। विभागीय जांच के दौरान 524 ऐसे वाहन चिन्हित किए गए जिन पर गैर-मानक नंबर प्लेट लगी हुई थीं। इनमें से 485 मामलों में तुरंत चालान काटे गए, जिससे 2 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा, निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले अन्य 39 वाहन स्वामियों को औपचारिक नोटिस जारी किए गए हैं।
संकट में जीवन बचाने वाली तीन प्रमुख केंद्रीय योजनाएं
जागरूकता सत्र के दौरान केंद्र सरकार की तीन महत्वपूर्ण पहलों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिनमें राह-वीर, पीएम-राहत और हिट-एंड-रन मुआवजा योजना शामिल हैं। पूर्व में 'गुड सेमेरिटन' नाम से जानी जाने वाली राह-वीर योजना के तहत, यदि कोई नागरिक सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अत्यंत नाजुक यानी गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है। नियमों के तहत ऐसे मददगारों को पुलिस की अनावश्यक पूछताछ या परेशानी से भी कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
दूसरी ओर, पीएम-राहत योजना के जरिए सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को निर्धारित शर्तों के तहत 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। वहीं हिट-एंड-रन मुआवजा योजना के अंतर्गत अज्ञात वाहन की टक्कर से प्रभावित पीड़ितों अथवा उनके परिजनों को वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसकी राशि मृत्यु या गंभीर चोट की गंभीरता के आधार पर तय होती है।
जन भागीदारी से स्थायी बदलाव की अपील
योजनाओं के बावजूद मदद के लिए आगे आने वाले नागरिकों की संख्या पर चिंता जताते हुए सुशांत चौधरी ने कहा कि हादसों के अनुपात में अब भी काफी कम लोग मदद के लिए सामने आ रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि केवल वर्ष 2026 के जुलाई और अगस्त महीनों में ही 413 हादसे दर्ज किए गए, जो समाज में बड़े पैमाने पर सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
उन्होंने पंचायत समिति अध्यक्षों, जिला परिषद सदस्यों और नगर निकायों के अध्यक्षों तथा उपाध्यक्षों से आग्रह किया कि वे इन जीवनरक्षक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी अपने-अपने क्षेत्रों के हर नागरिक तक पहुंचाएं। उनका कहना था कि सड़क सुरक्षा का संदेश किसी वार्षिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि जन भागीदारी के जरिए इसे एक निरंतर चलने वाले जन आंदोलन में बदला जाना चाहिए।























