नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर राहुल गांधी ने की लाइव मीडिया से बातसिंह राशि में सूर्य-बुध की युति से बनेगा बुधादित्य राजयोग, 22 अगस्त से 3 राशियों की चमकेगी किस्मतलाइव: दिल्ली के थाने पर धरना दे रहे राहुल गांधी, प्रदर्शनकारी को पेलेट गन लगने के मामले में FIR दर्ज करने की मांगओडिशा अवैध खनन मामले में कारोबारी रतिकांत राउत गिरफ्तार, ईडी अधिकारी को 20 लाख रिश्वत देने का भी है आरोपआज बंद हो रहा गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट IPO, GMP से मिले 15% संभावित लिस्टिंग गेन के संकेतबबीता सिंह रिपोर्टिंग में पुलिस अफसर बनीं निमिषा सजयन, रोल ने निजी जिंदगी पर डाला गहरा असरनैनीताल में भारी बारिश के बाद नैनीझील के खोले गए गेट, जानिए नौकायन की सुरक्षा स्थिति और प्रशासन के दिशानिर्देशमैके टेस्ट में स्टीव वॉ का रिकॉर्ड तोड़ने की दहलीज पर स्टीव स्मिथ, 50 रन बनाते ही रचा जाएगा नया इतिहासस्विट्जरलैंड के थूसिस में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग, 5 लोग लापता और 8 घायलझारखंड में 22 रद्द परीक्षाओं पर हाईकोर्ट की रोक, JSSC CGL और CDPO अभ्यर्थियों को मिली बड़ी राहत
एक बीघा खेत कब्जामुक्त कराने की आस में 55 किमी बिना चप्पल चले बुजुर्ग उषा देवी और विनोद, 7वीं दफा पहुंचे डीएम के द्वारउत्तर प्रदेश
21 अग॰ 2026, 1:13 pm (2 घंटे पहले)· 2

एक बीघा खेत कब्जामुक्त कराने की आस में 55 किमी बिना चप्पल चले बुजुर्ग उषा देवी और विनोद, 7वीं दफा पहुंचे डीएम के द्वार

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ढखिनिया गांव के बुजुर्ग दंपति उषा देवी और विनोद ने दबंगों द्वारा एक बीघा जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है। किराए के पैसे न होने पर वे न्याय के लिए 7वीं बार 55 किलोमीटर नंगे पैर चलकर डीएम दफ्तर पहुंचे हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में प्रशासनिक लापरवाही और दबंगई की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। धौरहरा तहसील के ढखिनिया गांव के रहने वाले बुजुर्ग दंपति उषा देवी और विनोद अपनी एक बीघा जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। पैसों की किल्लत के कारण यह बुजुर्ग जोड़ा 55 किलोमीटर की दूरी नंगे पैर तय करके करीब सातवीं बार जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा है। भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के सरकारी दावों के बीच इस दंपति को न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

खेत की मेड़ तोड़कर खड़ी फसल पर कब्जा करने का आरोप

पीड़ित बुजुर्ग विनोद के अनुसार उनके पड़ोस में रहने वाले दिलीप कुमार और कमलाकांत ने दबंगई दिखाते हुए उनकी जमीन हड़प ली है। आरोपियों ने दोनों खेतों के बीच स्थित मेड़ को तोड़ दिया और खेत में खड़ी पूरी फसल को जबरन अपने खेत में मिला लिया। अपनी जमीन और फसल गंवाने के बाद बुजुर्ग दंपत्ति ने तहसील स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संसाधनों के अभाव में बस या किसी अन्य वाहन का किराया चुकाने के पैसे न होने की वजह से उन्हें इतनी लंबी दूरी पैदल चलकर ही तय करनी पड़ रही है।

ये भी पढ़ें

तड़के तीन बजे से शुरू होता है नंगे पैर 55 किलोमीटर का सफर

अपने हक की लड़ाई लड़ रही उषा देवी बताती हैं कि पैरों में चप्पल न होने के बावजूद उन्हें सुबह तड़के 3:00 बजे अपने घर से पैदल निकलना पड़ता है। लगातार आठ घंटे तक चलने के बाद सुबह करीब 11:00 बजे वे लखीमपुर स्थित जिलाधिकारी दफ्तर पहुंचते हैं। यह सातवां मौका है जब वे न्याय मांगने के लिए इस तरह पैदल चलकर अधिकारियों के पास पहुंचे हैं। बुजुर्ग महिला का आरोप है कि क्षेत्रीय कानूनगो द्वारा जानबूझकर खेत की पैमाइश नहीं की जा रही है, जिससे दबंगों का कब्जा बरकरार है।

मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत

मामले में ढिलाई का आलम यह है कि पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन वहां से भी अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि अवैध कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, खीरी जिले में ये प्रशासनिक निर्देश सिर्फ फाइलों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि तहसील से लेकर डीएम दफ्तर तक बार-बार चक्कर काटने के बाद भी इस बेबस बुजुर्ग दंपत्ति की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।

सवाल-जवाब

उषा देवी और विनोद किस गांव और तहसील के रहने वाले हैं?
यह बुजुर्ग दंपति उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा तहसील स्थित ढखिनिया गांव के निवासी हैं।
बुजुर्ग दंपति ने पड़ोसियों पर क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने आरोप लगाया है कि पड़ोसी दिलीप कुमार और कमलाकांत ने खेत की मेड़ तोड़कर उनकी एक बीघा जमीन और खड़ी फसल पर जबरन कब्जा कर लिया है।
बुजुर्ग जोड़े को डीएम दफ्तर पहुंचने के लिए कितना पैदल चलना पड़ता है?
किराये के पैसे न होने के कारण वे तड़के 3:00 बजे घर से निकलते हैं और 55 किलोमीटर नंगे पैर चलकर सुबह 11:00 बजे डीएम दफ्तर पहुंचते हैं।
प्रशासनिक स्तर पर क्या लापरवाही सामने आई है?
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत करने और मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराने के बावजूद कानूनगो द्वारा खेत की पैमाइश नहीं की जा रही है।
बुजुर्ग दंपति अब तक कितनी बार डीएम दफ्तर जा चुके हैं?
अपनी जमीन कब्जामुक्त कराने और न्याय पाने की गुहार लेकर वे सातवीं बार 55 किलोमीटर पैदल चलकर डीएम कार्यालय पहुंचे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·11 मिनट पहले

यह घटना लखीमपुर के ज़मीनी प्रशासन और वित्तीय समावेश के दावों की पोल खोलती है। एक बीघा ज़मीन का यह विवाद केवल भू-माफिया का मामला नहीं, बल्कि राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। डिजिटल इंडिया और सीएम पोर्टल जैसी प्रणालियों के बावजूद यदि एक बुजुर्ग जोड़े को न्याय के लिए 55 किलोमीटर नंगे पैर चलना पड़े, तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। ऐसे मामलों में स्थानीय कानूनगो की जवाबदेही तय किए बिना जमीनी स्तर पर आर्थिक सुरक्षा और निवेश का भरोसा पैदा नहीं किया जा सकता।

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 मिनट पहले

रविकेश जी ने बिल्कुल सही रेखांकित किया है कि यह केवल एक ज़मीन का विवाद नहीं, बल्कि ज़मीनी शासन और राजस्व मशीनरी की संवेदनहीनता का जीवंत उदाहरण है। जब क्षेत्रीय स्तर पर कानूनगो और प्रशासनिक अमला शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के बजाय फाइलों को दबाए रखता है, तब शासन की बड़ी नीतियां और पोर्टल सिर्फ दिखावा बनकर रह जाते हैं। यदि इस मामले में तुरंत ज़िम्मेदारी तय नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक विफलता आम जनता का व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह तोड़ देगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह मामला राजस्व अमले और स्थानीय प्रशासन की गंभीर संवेदनहीनता को उजागर करता है। जब तक डीएम स्तर से कानूनगो और लेखपाल की भूमिका की जाँच कर तत्काल पैमाइश नहीं कराई जाती, तब तक एंटी-भूमाफिया अभियानों के दावे कागजी ही साबित होंगे। इस स्तर की प्रशासनिक उदासीनता नागरिकों का न्याय व्यवस्था से विश्वास तोड़ती है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह प्रकरण केवल एक राजस्व विवाद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर प्रमाण है। मुख्यमंत्री पोर्टल जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के बावजूद यदि एक बुजुर्ग जोड़े को सातवीं बार नंगे पैर 55 किलोमीटर चलना पड़े, तो यह स्थानीय राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। यदि कानूनगो स्तर पर पैमाइश में हो रही इस जानबूझकर की गई देरी की तत्काल उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह मामला शासन की एंटी-भूमाफिया नीति की विश्वसनीयता को और अधिक आहत करेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR