टेलीविजन धारावाहिक अनुपमा के कथानक में लगातार आने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव दर्शकों को बांधे हुए हैं। मुख्य किरदार अनुपमा के जीवन में परेशानियां भले ही थमने का नाम नहीं ले रही हैं, लेकिन वह हर प्रतिकूल परिस्थिति के सामने मजबूती से डटकर खड़ी है। मुश्किल के इस दौर में जहां राही और प्रेम पूरी निष्ठा के साथ अनुपमा की ढाल बने हुए हैं, वहीं दिग्विजय भी उसे जिंदगी की नई शुरुआत करने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। कानूनी औपचारिकताओं से निपटने के लिए पुलिस थाने के चक्कर लगाने से लेकर अपने व्यावसायिक उपक्रम के विस्तार तक, वह अपनी हर लड़ाई का सामना करने के लिए तैयार दिख रही है।
थानेदार से सीधी बात और जांच शुरू कराने का संकल्प
कहानी के नए घटनाक्रम की शुरुआत में राही और प्रेम के मध्य अनुपमा की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर चर्चा देखने को मिलती है। राही इस बात से बेहद चिंतित और क्षुब्ध है कि आखिर अनुपमा के दैनिक जीवन में हर दिन नए संकट और तनाव क्यों खड़े हो जाते हैं। इस बीच अनुपमा बिना हिम्मत हारे मामले की कानूनी प्रगति जानने के लिए स्वयं पुलिस थाने जाने का दृढ़ संकल्प लेती है, ताकि संबंधित मामले की फाइलों की पड़ताल करा सके।
जब थाने में मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर लापरवाही दिखाते हुए अनुपमा को बाद में आने की बात कहकर टालने की कोशिश करता है, तो अनुपमा बेहद तल्ख तेवर अपना लेती है। वह पुलिस अधिकारी को स्पष्ट और दो टूक चेतावनी देते हुए समझाती है कि यदि व्यवस्था की लापरवाही से तंग आकर आम नागरिक सड़कों पर उतर आए तो प्रशासन के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। अनुपमा का यह कड़ा और निडर रुख देखकर पुलिस अफसर तुरंत हरकत में आता है और मामले की औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला कर लेता है।
मसालों का उद्यम, कैटरिंग ऑर्डर और बप्पा के स्वागत की तैयारी
पुलिस थाने से घर लौटने के बाद दिग्विजय अनुपमा की सेहत का ख्याल रखते हुए उसे भोजन ग्रहण करने के लिए मनाता है। इसके बाद अनुपमा अपने मसालों के कारोबार को नए स्तर पर ले जाने की योजना बनाती है। उसकी मेहनत रंग लाती है और उसे अचानक 150 लोगों के नाश्ते की कैटरिंग का एक बड़ा अनुबंध हासिल हो जाता है, जिससे उसकी नई शुरुआत को बल मिलता है।
व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ परिवार में अन्य सकारात्मक कदम भी उठाए जाते हैं। किंजल अपने नए कोचिंग संस्थान की शुरुआत अनुपमा के नाम पर करने का निर्णय लेती है, क्योंकि उसका गहरा विश्वास है कि अनुपमा का नाम सौभाग्य और सफलता लेकर आता है। इसके अलावा आगामी गणेश चतुर्थी के पावन पर्व को देखते हुए अनुपमा यह संकल्प लेती है कि वह बाजार से मूर्ति खरीदने के बजाय स्वयं अपने हाथों से भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करेगी।
चंदे की मनमानी मांग पर अनुपमा का अनोखा इम्तिहान
आगामी घटनाक्रम के पूर्वावलोकन में दिखाया गया है कि गणेश उत्सव के आयोजन की आड़ में कुछ युवक अनुपमा के घर पर भारी-भरकम चंदा वसूलने पहुंचते हैं। वे सीधे तौर पर 51 हजार रुपये की बड़ी राशि की मांग रख देते हैं, जिसके जवाब में हसमुख उन्हें श्रद्धापूर्वक 1100 रुपये देने की पेशकश करते हैं।
युवक इस राशि को ठुकराते हुए कम से कम 21 हजार रुपये की मांग पर अड़ जाते हैं और जिद करने लगते हैं। युवकों के इस अड़ियल रवैये को देखकर अनुपमा आगे आती है और उनके समक्ष एक अनूठी शर्त रख देती है। अनुपमा उन युवकों से कहती है कि वह उनसे तीन अत्यंत सरल सवाल पूछेगी। यदि वे उन तीनों प्रश्नों के सही उत्तर दे देते हैं, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें पूरे 21 हजार रुपये सौंप देगी। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या वे युवक अनुपमा के सवालों का सामना कर पाते हैं या उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।



















