मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में धार्मिक जुलूस के दौरान महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए पारंपरिक करतबों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। ईद मिलाद उल नबी के पावन अवसर पर निकाले गए जुलूस में बुर्का पहने कुछ युवतियों ने लकड़ी की तलवारें लेकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भोपाल के शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने कड़ा ऐतराज जताया और इसे धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत करार दिया। मुफ्ती के इस रुख के बाद स्थानीय कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और उनके समर्थक उग्र हो गए हैं तथा धर्मगुरु के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें समाज का विरोधी घोषित कर दिया है।
ईद मिलाद उल नबी जुलूस और तलवारबाजी प्रदर्शन पर उठा विवाद
भोपाल शहर में आयोजित ईद मिलाद उल नबी के सार्वजनिक जुलूस का नेतृत्व कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद कर रहे थे। इस कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और उत्साह के माहौल के बीच बुर्का पहने कई युवतियों और महिलाओं ने लकड़ी की तलवारों का उपयोग करते हुए साहसिक करतब दिखाए। घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल गया, जिसके बाद धार्मिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गईं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "औरतें तलवार लेकर सड़क पर नाचें, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।" मुफ्ती ने तर्क दिया कि सरेराह इस प्रकार महिलाओं द्वारा शस्त्र प्रदर्शन करना इस्लाम की तालीम और मर्यादा के खिलाफ है, इसलिए वे इस मामले में चुप नहीं रह सकते।
विधायक समर्थकों का फूटा गुस्सा, मुफ्ती को पद से हटाने की मांग
शहर मुफ्ती के इस सख्त बयान से विधायक आरिफ मसूद और उनके सहयोगी सख्त नाराज हो गए। विधायक और उनके समर्थकों ने धर्मगुरु के बयान को महिलाओं और बेटियों की प्रतिभा का अपमान माना। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने मुफ्ती अबुल कलाम के रवैये की तीव्र निंदा की और उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग उठाई। शमशुल हसन ने कहा कि समाज की बेटियों का अनादर करने वाले व्यक्ति को जेल भेजा जाना चाहिए। जुलूस का आयोजन करने वाले नेताओं का कहना है कि अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन करना किसी भी तरह से मजहब के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक है।
राज्य महिला आयोग पहुंचा मामला, कारण बताओ नोटिस की तैयारी
विवाद बढ़ने के साथ ही जुलूस में शामिल हुई लड़कियों के परिजन भी मैदान में उतर आए हैं। प्रतिभागी युवतियों के परिवार की महिलाओं ने मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग के दफ्तर पहुंचकर शहर मुफ्ती अबुल कलाम के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों का कहना है कि जब बेटियां अपने हुनर और कला का प्रदर्शन करने के लिए बाहर निकलती हैं, तो धार्मिक गुरुओं को आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि बेटियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले मुफ्ती पर सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत मिलने के बाद मध्य प्रदेश महिला आयोग ने मामले पर संज्ञान लिया है और वह शहर मुफ्ती अबुल कलाम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगने जा रहा है।
केरल में ग्रैंड मुफ्ती के बयान से गरमाई राजनीति
महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को लेकर यह वैचारिक जंग केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही बहस देखने को मिली है। केरल के प्रमुख सुन्नी नेता और भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुस्लियार ने भी महिलाओं की भूमिका पर सख्त रुख अपनाया है। समस्ता सुन्नी संगठन के कंथापुरम गुट के महासचिव पद पर काबिज मुस्लियार ने एक आधिकारिक परिपत्र जारी कर कहा है कि मुस्लिम महिलाओं को अपने घरों की सीमाओं में ही रहना चाहिए। उनका मानना है कि सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की मौजूदगी से बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने मजहबी सम्मेलनों और मंचों पर महिलाओं को आमंत्रित करने तथा पुरुषों के बीच उनकी उपस्थिति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की वकालत की।
ग्रैंड मुफ्ती के इस विवादास्पद परिपत्र पर केरल की राजनीति में भारी बवाल खड़ा हो गया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस ने इस सोच को महिलाओं को सदियों पीछे धकेलने वाला करार देते हुए कड़ी आलोचना की। हालांकि, केरल के विपक्षी मोर्चे में शामिल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने इस बयान का बचाव किया। संगठन ने कहा कि यह एक सम्मानित धार्मिक विद्वान का व्यक्तिगत और मजहबी दृष्टिकोण है, जिस पर राजनीतिक विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।



















