पहनावे और धार्मिक पहचान को लेकर समाज में अक्सर बंधी-बंधाई लकीरें देखने को मिलती हैं, मगर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के पयागपुर इलाके में एक शख्सियत ऐसी है जिसने सामाजिक धारणाओं को पीछे छोड़कर एक अनूठी राह चुनी है। हिंदू परिवार में जन्मे और वर्मा उपनाम वाले रुद्र सेन वर्मा पिछले 16 वर्षों से लगातार पगड़ी बांधते हैं, दाढ़ी और मूंछें संवारते हैं और उनका पूरा पहनावा एक सिख जैसा रहता है। अपने इलाके में वे अब इस कदर रच-बस चुके हैं कि जो लोग उनसे पहली बार मिलते हैं, वे उन्हें बेहद आदर के साथ सरदार जी या पंजाबी वाले कहकर पुकारते हैं।
आर्थिक तंगी के बीच पंजाब का सफर और जीवन में बदलाव
रुद्र सेन वर्मा के जीवन की कहानी संघर्षों से भरी रही है। एक दौर ऐसा था जब उनका परिवार गंभीर आर्थिक तंगी और घरेलू कठिनाइयों से जूझ रहा था। परिवार के भरण-पोषण और आजीविका की तलाश में उन्होंने अपना पैतृक घर छोड़ा और रोजगार ढूंढते हुए पहले हरियाणा और उसके बाद पंजाब के लुधियाना शहर पहुंचे। लुधियाना में उन्हें सुपर न्यू पंजाबी प्रोडक्शंस नाम के एक संस्थान में काम करने का अवसर मिला। इस कंपनी के मालिक खेता सिंह थे, जिनके साथ काम करते हुए और अन्य सिख सहकर्मियों की संगत में रुद्र के जीवन को एक नई दिशा मिली।
लुधियाना में सिख समुदाय के बीच करीब छह से सात साल बिताने के दौरान रुद्र उनके तौर-तरीकों, काम के प्रति लगन और जीवन मूल्यों से गहरे प्रभावित हुए। वहां के परिवेश ने उनके भीतर एक नई समझ पैदा की। रुद्र बताते हैं कि उस माहौल ने उन्हें सिखाया कि इंसान को सदैव अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए और दूसरों के अधिकारों में बेवजह दखल नहीं देना चाहिए। वहां रहने वाले लोगों की सच्चाई, अनुशासन और सादगी ने उनका मन मोह लिया। इसी अनुभव ने उन्हें यह अहसास कराया कि जीवन को किसी अनूठी मिसाल के तौर पर जिया जाना चाहिए। यहीं से उन्होंने धीरे-धीरे पगड़ी बांधना, दाढ़ी-मूंछें रखना और सिख जीवनशैली के नियमों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना शुरू किया।
गृह जनपद वापसी पर रिश्तेदारों के ताने और सोच का इम्तिहान
जब 16 वर्ष पूर्व रुद्र पंजाब से अपने गृह जनपद बहराइच के पयागपुर वापस लौटे, तो उनका बदला हुआ स्वरूप देखकर परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग अचंभे में पड़ गए। समाज में उनके इस पहनावे को लेकर तरह-तरह की बातें बनने लगीं और लोगों ने उन पर तंज कसते हुए यह तक पूछना शुरू कर दिया कि क्या उन्होंने अपना धर्म बदल लिया है। इन तमाम सवालों और सामाजिक दबाव के सामने रुद्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने बेहद शांत भाव से अपना पक्ष रखा।
रुद्र ने सवाल उठाने वालों को स्पष्ट किया कि नेक कर्म किसी दिखावे के मोहताज नहीं होते, बल्कि इंसान के दिल और नीयत से तय होते हैं। केवल किसी विशेष वेशभूषा का ढोंग करने से कोई व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं बन जाता। उन्होंने साफ किया कि यह किसी प्रकार का मतांतरण नहीं है, बल्कि उनकी अपनी व्यक्तिगत रुचि और चुनी हुई जीवनशैली है, जिसे उन्होंने पूरी आत्मीयता से अपने जीवन में ढाल लिया है।
सफल किसानी और आने वाली पीढ़ी को सीख
आज बहराइच में रुद्र सेन वर्मा की एक विशिष्ट पहचान बन चुकी है। जो परिचित उन्हें बचपन या नाम से जानते हैं, वे उन्हें वर्मा जी कहते हैं, जबकि अजनबी उन्हें पूरा सम्मान देते हुए सरदार जी कहकर पुकारते हैं। गृहस्थ जीवन में शादीशुदा और एक बेटे के पिता रुद्र पिछले 16 वर्षों से बिना नागा पगड़ी बांधने की इस परंपरा को निभा रहे हैं। उनकी दिली ख्वाहिश है कि वे आगे चलकर अपने बेटे को भी पगड़ी बांधने की कला सिखाएं और इस जीवनशैली की परंपरा को परिवार में आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही वे एक सफल किसान के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं और बहराइच स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से मार्गदर्शन प्राप्त कर आधुनिक खेती में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।























