राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करीब स्थित ग्रेटर नोएडा के डेल्टा मेट्रो स्टेशन के पास की सर्विस रोड की हालत इस समय बेहद दयनीय हो चुकी है। यहाँ के बदतर हालात ने स्थानीय निवासियों और यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भारी मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। सड़क पर बने गहरे गड्ढे, बिना ढक्कन के बहते खुले नाले और जगह-जगह लगा गंदा पानी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहा है। वहाँ रहने वाले नागरिकों का आरोप है कि इस विकट समस्या को लेकर उन्होंने अनेक बार प्रशासनिक स्तर पर शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन संबंधित अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है और अब तक धरातल पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
यात्रियों और स्थानीय लोगों की बढ़ी मुसीबतें
इस क्षेत्र के निवासी सुभाष भाटी ने यहाँ की बदहाली का जिक्र करते हुए बताया कि डेल्टा मेट्रो स्टेशन के दोनों तरफ बनी सर्विस रोड लंबे समय से टूटी-फूटी हालत में पड़ी है। इस क्षतिग्रस्त सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों के चलते वाहन चालकों के लिए गाड़ी चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि यहाँ सड़क किनारे नाले पूरी तरह खुले पड़े हैं, जो किसी भी समय एक बड़ी त्रासदी को आमंत्रण दे सकते हैं। यदि कोई छोटा बच्चा, बुजुर्ग नागरिक या फिर कोई बेसहारा पशु इनमें अनजाने में गिर जाता है, तो उसकी जान पर बन सकती है।
सुभाष भाटी ने आगे बताया कि जब भी इस इलाके में बारिश होती है, तब स्थिति और भी भयावह हो जाती है क्योंकि सड़क पर करीब डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा हो जाता है। जलभराव होने के कारण सड़क के जानलेवा गड्ढे दिखाई देना बंद हो जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका कई गुना अधिक बढ़ जाती है। निवासियों का आरोप है कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ACEO लक्ष्मी वीएस को इस समस्या से व्यक्तिगत रूप से और लिखित में कई बार अवगत कराया है। इसके बावजूद, प्राधिकरण प्रशासन की ओर से अब तक इस गंभीर मुद्दे को हल करने के लिए कोई ठोस योजना या कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिससे स्थानीय जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है।
रिहायशी इलाकों के बीच बुनियादी सुविधाओं का अभाव
पेशावर चार्टर्ड अकाउंटेंट अनिल अग्रवाल, जिनका कार्यालय पास के ही गैलेरिया मॉल में स्थित है, ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ साल पहले उन्होंने इसी क्षेत्र में रहने के लिए एक विला खरीदा था और पिछले आठ महीनों से वे सपरिवार यहाँ रह रहे हैं। लेकिन इस पूरी अवधि में उन्हें सड़क की स्थिति में रत्ती भर भी सुधार देखने को नहीं मिला है। अनिल अग्रवाल के अनुसार, पूरी सड़क गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिसके कारण यहाँ आने-जाने वाले लोगों के वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। कई बार चौपहिया वाहनों का निचला हिस्सा सड़क के उबड़-खाबड़ हिस्सों से टकराकर टूट जाता है, जबकि दोपहिया वाहन सवार संतुलन खोकर आए दिन गिरते रहते हैं और चोटिल होते हैं।
उल्लेखनीय है कि डेल्टा मेट्रो स्टेशन के आस-पास हेमिस्फीयर और सन ट्वाइलाइट जैसी कई नामचीन और बड़ी आवासीय परियोजनाएं विकसित की गई हैं। इनके अलावा, इस पूरे इलाके में कई बड़े शॉपिंग मॉल, व्यावसायिक स्टोर और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी मौजूद हैं, जहाँ रोजाना हजारों की संख्या में ग्राहकों और स्थानीय लोगों का आवागमन होता है। इतने व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्र में सड़कों का ऐसा खस्ताहाल होना सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही का प्रमाण है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि टूटी सड़कें न केवल उनके दैनिक आवागमन को बाधित कर रही हैं, बल्कि बारिश के मौसम में जमा होने वाला दूषित पानी और चारों तरफ फैली गंदगी मच्छरों और गंभीर बीमारियों को न्योता दे रही है।
हाईटेक सिटी के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
इलाके के एक अन्य निवासी प्रोफेसर आरबी सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को घेरा। उनका कहना है कि डेल्टा मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे और उसके दोनों तरफ की सर्विस लेन की हालत अत्यंत चिंताजनक है। सड़क पर बने गहरे और जानलेवा गड्ढों की वजह से यहाँ से गुजरने वाले वाहन चालकों के मन में हमेशा किसी अप्रिय घटना या दुर्घटना का डर सताता रहता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी फाइलों और विज्ञापनों में इस शहर को अत्यधिक आधुनिक और हाईटेक बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल की सच्चाई इन दावों से बिल्कुल विपरीत है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह खस्ताहाल इलाका ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, फिर भी अधिकारियों को इसकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है।
प्रोफेसर सिंह के अनुसार, एक तरफ तो शहर में आलीशान मॉल, बहुमंजिला आवासीय सोसाइटी और अत्याधुनिक जीवन शैली की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों पर विकास की बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने में व्यस्त हैं, जबकि आम जनता की रोज़मर्रा की व्यावहारिक समस्याओं और सड़क-नाली जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
लगातार उपेक्षा से गहराया आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट किया कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि वे लंबे समय से इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। लगभग 20 दिन पहले भी उन्होंने सड़कों की बदहाली और खुले नालों के खतरे को लेकर पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज कराया था, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और स्थिति जस की तस बनी हुई है। निवासियों को डर है कि यदि समय रहते इन सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई और खतरनाक खुले नालों को कंक्रीट के ढक्कनों से सुरक्षित नहीं किया गया, तो यहाँ कोई भी जानलेवा हादसा घटित हो सकता है। थक-हारकर अब क्षेत्र के लोगों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से पुरजोर मांग की है कि डेल्टा मेट्रो स्टेशन के पास की पूरी सर्विस रोड का तत्काल पुनर्निर्माण किया जाए, सभी खुले नालों को पूरी तरह से बंद किया जाए और यहाँ जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए एक स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए।



















