सिनेमा जगत में अक्सर बड़े सितारों, नामी निर्देशकों और भारी भरकम प्रचार तंत्र के बिना किसी फिल्म का टिक पाना नामुमकिन माना जाता है। लेकिन जब नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित फिल्म हनुमान अंश सिनेमाघरों में दाखिल हुई, तो किसी को इस बात की तनिक भी भनक नहीं थी कि यह शांत शुरुआत एक ऐतिहासिक मोड़ लेने जा रही है। इस परियोजना के पीछे न तो कोई दिग्गज फिल्म निर्माता खड़ा था और न ही कोई मशहूर निर्देशक। यहां तक कि फिल्म के कलाकार भी पहली बार कैमरा फेस कर रहे थे और इसके निर्माण में पूंजी लगाने वाले निर्माता भी सिनेमा कारोबार के लिहाज से पूरी तरह नौसिखिया थे। इन नए कलाकारों ने केवल आस्था और समर्पण के सहारे यह प्रयास शुरू किया था, बिना यह सोचे कि यह छोटा सा प्रोजेक्ट बॉक्स ऑफिस पर किस कदर हैरतअंगेज चमत्कार कर दिखाएगा।
तीन स्क्रीन्स से शुरू हुआ करिश्माई सफर
केवल 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार की गई यह फिल्म जब 7 अगस्त को पर्दे पर उतरी, तो देश भर में इसे सिर्फ 3 थिएटर्स की स्क्रीनिंग नसीब हो सकी। बिना किसी हाइप, बड़े स्टारडम या बड़े मार्केटिंग बजट के कारण फिल्म ने टिकट खिड़की पर बेहद धीमी शुरुआत की। शुरुआती आंकड़ों को देखकर कोई भी बॉक्स ऑफिस जानकार यह अनुमान लगा सकता था कि यह कुछ ही दिनों में गायब हो जाएगी। मगर जल्द ही कहानी का रुख पूरी तरह पलट गया। सिनेमाघरों से निकले दर्शकों की जुबानी तारीफ, जिसे माउथ पब्लिसिटी कहा जाता है, उसने अपना जादू दिखाना शुरू किया। इसके बाद सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर फिल्म से जुड़ी भावनात्मक और प्रेरक वीडियो क्लिप्स तेजी से वायरल होने लगीं, जिसने सिनेमाघरों की तरफ आम लोगों की जबरदस्त भीड़ खींच ली।
मांग बढ़ने पर बढ़ानी पड़ी स्क्रीनिंग
दर्शकों के इस अप्रत्याशित हुजूम को देखते हुए सिनेमाघर संचालकों को फिल्म के शोज और स्क्रीन्स की संख्या में भारी इजाफा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। शुरुआत में महज 3 सिनेमाघरों में सिमटी यह छोटी सी फिल्म आज 1 करोड़ से अधिक दर्शकों द्वारा देखी जा चुकी है। इसे दर्शक की आस्था का असर कहें, पटकथा की सादगी या सीधे नीम करौली बाबा की कृपा, इसने साबित कर दिया कि कहानी में जान हो तो संसाधनों की कमी रुकावट नहीं बनती। रिलीज के 40 दिन बीत जाने के बाद भी यह फिल्म मजबूती से सिनेमाघरों में टिकी हुई है। हालांकि, भारतीय बॉक्स ऑफिस के इतिहास में यह अकेला ऐसा उदाहरण नहीं है जब बिना किसी स्टार पावर के किसी कम बजट वाली फिल्म ने इतना बड़ा तहलका मचाया हो।
तीन साल पुराना द केरल स्टोरी का तूफान
ठीक 3 साल पहले, यानी साल 2023 में भी ठीक ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब बिना किसी बड़े सुपरस्टार और बिना किसी भव्य प्रचार अभियान के एक फिल्म पर्दे पर आई और टिकट खिड़की पर नोटों की बरसात कर गई। निर्देशक सुदिप्तो सेन के निर्देशन में बनी फिल्म द केरल स्टोरी जब थिएटर्स में रिलीज हुई, तो इसे लेकर चारों तरफ तीखी राजनीतिक बहस और विवाद खड़ा हो गया था। फिल्म का विषय धर्म परिवर्तन के अत्यंत संवेदनशील और राजनीतिक पहलू पर केंद्रित था। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी के चलते यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कब आएगी और कब चली जाएगी, किसी को पता भी नहीं चलेगा।
लेकिन जैसे ही पहले दौर के दर्शक सिनेमाघरों से बाहर निकले, सार्वजनिक मंचों पर इस फिल्म को लेकर बहस चरम पर पहुंच गई। जैसे-जैसे विवाद और राजनीतिक चर्चाएं गरमाती गईं, वैसे-वैसे टिकट खिड़की पर दर्शकों की कतारें लंबी होती चली गईं। हालांकि हनुमान अंश की तुलना में इसका बजट थोड़ा अधिक था, जो लगभग 15 से 20 करोड़ रुपये के आसपास आंका गया था, लेकिन इसके मुनाफे और कमाई ने पूरे फिल्म उद्योग को सन्न कर दिया था।
कमाई के नए कीर्तिमान और बॉक्स ऑफिस आंकड़े
सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, द केरल स्टोरी ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जबर्दस्त प्रदर्शन किया और इसका कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 302 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भारत के घरेलू बाजार में फिल्म ने अभूतपूर्व कारोबार करते हुए 286.50 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन हासिल किया, जबकि इसका नेट कलेक्शन 241.74 करोड़ रुपये दर्ज हुआ।
इतना ही नहीं, भारत के बाहर विदेशी दर्शकों ने भी इस कंटेंट में गहरी रुचि दिखाई, जिसके चलते ओवरसीज मार्केट से फिल्म ने 15.50 करोड़ रुपये की कमाई जुटाई। केवल 15 से 20 करोड़ रुपये के बजट में तैयार होकर 302 करोड़ रुपये का विशाल आंकड़ा छूना किसी भी मध्यम बजट की फिल्म के लिए ऐतिहासिक माना जाता है। इस भारी भरकम कमाई में विषय के साथ उपजे विवादों और निरंतर होने वाली चर्चाओं ने एक बड़ा उत्प्रेरक का काम किया था।
सीक्वल में बदलाव और दर्शकों की बेरुखी
पहली फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के करीब ढाई साल बाद निर्माताओं ने इसके अगले भाग यानी सीक्वल को लाने का फैसला किया। साल 2025 में द केरल स्टोरी 2 को सिनेमाघरों में उतारा गया, लेकिन इस बार फिल्म की पूरी जमीन बदल चुकी थी। सीक्वल में न केवल नए कलाकारों को लाया गया बल्कि निर्देशन की कमान भी बदल दी गई, और मूल फिल्म के निर्देशक सुदिप्तो सेन इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं थे। पहली किस्त की तरह भारी मुनाफा कमाने और रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद के साथ आई इस दूसरी फिल्म को दर्शकों ने सिरे से नकार दिया। कहानी में ताजगी और जुड़ाव की कमी के चलते द केरल स्टोरी 2 सिनेमाघरों में बेहद कमजोर साबित हुई और फ्लॉप होकर सिमट गई।


















