शाह परिवार के भीतर रिश्तों की खींचतान और नए संकल्पों के बीच कहानी में एक नया मोड़ सामने आया है। परिवार के सभी सदस्यों की मौजूदगी में किंजल ने अनुपमा के प्रति अपना गहरा आदर व्यक्त किया। उसने अनुपमा को केवल एक सास नहीं बल्कि अपनी सच्ची मां, मार्गदर्शक और सबसे बड़ा संबल करार दिया। इस आत्मीय संवाद के तुरंत बाद किंजल ने एक बड़ा फैसला साझा करते हुए घोषणा की कि वह अपने पिता राखी दवे के अधूरे सपने को साकार करने के इरादे से दोबारा कोचिंग क्लासेस शुरू करने जा रही है। इस निर्णय से उत्साहित होकर अनुपमा ने उसका हौसला बढ़ाया और पूरे विधि-विधान से पूजा संपन्न कराकर उसे आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दीं।
पारितोष के तंज पर अनुपमा का तीखा पलटवार
किंजल के इस सकारात्मक प्रयास पर खुशी का माहौल अभी बन ही रहा था कि पारितोष ने अपने पुराने रवैये के तहत अड़ंगा लगाना शुरू कर दिया। उसने किंजल की काबिलियत पर सवाल उठाते हुए उपहास उड़ाया और दावा किया कि उससे कोचिंग संस्थान का संचालन नहीं हो पाएगा। पारितोष के इस नकारात्मक दृष्टिकोण को सुनकर अनुपमा का संयम टूट गया। उसने सीधे शब्दों में पारितोष को आड़े हाथों लिया और स्पष्ट चेतावनी दी कि वह किसी भी स्त्री के सामर्थ्य और परिश्रम का अनादर न करे। अनुपमा ने दो टूक कहा कि दूसरों के प्रयासों पर नुक्ताचीनी करने के बजाय उसे पहले अपने खुद के आचरण और जिम्मेदारियों की ओर देखना चाहिए।
कैफे विस्तार की योजना और प्रेम के सामने राही का दिल
दूसरी तरफ व्यावसायिक मोर्चे पर भी नई हलचल देखने को मिली। राही और प्रेम के बीच कैफे के भविष्य और उसे व्यापक स्तर पर ले जाने को लेकर गहन चर्चा हुई। राही ने कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए एक योग्य साझेदार की अहमियत समझाई। बातचीत के दौरान प्रेम ने पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया कि उसकी दक्षता केवल पाक कला और व्यंजन तैयार करने तक सीमित है, वह कोई कुशल व्यापारी नहीं है। इस स्वीकारोक्ति पर राही ने उसकी झिझक मिटाई और दोनों ने मिलकर कैफे को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया। इसी आत्मीय पल में राही ने बिना किसी संकोच के प्रेम के समक्ष अपने प्रेम की भावनाएं भी व्यक्त कर दीं।
कार्यभार के तनाव में बिगड़ी अनुपमा की तबीयत
शाह सदन में लीला यानी बा इस चिंता में घिरी नजर आईं कि परिवार के अन्य लोग अपने-अपने कामों में उलझे हैं, जिसके चलते घरेलू जिम्मेदारियों का सारा भार उन्हीं पर आ रहा है। अनुपमा और किंजल ने बा को आश्वस्त किया कि घर के कामकाज को वे खुद पूरी तरह संभाल लेंगी। इसी बीच हसमुख ने बा को समझाया कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें अकेलेपन और व्यर्थ की चिंताओं को त्यागकर शांत मन से जीवन का आनंद लेना चाहिए। हालांकि, परिवार के प्रति समर्पण के चलते अनुपमा ने बिना रुके लगातार काम करना जारी रखा। अत्यधिक शारीरिक थकान और मानसिक तनाव के कारण अचानक उसे चक्कर आने लगे और उसकी हालत बिगड़ गई। अनुपमा की यह अस्वस्थता देखकर दिग्विजय समेत घर का प्रत्येक सदस्य बेहद चिंतित हो उठा।
गणेशोत्सव पर अनुचित चंदे की मांग और अनुपमा की अग्निपरीक्षा
घर में गणेशोत्सव की तैयारियां चल रही थीं और अनुपमा श्रद्धापूर्वक स्वयं अपने हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमा को आकार दे रही थी। इसी दौरान इलाके के कुछ स्थानीय युवकों ने वहां पहुंचकर पूजा के नाम पर 51 हजार रुपये के भारी चंदे की अनुचित मांग रख दी। जब हसमुख ने सौहार्दपूर्वक 1100 रुपये की सहयोग राशि देनी चाही, तो उन युवकों ने अभद्रता दिखाते हुए कम से कम 21 हजार रुपये नकद लेने की जिद पकड़ ली। इस अनुचित दबाव और बदसलूकी को देख अनुपमा ने सीधे टकराव के बजाय उन्हें सबक सिखाने की एक अनूठी रणनीति बनाई। उसने उन लड़कों के सामने एक चुनौती रखी कि यदि वे उसके पूछे गए 3 सरल प्रश्नों के सही उत्तर दे देंगे, तो वह बिना किसी आपत्ति के उन्हें पूरे 21 हजार रुपये चंदे के रूप में सौंप देगी।



















