उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में पारिवारिक जिम्मेदारी और भाई-बहन के अटूट प्रेम की एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। महमूदाबाद नगर के कुरैशी मार्ग में रहने वाले 55 वर्षीय लालू पटवा के बीमारी के कारण निधन के बाद उनकी 60 वर्षीय बहन विमला देवी ने सामाजिक रूढ़ियों को दरकिनार करते हुए स्वयं अंतिम संस्कार की कमान संभाली। घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद न होने के कारण विमला देवी ने पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अपने भाई का अंतिम संस्कार संपन्न कराया और रमुआपुर मुक्तिधाम में उन्हें मुखाग्नि देकर विदाई दी।
लालू पटवा का अकेला जीवन और अचानक निधन
महमूदाबाद के कुरैशी मार्ग निवासी 55 वर्षीय लालू पटवा संकटा देवी मंदिर परिसर में एक छोटी सी दुकान चलाकर अपना जीवन यापन करते थे। कुछ वर्ष पूर्व उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई थीं, जिसके बाद से वे घर में अकेले ही रह रहे थे। वे अपने परिवार के इकलौते पुरुष सदस्य थे। अचानक बीमारी की चपेट में आने से उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई, जिसके चलते उनका निधन हो गया। उनके गुजर जाने के बाद परिवार में ऐसा कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा था जो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्मों को पूरा कर सके।
बहन विमला देवी ने संभाली अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
भाई के निधन की सूचना मिलते ही उनकी 60 वर्षीय बड़ी बहन विमला देवी तुरंत मौके पर पहुंचीं। परिवार में किसी पुरुष सदस्य के न होने से उपजे संकट के बीच विमला देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के भाई की अंतिम यात्रा और दाह संस्कार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने का फैसला किया। उन्होंने पारंपरिक सामाजिक प्रथाओं से ऊपर उठकर एक बहन के कर्तव्य को प्राथमिकता दी। विमला देवी अपने भाई लालू पटवा के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए रमुआपुर स्थित मुक्तिधाम लेकर गईं और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं स्वयं कीं।
रमुआपुर मुक्तिधाम में नम आंखों से दी मुखाग्नि
अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया जब रमुआपुर मुक्तिधाम में विमला देवी ने वैदिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपने भाई को मुखाग्नि दी। सामान्य तौर पर हिंदू परंपराओं में अंतिम संस्कार के समय मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा निभाई जाती है। लेकिन इस विषम परिस्थिति में विमला देवी का यह साहसिक कदम देखकर वहां उपस्थित सभी लोगों का हृदय भर आया। मुक्तिधाम में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं।
स्थानीय लोगों ने विमला देवी के साहस की सराहना की
लालू पटवा की अंतिम यात्रा और दाह संस्कार के समय महमूदाबाद के बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एकत्र हुए थे। सभी ने दिवंगत लालू पटवा को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित की और दुखी बहन विमला देवी के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। वहां उपस्थित लोगों ने कहा कि विमला देवी ने यह सिद्ध कर दिया कि भाई-बहन का अटूट रिश्ता केवल सुख-दुख के मौकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन के अंतिम सफर तक साथ निभाने का नाम है। कठिन समय में विमला देवी द्वारा दिखाया गया यह धैर्य और साहस पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।




















