बलिया जिले में एक ऐसा घर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां माता-पिता का साया उठ जाने के बाद 19 वर्षीय युवती अपने छोटे भाई-बहनों का इकलौता सहारा बन गई है। विपरीत परिस्थितियों के बीच संघर्ष कर रहे इस परिवार की सुध अब जिला प्रशासन ने ली है, जिससे बच्चों के भविष्य को लेकर उम्मीद की नई किरण जगी है।
माता-पिता के जाने के बाद टूटा दुखों का पहाड़
नगर पंचायत मनियर के वार्ड नंबर 13 की रहने वाली खुशबू के माता-पिता वीरेंद्र गोंड और रंजू देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। इस परिवार में अब चार भाई-बहन बचे हैं, जिनमें 19 वर्षीय खुशबू के अलावा 16 वर्षीय खुशी, 14 वर्षीय आदित्य और 11 वर्षीय सुधानी शामिल हैं। कई साल पहले पिता के निधन के बाद मां ने जैसे-तैसे बच्चों का पालन-पोषण किया था, लेकिन कुछ महीने पहले मां का भी साया उठ गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी सबसे बड़ी बेटी खुशबू के कंधों पर आ गई। घर का चूल्हा जलाने के लिए खुशबू ने करीब दो महीने पहले नगर पंचायत मनियर में आउटसोर्सिंग के जरिए नौकरी शुरू की थी। गरीबी और कर्ज के दलदल में फंसे इस परिवार की स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी।
अंतिम संस्कार के वक्त का दर्दनाक मंजर
स्थानीय समाजसेवी अमृतेश उर्फ अंटू ने इस परिवार की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मां के इलाज के दौरान परिवार पर भारी कर्ज हो गया था और नौबत यहां तक आ गई थी कि घर के गहने तक गिरवी रखने पड़े थे। स्थिति इतनी लाचार थी कि मां के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं बचे थे, तब आसपास के लोगों ने आपस में सहयोग कर अंतिम संस्कार संपन्न कराया था। परिवार में कोई वयस्क पुरुष सदस्य न होने के कारण चारों भाई-बहनों ने खुद अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया था और 14 वर्षीय भाई ने नम आंखों से मुखाग्नि दी थी, जो कि झकझोर देने वाला पल था।
जिला प्रशासन ने लिया मामले का संज्ञान
जब इस पीड़ित परिवार की दास्तान सामने आई, तो जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का संज्ञान लिया। बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश देते हुए नगर पंचायत मनियर के ईओ के माध्यम से खुशबू और उसके भाई-बहनों को अपने कार्यालय कक्ष में बुलाया। जिलाधिकारी ने खुद इन अनाथ बच्चों से आमने-सामने बात कर उनकी सारी परेशानियां सुनीं और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
सरकारी योजनाओं और मुफ्त शिक्षा का लाभ
बच्चों की पीड़ा सुनने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इस परिवार को शासन की तमाम कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाए। इसके तहत चारों भाई-बहनों में से स्कूल जाने वाले बच्चों को कक्षा 12 तक पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा परिवार को अंत्योदय राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और रसोई गैस कनेक्शन तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। बच्चों के आने-जाने के लिए दो साइकिलों का प्रबंध करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशासन की इस त्वरित संवेदनशीलता की लोग सराहना कर रहे हैं, जिससे अनाथ बच्चों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद बंध गई है।





















