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गाजियाबाद में DMRC का कमाल: बिना ट्रैफिक रोके दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर रखा 58 मीटर लंबा स्टील स्पैनउत्तर प्रदेश
23 जुल॰ 2026, 12:42 pm (22 घंटे पहले)· 0

गाजियाबाद में DMRC का कमाल: बिना ट्रैफिक रोके दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर रखा 58 मीटर लंबा स्टील स्पैन

दिल्ली मेट्रो ने गाजियाबाद में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए चलती सड़क के ऊपर ब्लू लाइन का विशाल स्पैन स्थापित किया है, जिससे भविष्य में ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने गाजियाबाद में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) और नेशनल हाईवे-9 (NH-9) के ठीक ऊपर 58.216 मीटर लंबा एक विशाल स्टील मेट्रो स्पैन सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इस पूरे निर्माण कार्य की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि नीचे सड़क पर दौड़ते वाहनों को एक पल के लिए भी पूरी तरह नहीं रोका गया। एक तरफ हाईवे पर यातायात सुचारू रूप से चलता रहा, और ठीक उसी समय ऊपर हवा में इस भारी-भरकम ढांचे को सुरक्षित रूप से अपनी जगह पर फिक्स करने का काम भी जारी रहा।

ब्लू लाइन के विस्तार में अहम कदम

यह नया और विशाल स्पैन नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी मेट्रो स्टेशन के आगे बन रही उस खास रिवर्सल फैसिलिटी (reversal facility) का एक बेहद अहम हिस्सा है, जो दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन का विस्तार कर रही है। इस ढांचे के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, ब्लू लाइन की मेट्रो ट्रेनें अपना सफर खत्म करने पर बहुत आसानी से और कम समय में अपनी दिशा बदल सकेंगी। इससे ट्रेनों के फेरे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत कुल दो बड़े स्टील स्पैन का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से पहला स्पैन अब सफलतापूर्वक अपनी जगह पर रखा जा चुका है, जबकि 73 मीटर लंबा दूसरा और इससे भी बड़ा स्पैन इसी साल के आखिर तक बनकर तैयार होने और स्थापित किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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48 घंटे तक चला लगातार काम

DMRC के इंजीनियरों के अनुसार, सड़क के ऊपर से गुजरने वाले इस जटिल काम की योजना और तकनीकी तैयारी पिछले कई महीनों से बहुत बारीकी से चल रही थी। स्पैन को उठाकर उसकी सही जगह पर रखने का मुख्य काम 20 जुलाई की दोपहर को शुरू किया गया था और यह बिना रुके 22 जुलाई की सुबह तक, यानी लगातार 48 घंटे तक चलता रहा। इस दौरान विशेष प्रकार की भारी मशीनों और विशाल क्रेनों का उपयोग करके इस भारी-भरकम स्टील स्पैन को उसकी निर्धारित जगह तक सावधानी से लाया गया। इसके बाद इसे जमीन से लगभग 14 मीटर की ऊंचाई पर ले जाकर बेहद सुरक्षित तरीके से पिलर्स पर फिट कर दिया गया।

खतरनाक बिजली लाइनों और ट्रैफिक के बीच चुनौती

तकनीकी नजरिए से अगर देखा जाए, तो यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा काम था। इस विशालकाय मेट्रो स्पैन को एक तरफ गाड़ियों की तेज रफ्तार वाले अत्यंत व्यस्त दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और NH-9 के ऊपर से ले जाना था, तो वहीं दूसरी तरफ इसे ऊपर झूलती हाईटेंशन बिजली की खतरनाक लाइनों के ठीक नीचे से बहुत सावधानी के साथ निकालना था। थोड़ी सी भी चूक एक बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। DMRC का कहना है कि उनके इतिहास में यह पहली बार है जब किसी चौड़े और व्यस्त एक्सप्रेसवे के ऊपर बिना ट्रैफिक को पूरी तरह रोके इस तरह के मेट्रो वायडक्ट (viaduct) का निर्माण इतने सुरक्षित ढंग से पूरा किया गया है।

जाम से लोगों को हुई थोड़ी परेशानी

हालांकि निर्माण कार्य के दौरान एक्सप्रेसवे और हाईवे को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया था, लेकिन कुछ जगहों पर जरूरी खुदाई होने और भारी मशीनों की मौजूदगी के कारण लोगों को सड़क पर ट्रैफिक जाम का सामना जरूर करना पड़ा। उस रास्ते से गुजरने वाले स्थानीय वाहन चालकों का कहना था कि रास्ता भले ही खुला रहा, लेकिन लेन कम होने की वजह से गाड़ियों की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी, जिससे उन्हें आने-जाने में थोड़ी परेशानी और देरी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, DMRC ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के दौरान होने वाली यह दिक्कत अस्थायी है और इस अहम प्रोजेक्ट के पूरा होने से आने वाले समय में गाजियाबाद और नोएडा के बीच मेट्रो का संचालन कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।

सवाल-जवाब

गाजियाबाद में दिल्ली मेट्रो ने क्या उपलब्धि हासिल की है?
DMRC ने बिना ट्रैफिक रोके दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और NH-9 के ऊपर 58.216 मीटर लंबा स्टील मेट्रो स्पैन सफलतापूर्वक स्थापित किया है।
यह स्पैन किस मेट्रो लाइन का हिस्सा है?
यह नया स्पैन ब्लू लाइन पर नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी मेट्रो स्टेशन के आगे बन रही रिवर्सल फैसिलिटी का अहम हिस्सा है।
इस निर्माण कार्य में कितना समय लगा?
इस भारी स्पैन को उसकी जगह पर रखने का काम 20 जुलाई की दोपहर से 22 जुलाई की सुबह तक लगातार 48 घंटे तक चला।
इस काम में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती क्या थी?
नीचे तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे और ऊपर हाईटेंशन बिजली की लाइनों के बीच से 14 मीटर की ऊंचाई पर इस भारी स्पैन को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी।
प्रोजेक्ट का दूसरा स्पैन कब तक तैयार होगा?
इस प्रोजेक्ट का 73 मीटर लंबा दूसरा विशाल स्पैन इसी साल के अंत तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
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