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फतेहपुर विकास भवन में युवक ने पेट्रोल छिड़ककर की खुदकुशी की कोशिश, डीपीआरओ दफ्तर पर रिश्वतखोरी का संगीन आरोपउत्तर प्रदेश
15 अक्तू॰ 2026, 8:52 pm (1 दिन पहले)· 1

फतेहपुर विकास भवन में युवक ने पेट्रोल छिड़ककर की खुदकुशी की कोशिश, डीपीआरओ दफ्तर पर रिश्वतखोरी का संगीन आरोप

फतेहपुर के विकास भवन में ग्राम पंचायत की दुकानों में धांधली की शिकायत पर कार्रवाई न होने से खफा व्यक्ति ने पेट्रोल डालकर जान देने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने जिला पंचायती राज अधिकारी पर पांच लाख रुपये रिश्वत लेकर मामले को दबाने का आरोप लगाया है।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में 15 अक्टूबर को उस वक्त अफरातफरी मच गई जब विकास भवन स्थित जिला पंचायती राज अधिकारी कार्यालय परिसर में एक शिकायतकर्ता ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद सतर्क कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे आग लगाने से पहले ही रोक लिया और बड़ा हादसा टल गया। इस सनसनीखेज घटना के बाद शिकायतकर्ता ने खुले तौर पर डीपीआरओ पर पांच लाख रुपये रिश्वत लेकर भ्रष्ट ग्राम प्रधान को बचाने और कार्रवाई दबाने का आरोप जड़ दिया, जबकि डीपीआरओ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

ग्राम सभा की जमीन पर अवैध दुकान निर्माण और बिक्री का विवाद

पूरा मामला फतेहपुर के गाजीपुर ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता अजय प्रताप सिंह उर्फ जब्बार सिंह का कहना है कि ग्राम सभा की कलेक्टर दर्ज जमीन पर ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी यानी सचिव ने मिलीभगत करके अवैध रूप से दुकानों का निर्माण करवाया था। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर तैयार की गई इन दुकानों को सात-सात और दस-दस लाख रुपये में बेचकर भारी वित्तीय अनियमितता की गई।

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आरटीआई के जरिए मांगी गई सूचना में भी यह तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत की इन दुकानों की कोई आधिकारिक या खुली नीलामी नहीं कराई गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि पूर्व में बैठाई गई कई विभागीय जांचों में ग्राम प्रधान को दोषी पाया गया था, लेकिन इसके बावजूद उस पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

जांच, नोटिस और पांच लाख रुपये की रिश्वत का आरोप

शिकायतकर्ता अजय प्रताप सिंह का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने डीपीआरओ दफ्तर में पांच लाख रुपये की घूस देकर कार्रवाई की फाइल को अटका दिया। उनका कहना था कि पिछले तीन वर्षों से जांच और आश्वासन के नाम पर उन्हें लगातार दौड़ाया जा रहा है, और यदि यही सुस्त रवैया रहा तो न्याय मिलने से पहले ही उनकी जान चली जाएगी। इस घटना के बाद वहां पहुंचे अधिवक्ता गुप्ता और अन्य स्थानीय लोगों ने भी पंचायती राज कार्यालय में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर गंभीर सवाल उठाए।

प्रशासनिक पक्ष और डीपीआरओ की सफाई

दूसरी ओर, डीपीआरओ ने रिश्वत लेने के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि दुकानों के निर्माण की शिकायत पर एक जांच समिति गठित की गई थी। इस समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने 25 सितंबर को ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था।

डीपीआरओ के मुताबिक यह नोटिस 7 अक्टूबर को ग्राम प्रधान को आधिकारिक रूप से तामील करा दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायती राज व्यवस्था के नियमों के तहत अंतिम कार्रवाई का अधिकार जिलाधिकारी स्तर पर सुरक्षित है, इसलिए डीपीआरओ स्तर से किसी भी तरह की फाइल रोकने अथवा मिलीभगत करने की बात बिल्कुल गलत है।

सवाल-जवाब

फतेहपुर विकास भवन में 15 अक्टूबर को क्या घटना घटी?
एक शिकायतकर्ता ने डीपीआरओ कार्यालय में कार्रवाई न होने से दुखी होकर खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, जिसे कर्मचारियों ने बचा लिया।
शिकायतकर्ता का नाम क्या है और उनका क्या आरोप है?
शिकायतकर्ता का नाम अजय प्रताप सिंह उर्फ जब्बार सिंह है, जिन्होंने डीपीआरओ पर कार्रवाई रोकने के बदले 5 लाख रुपये घूस लेने का आरोप लगाया है।
मामला किस ब्लॉक और किस तरह के विवाद से संबंधित है?
यह मामला गाजीपुर ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत में कलेक्टर की जमीन पर अवैध दुकानें बनाकर 7 से 10 लाख रुपये में बेचने से जुड़ा है।
दुकानों के संबंध में आरटीआई से क्या खुलासा हुआ था?
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह बात सामने आई कि ग्राम पंचायत द्वारा बनाई गई दुकानों की कोई वैध नीलामी नहीं कराई गई थी।
डीपीआरओ ने रिश्वत के आरोपों पर क्या सफाई दी?
डीपीआरओ ने घूस के आरोपों को गलत बताया और कहा कि जिलाधिकारी ने 25 सितंबर को नोटिस दिया था जो 7 अक्टूबर को प्रधान को दिया गया, और नियमानुसार कार्रवाई डीएम स्तर से होनी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·1 दिन पहले

अदालत और जांच के चक्कर में आम आदमी की जान पर बन आती है, फिर भी भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेजे जाते हैं। क्या डीएम को पांच लाख की रिश्वत के इस गंभीर आरोप पर सिर्फ कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर कोई निष्पक्ष जांच नहीं करानी चाहिए?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

तीन साल तक दौड़ने के बाद जब कोई शख्स पेट्रोल छिड़कने को मजबूर हो जाए, तो समझो सिस्टम पूरी तरह सड़ चुका है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अर्जुन भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछले साल जब मैं अपने इलाके के दफ्तर गया था, तो बाबू ने एक छोटे से काम के लिए महीनों चक्कर कटवाए थे, तब दर्द समझ आया था।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

अजय सिंह को तीन साल तक सिर्फ दौड़ाया गया, न्याय तो दूर की बात है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन भाई, सच कह रहे हो, तीन साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना किसी को भी तोड़ सकता है। पिछले साल जब मैं खुद एक जमीन के मामले में थाने गया था, तो बाबू लोगों का वही रवैया देखकर मेरा भी खून खौल उठा था।

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