उत्तर प्रदेश की चुनावी हलचलों के तेज होते ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सतह पर आ गई है। चंदौली जिले में मंगलवार को पार्टी संगठन को उस वक्त भारी झटका लगा, जब कई प्रमुख पदाधिकारियों समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सामूहिक त्यागपत्र दे दिया। चुनावी तैयारियों के बीच कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी ने पूर्वांचल में पार्टी के सांगठनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चंदौली में बगावत और सामूहिक इस्तीफे
चंदौली में सामने आए इस घटनाक्रम के तहत पार्टी के जमीनी नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली पर रोष जताया है। पद छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में निष्ठावान लोगों की अनदेखी की जा रही है। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सभी दल जब अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं, ऐसे नाजुक मोड़ पर दर्जनों सक्रिय सदस्यों का अलग होना सुभासपा की स्थानीय रणनीति को कमजोर कर सकता है।
सीटों के मोलभाव के बीच सांगठनिक संकट
यह बगावत ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल सुभासपा 2027 के चुनावों के लिए 33 सीटों की मांग पर अड़ी है। ओमप्रकाश राजभर सहयोगी दलों के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कराकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाली 9 सीटों और निषाद पार्टी की 2 सीटों पर भी अपनी दावेदारी पेश की है। इसके अतिरिक्त, वे पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने और वहां राजभर समुदाय से पहला मुख्यमंत्री चुनने जैसी राजनीतिक बहसों को भी हवा दे रहे हैं।
पंचायत चुनाव और आगामी चुनौतियां
उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री का दायित्व संभाल रहे ओमप्रकाश राजभर ने हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के मद्देनजर 15 जनवरी से पहले पंचायत चुनाव कराने की तत्परता भी जताई है। साथ ही, वे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आपसी मतभेदों पर तंज कसते हुए लगातार आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। हालांकि, अपने ही गढ़ चंदौली में हुए इस ताजा विद्रोह ने यह साफ कर दिया है कि बड़े चुनावी दांव खेलने से पहले राजभर को अपने घर में उपजे असंतोष को थामना होगा।






















