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बलिया में अनाथ बच्चों को मिला प्रशासन का संबल, जिलाधिकारी ने दिए हरसंभव मदद के आदेशउत्तर प्रदेश
17 सित॰ 2026, 9:46 am (2 घंटे पहले)· 1

बलिया में अनाथ बच्चों को मिला प्रशासन का संबल, जिलाधिकारी ने दिए हरसंभव मदद के आदेश

माता-पिता के साये से महरूम हुए बलिया के चार भाई-बहनों की सुध जिला प्रशासन ने ली है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बच्चों से मुलाकात कर उन्हें मुफ्त शिक्षा, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ जल्द दिलाने के निर्देश दिए हैं।

बलिया जिले में एक ऐसा घर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां माता-पिता का साया उठ जाने के बाद 19 वर्षीय युवती अपने छोटे भाई-बहनों का इकलौता सहारा बन गई है। विपरीत परिस्थितियों के बीच संघर्ष कर रहे इस परिवार की सुध अब जिला प्रशासन ने ली है, जिससे बच्चों के भविष्य को लेकर उम्मीद की नई किरण जगी है।

माता-पिता के जाने के बाद टूटा दुखों का पहाड़

नगर पंचायत मनियर के वार्ड नंबर 13 की रहने वाली खुशबू के माता-पिता वीरेंद्र गोंड और रंजू देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। इस परिवार में अब चार भाई-बहन बचे हैं, जिनमें 19 वर्षीय खुशबू के अलावा 16 वर्षीय खुशी, 14 वर्षीय आदित्य और 11 वर्षीय सुधानी शामिल हैं। कई साल पहले पिता के निधन के बाद मां ने जैसे-तैसे बच्चों का पालन-पोषण किया था, लेकिन कुछ महीने पहले मां का भी साया उठ गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी सबसे बड़ी बेटी खुशबू के कंधों पर आ गई। घर का चूल्हा जलाने के लिए खुशबू ने करीब दो महीने पहले नगर पंचायत मनियर में आउटसोर्सिंग के जरिए नौकरी शुरू की थी। गरीबी और कर्ज के दलदल में फंसे इस परिवार की स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी।

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अंतिम संस्कार के वक्त का दर्दनाक मंजर

स्थानीय समाजसेवी अमृतेश उर्फ अंटू ने इस परिवार की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मां के इलाज के दौरान परिवार पर भारी कर्ज हो गया था और नौबत यहां तक आ गई थी कि घर के गहने तक गिरवी रखने पड़े थे। स्थिति इतनी लाचार थी कि मां के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं बचे थे, तब आसपास के लोगों ने आपस में सहयोग कर अंतिम संस्कार संपन्न कराया था। परिवार में कोई वयस्क पुरुष सदस्य न होने के कारण चारों भाई-बहनों ने खुद अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया था और 14 वर्षीय भाई ने नम आंखों से मुखाग्नि दी थी, जो कि झकझोर देने वाला पल था।

जिला प्रशासन ने लिया मामले का संज्ञान

जब इस पीड़ित परिवार की दास्तान सामने आई, तो जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का संज्ञान लिया। बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश देते हुए नगर पंचायत मनियर के ईओ के माध्यम से खुशबू और उसके भाई-बहनों को अपने कार्यालय कक्ष में बुलाया। जिलाधिकारी ने खुद इन अनाथ बच्चों से आमने-सामने बात कर उनकी सारी परेशानियां सुनीं और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।

सरकारी योजनाओं और मुफ्त शिक्षा का लाभ

बच्चों की पीड़ा सुनने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इस परिवार को शासन की तमाम कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाए। इसके तहत चारों भाई-बहनों में से स्कूल जाने वाले बच्चों को कक्षा 12 तक पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा परिवार को अंत्योदय राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और रसोई गैस कनेक्शन तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। बच्चों के आने-जाने के लिए दो साइकिलों का प्रबंध करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशासन की इस त्वरित संवेदनशीलता की लोग सराहना कर रहे हैं, जिससे अनाथ बच्चों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद बंध गई है।

सवाल-जवाब

बलिया में किन बच्चों को जिला प्रशासन की मदद मिली है?
नगर पंचायत मनियर के वार्ड नंबर 13 के रहने वाले चार अनाथ भाई-बहनों—खुशबू, खुशी, आदित्य और सुधानी को प्रशासन की मदद मिली है।
इन बच्चों के माता-पिता के साथ क्या हुआ था?
इन बच्चों के पिता वीरेंद्र गोंड का निधन 2016 में हो गया था और लगभग दो-तीन महीने पहले इनकी मां रंजू देवी की भी बीमारी के कारण मृत्यु हो गई।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बच्चों को क्या सहायता देने के निर्देश दिए हैं?
जिलाधिकारी ने बच्चों को कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा, अंत्योदय राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, गैस कनेक्शन, दो साइकिल और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए खुशबू क्या करती है?
परिवार का गुजारा चलाने के लिए खुशबू ने करीब दो महीने पहले नगर पंचायत मनियर में आउटसोर्सिंग के जरिए काम करना शुरू किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता और मीडिया की पैनी नजर के बीच सकारात्मक तालमेल का सटीक उदाहरण है। जब तक ऐसी कहानियां मुख्यधारा में नहीं आतीं, व्यवस्था अक्सर सुस्त रहती है। हालांकि जिला प्रशासन ने त्वरित राहत के आदेश दिए हैं, लेकिन असली चुनौती इन वादों के धरातल पर क्रियान्वयन की होगी। सामाजिक न्याय और बाल कल्याण से जुड़ी ऐसी योजनाओं की निगरानी यह तय करेगी कि इन अनाथ बच्चों का भविष्य वाकई सुरक्षित हो पाता है या नहीं।

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

यह घटना दिखाती है कि जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र और जिला मुख्यालय के बीच त्वरित संवाद कितना जरूरी है। बलिया प्रशासन द्वारा राशन कार्ड और मुफ्त शिक्षा जैसे निर्देश स्वागत योग्य हैं, लेकिन प्रशासनिक सुधारों की असल परीक्षा इस बात पर होगी कि मनियर नगर पंचायत में इन बच्चों के लिए आउटसोर्सिंग नौकरी की स्थिरता और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है, ताकि उन्हें भविष्य में आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

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