हिमाचल के सात मंदिरों में उमड़े 10 लाख से अधिक भक्त, श्री नैना देवी जी में पहुंचे सबसे ज्यादा श्रद्धालुकुशीनगर में दर्दनाक सड़क हादसा, दशहरा मेला देखकर लौट रहे चार लोगों की मौत और तीन घायलअंबाला में मौसम का मिज़ाज बदलते ही वायरल बुखार की चपेट में आए बच्चे, नागरिक अस्पताल में लंबी कतारेंरांची में गननुमा पोर्टेबल मशीन से होगी जांच, महज तीस सेकंड में सामने आएगी किडनी और दिल की बीमारीत्योहारों में बिना प्याज-लहसुन के ऐसे बनाएं स्वादिष्ट झींगा और काले चने की सब्जीराजस्थान में मौसम का मिजाज: 21 अक्टूबर को बारिश पर विराम, जानिए पूर्वी और पश्चिमी संभागों का हालपटना में दुर्गा पूजा पंडाल के नजदीक युवक को मारी गई गोली, एक अन्य घटना में पैक्स अध्यक्ष की हत्याजनगणना 2027 को लेकर गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में कठपुतली शो, छात्रों ने दिया सही जानकारी दर्ज कराने का संदेशमेघालय की आफा नदी में मरी हुई मछलियां मिलने से हड़कंप, रासायनिक प्रदूषण की आशंकारांची के जंगलों में छिपा है कुदरती स्विमिंग पूल, तैमारा घाटी का यह खूबसूरत कोना बना पिकनिक की खास पसंद
अगरतला के दुर्गाबाड़ी मंदिर में महा नवमी पर दी गई बलि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का रखा गया ध्यानत्रिपुरा
20 अक्तू॰ 2026, 4:36 pm (1 घंटे पहले)· 2

अगरतला के दुर्गाबाड़ी मंदिर में महा नवमी पर दी गई बलि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का रखा गया ध्यान

अगरतला के ऐतिहासिक दुर्गाबाड़ी मंदिर में महा नवमी के मौके पर कड़ी गोपनीयता के बीच पारंपरिक पशु बलि दी गई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया गया ताकि आम जनता की नजरों से रस्में दूर रहें।

अगरतला स्थित दुर्गाबाड़ी मंदिर में महा नवमी का पर्व पारंपरिक अनुष्ठानों और सख्त सुरक्षा के बीच मनाया गया। इस दौरान एक भैंसे और कई बकरों की बलि दी गई, जिसे मंदिर प्रशासन ने 149 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा बताया है। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार के साथ यह धार्मिक विधि पूरी की गई, लेकिन इसे आम लोगों की नजरों से पूरी तरह ओझल रखा गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई गाइडलाइंस और शर्तों का पालन करते हुए इस पूरी प्रक्रिया को जनता की पहुंच से दूर स्क्रीन के पीछे अंजाम दिया गया।

परंपरा और कानूनी इतिहास

मंदिर के मुख्य पुजारी जयंत भट्टाचार्य ने इस अनुष्ठान को पूजा का केंद्रीय हिस्सा बताते हुए स्पष्ट किया कि इसके बिना यह विशेष पूजा अधूरी मानी जाती है। हालांकि, इस सदियों पुरानी प्रथा का कानूनी इतिहास काफी उलझा हुआ रहा है। साल 2019 में त्रिपुरा हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसकी अध्यक्षता तब के चीफ जस्टिस संजय करोल ने की थी, ने राज्य के सभी मंदिरों में पशुओं और पक्षियों की बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश के दायरे में प्रसिद्ध मां त्रिपुरा सुंदररी मंदिर भी शामिल था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी, लेकिन इसके साथ ही मंदिर प्रबंधन के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें भी निर्धारित कर दीं, जिनका पालन अब किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

प्रसाद और शाही परंपराएं

मंदिर के प्रभारी प्रदीप देबनाथ ने स्पष्ट किया कि देवी को अर्पित किए जाने वाले भोग का कोई निश्चित या तय मेनू नहीं होता है। उनके अनुसार, भक्त जो कुछ भी श्रद्धा के साथ दान करते हैं या बलि के रूप में लाते हैं, उसे देवी को समर्पित कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मंदिर में मांस और मछली के प्रसाद पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है। गौरतलब है कि दुर्गाबाड़ी मंदिर में होने वाले दुर्गा पूजा उत्सव का आयोजन पश्चिम त्रिपुरा जिला प्रशासन द्वारा सीधे तौर पर माणिक्य राजवंश की ओर से किया जाता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को बनाए रखता है।

दशमी की तैयारियां और विदाई

महा नवमी के अनुष्ठान संपन्न होने के बाद अब सारा ध्यान आगामी दशमी के कार्यक्रमों पर केंद्रित हो गया है। पुजारी के अनुसार, दशमी की सुबह पुलिस प्रशासन की तरफ से मंदिर परिसर में देवी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद पवित्र कलश को एक भव्य शोभायात्रा के साथ उज्ज्वयंटा पैलेस ले जाया जाएगा, जहां शाही परिवार के सदस्य और वंशज मां दुर्गा को अपनी अंतिम विदाई देंगे। इस पूरी प्रक्रिया के साथ ही त्रिपुरा में इस साल के दुर्गा पूजा उत्सवों का पारंपरिक समापन होगा।

सवाल-जवाब

दुर्गाबाड़ी मंदिर कहां स्थित है?
दुर्गाबाड़ी मंदिर त्रिपुरा के अगरतला में स्थित है।
महा नवमी पर मंदिर में कौन से पशुओं की बलि दी गई?
महा नवमी के मौके पर एक भैंसे और कई बकरों की बलि दी गई।
यह परंपरा कितने साल पुरानी है?
मंदिर अधिकारियों के अनुसार यह परंपरा 149 साल पुरानी है।
किस अदालत ने पहले पशु बलि पर रोक लगाई थी?
त्रिपुरा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 2019 में राज्य के मंदिरों में पशु बलि पर रोक लगाई थी।
हाई कोर्ट के आदेश पर किसने रोक लगाई थी?
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए त्रिपुरा हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई थी।
दुर्गा पूजा उत्सव का आयोजन कौन करता है?
दुर्गाबाड़ी में दुर्गा पूजा का आयोजन पश्चिम त्रिपुरा जिला प्रशासन द्वारा माणिक्य राजवंश की ओर से किया जाता है।
दशमी के दिन पवित्र कलश को कहां ले जाया जाता है?
दशमी के दिन पवित्र कलश को उज्ज्वयंटा पैलेस ले जाया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 मिनट पहले

परंपरा और अदालती आदेशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश ठीक है, पर जनता की नज़रों से छिपाकर रस्में पूरी करना थोड़ा अजीब लगता है।

Ravikash Gupta@ravikash·23 मिनट पहले

अर्जुन जी, मैं पिछले साल जब अगरतला गया था, तब दुर्गाबाड़ी मंदिर की उस भव्य शाही परंपरा को पास से देखा था। सुप्रीम कोर्ट की शर्तें अपनी जगह हैं, पर सदियों पुराने रिवाजों का इस तरह छुपकर होना थोड़ा अजीब तो लगता ही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·49 मिनट पहले

दुर्गाबाड़ी में बचपन की महा नवमी की वो भीड़ याद आ गई, जहाँ ढोल की थाप के बीच पूरा शहर उमड़ पड़ता था। कानून और परंपरा के इस संतुलन को देखकर पुराना समय ताजा हो गया।

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

करण भाई, 149 साल पुरानी इस परंपरा को पर्दे के पीछे निभाते देखना सचमुच अजीब सा लगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp