उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली की गंभीर लापरवाही सामने आई है। भोजपुर थाना परिसर में हिरासत में रखा गया एक शातिर आरोपी पुलिसकर्मी के सोते रहने का फायदा उठाकर बड़ी आसानी से चंपत हो गया। हापुड़ के धौलाना क्षेत्र से चोरी के मामलों में पूछताछ के लिए लाए गए इस आरोपी को जब थाने से बाहर भागते देखा गया, तो बाहरी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने पीछा भी किया, लेकिन वह पास के गन्ने के खेत में छिपने में सफल रहा। इस घटना ने न केवल स्थानीय थाना पुलिस की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जिले के उच्च अधिकारियों में भी हड़कंप मचा दिया है।
थाने के भीतर से गन्ने के खेतों तक भागने का पूरा घटनाक्रम
बुधवार दोपहर लगभग तीन बजे भोजपुर थाने के भीतर एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। चोरी के कई आपराधिक मामलों में संदिग्ध आरिफ उर्फ बल्लू उर्फ कलवा उर्फ हुक्का थाने के अंदर कस्टडी में मौजूद था। उसकी निगरानी का जिम्मा 2025 बैच के एक युवा आरक्षी को सौंपा गया था। दोपहर के समय ड्यूटी पर तैनात यह आरक्षी कुर्सी पर बैठा हुआ था और अचानक उसकी आंख लग गई। आरोपी आरिफ पिछले कुछ समय से पुलिसकर्मी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए था। जैसे ही उसे पुलिसकर्मी के सोने का यकीन हुआ, उसने बिना कोई आहट किए थाने की इमारत से बाहर कदम बढ़ा दिए।
थाने के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर तैनात एक होमगार्ड ने संदिग्ध स्थिति में बाहर निकलते हुए आरोपी को देख लिया। होमगार्ड को तुरंत अहसास हुआ कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति भागने की कोशिश कर रहा है। उसने तुरंत आरोपी का पीछा करना शुरू किया और उसे रुकने की चेतावनी दी। हालांकि, होमगार्ड को अपनी ओर आता देख आरोपी ने तेजी से दौड़ लगा दी। थाने के ठीक पास में गन्ने का बड़ा खेत मौजूद था। आरोपी तेजी से भागते हुए उस गन्ने के घने खेत में घुस गया और कुछ ही पलों में ओझल हो गया। इसके बाद थाने के अन्य पुलिसकर्मियों को सतर्क किया गया और पूरे इलाके में तलाश शुरू की गई।
सर्विलांस और सीसीटीवी से हुई थी आरोपी की पहचान
गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र में पिछले कुछ समय के दौरान आवासीय मकानों में चोरी की कई वारदातें दर्ज की गई थीं। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद पुलिस की टीमों को जांच में लगाया गया था। मामले का खुलासा करने के लिए सर्विलांस सेल, बीटीएस डेटा और विभिन्न स्थानों के सीसीटीवी फुटेज का गहन अध्ययन किया गया। इस तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को हापुड़ जिले के धौलाना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव के निवासी आरिफ और उसके आपराधिक गिरोह के संलिप्त होने के ठोस सुराग मिले थे।
इन जानकारियों के आधार पर बुधवार को भोजपुर पुलिस की एक विशेष टीम हापुड़ के धौलाना क्षेत्र में दबिश देने पहुंची थी। पुलिस टीम ने वहां से आरिफ को हिरासत में लिया और गहन पूछताछ के उद्देश्य से भोजपुर थाने लेकर आई। पुलिस अधिकारियों को पूरी उम्मीद थी कि आरिफ से कड़ाई से पूछताछ किए जाने पर भोजपुर क्षेत्र में हुई चोरी की कम से कम चार बड़ी वारदातों का खुलासा हो जाएगा। आरोपी से उसके गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी किए गए सामान की बरामदगी के संबंध में भी अहम जानकारियां मिलने की संभावना थी।
अभिलेखों में दर्ज न करना और सूचना छिपाने की लापरवाही
इस पूरे प्रकरण में पुलिस अधिकारियों की जांच के दौरान भोजपुर थाना पुलिस की कई स्तरों पर गंभीर प्रशासनिक गलतियां पाई गई हैं। हिरासत में लाए जाने के बावजूद आरोपी आरिफ को थाने के आधिकारिक जनरल डायरी या अभिलेखों में समय पर दर्ज नहीं किया गया था। कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार किसी भी संदिग्ध को थाने लाने पर उसकी प्रविष्टि तुरंत रिकॉर्ड में दर्ज की जानी अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में कागजी कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई थी।
इसके अलावा, आरोपी के फरार होने के तुरंत बाद स्थानीय थाना पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी देने के बजाय मामले को दबाने और खुद ही आरोपी को ढूंढने की कोशिश की। कई घंटों तक पुलिसकर्मी गन्ने के खेतों और आसपास के जंगलों में कांबिंग ऑपरेशन चलाते रहे। जब लंबे समय की तलाश के बाद भी आरिफ का कोई सुराग नहीं मिला और मामला हाथ से निकलता दिख तब जाकर इस पूरी घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। सूचना में हुई इस देरी के कारण आरोपी को इलाके से दूर भागने का पर्याप्त समय मिल गया।
थाना प्रभारी लाइन हाजिर, तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
मामले की गंभीरता और पुलिसकर्मियों की लापरवाही उजागर होने के बाद गाजियाबाद के डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। डीसीपी ग्रामीण के आदेश पर भोजपुर थाना प्रभारी निरीक्षक गिरिराज किशोर सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरी घटना में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत भूमिका और लापरवाही की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है।
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, आरोपी आरिफ एक बेहद शातिर और पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर के विभिन्न थानों में चोरी तथा अन्य आपराधिक धाराओं के तहत कुल सात मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया ड्यूटी में लापरवाही बरतने और घटना की सही जानकारी समय पर उच्चाधिकारियों तक न पहुंचाने के कारण थाना प्रभारी पर कार्रवाई की गई है। तीन सदस्यीय टीम की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद सो रहे आरक्षी सहित अन्य दोषी कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



















