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चंदौली में सुभासपा को बड़ा झटका, दर्जनों नेताओं ने छोड़ी ओमप्रकाश राजभर की पार्टीउत्तर प्रदेश
20 अक्तू॰ 2026, 3:36 pm (1 घंटे पहले)· 2

चंदौली में सुभासपा को बड़ा झटका, दर्जनों नेताओं ने छोड़ी ओमप्रकाश राजभर की पार्टी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले चंदौली में सुभासपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा देकर बगावत कर दी है। एक तरफ पार्टी गठबंधन में 33 सीटों का दावा ठोक रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर असंतोष गहरा गया है।

उत्तर प्रदेश की चुनावी हलचलों के तेज होते ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सतह पर आ गई है। चंदौली जिले में मंगलवार को पार्टी संगठन को उस वक्त भारी झटका लगा, जब कई प्रमुख पदाधिकारियों समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सामूहिक त्यागपत्र दे दिया। चुनावी तैयारियों के बीच कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी ने पूर्वांचल में पार्टी के सांगठनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंदौली में बगावत और सामूहिक इस्तीफे

चंदौली में सामने आए इस घटनाक्रम के तहत पार्टी के जमीनी नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली पर रोष जताया है। पद छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में निष्ठावान लोगों की अनदेखी की जा रही है। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सभी दल जब अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं, ऐसे नाजुक मोड़ पर दर्जनों सक्रिय सदस्यों का अलग होना सुभासपा की स्थानीय रणनीति को कमजोर कर सकता है।

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सीटों के मोलभाव के बीच सांगठनिक संकट

यह बगावत ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल सुभासपा 2027 के चुनावों के लिए 33 सीटों की मांग पर अड़ी है। ओमप्रकाश राजभर सहयोगी दलों के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कराकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाली 9 सीटों और निषाद पार्टी की 2 सीटों पर भी अपनी दावेदारी पेश की है। इसके अतिरिक्त, वे पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने और वहां राजभर समुदाय से पहला मुख्यमंत्री चुनने जैसी राजनीतिक बहसों को भी हवा दे रहे हैं।

पंचायत चुनाव और आगामी चुनौतियां

उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री का दायित्व संभाल रहे ओमप्रकाश राजभर ने हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर 15 जनवरी से पहले पंचायत चुनाव कराने की तत्परता भी जताई है। साथ ही, वे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आपसी मतभेदों पर तंज कसते हुए लगातार आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। हालांकि, अपने ही गढ़ चंदौली में हुए इस ताजा विद्रोह ने यह साफ कर दिया है कि बड़े चुनावी दांव खेलने से पहले राजभर को अपने घर में उपजे असंतोष को थामना होगा।

सवाल-जवाब

चंदौली में सुभासपा के कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा क्यों दिया?
पार्टी प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के कामकाज के तरीके और संगठन में अनदेखी से नाराज होकर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया।
सुभासपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कितनी सीटों की मांग की है?
पार्टी ने गठबंधन के तहत 33 सीटों पर दावा किया है, जिसमें भाजपा और निषाद पार्टी के प्रभाव वाली सीटें भी शामिल हैं।
ओमप्रकाश राजभर वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में किस पद पर हैं?
ओमप्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री के पद पर कार्यरत हैं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर राजभर ने पंचायत चुनावों को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सरकार 15 जनवरी से पहले पंचायत चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·10 मिनट पहले

चुनाव से ठीक पहले इतने सारे लोगों का एक साथ छोड़ना थोड़ा अजीब लग रहा है। सिर्फ टिकट बंटवारे की बात नहीं लगती, अंदर कुछ और ही खिचड़ी पक रही है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·37 मिनट पहले

पिछली बार जब मैं चंदौली गया था, तो वहां राजभर जी के समर्थकों का जोश देखने लायक था। आज अपनों का ही यूं बगावत करना देखकर हैरानी हो रही है, घर संभालना सबसे मुश्किल होता है।

Ravikash Gupta@ravikash·36 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पर क्या लगता है, राजभर जी अपनी ही पार्टी के इन नाराज कार्यकर्ताओं को चुनाव से पहले मना पाएंगे?

Rohan Verma@rohan-verma·59 मिनट पहले

चंदौली में इतने इस्तीफे हुए हैं, पर लगता है मामला सिर्फ टिकट न मिलने का है, कोई बड़ी बगावत नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 मिनट पहले

रोहन, टिकट न मिलना भी तो बड़ी बात है, पर क्या सच में सिर्फ टिकट का मामला है या जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी?

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