बिजनौर में पुलिस प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर तेज आवाज में बजने वाले लाउडस्पीكر को लेकर अब कड़ा रुख अपना लिया है। हाल ही में जिले की कमान संभालने वाले नए पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अपने कार्यभार संभालते ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शहर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और अदालत के साथ-साथ शासन के तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करवाने के लिए पुलिस अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
अचानक निरीक्षण के दौरान सामने आया मामला
यह पूरी कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई जिला जेल का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। जेल परिसर का जायजा लेने के दौरान आसपास के इलाके में स्थित एक मस्जिद से तेज आवाज में अजान की आवाज गूंजने लगी। इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बिना कोई समय गंवाए संबंधित मस्जिद की मीनार पर चढ़कर लाउडस्पीकर को नीचे उतरवा दिया। इस त्वरित कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करना अनिवार्य
प्रशासन की तरफ से साफ कर दिया गया है कि यह अभियान किसी एक धर्म विशेष को ध्यान में रखकर नहीं चलाया जा रहा है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य पूरे जिले में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का एक समान पालन सुनिश्चित कराना है। चाहे मंदिरों में तेज आवाज में होने वाले भजन-कीर्तन हों या फिर मस्जिदों से गूंजने वाली अजान और नमाज की आवाज, सभी को तय डेसिबल सीमाओं के दायरे में ही रहना होगा। पुलिस का कहना है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
निर्धारित डेसिबल सीमा का पालन जरूरी
कानून के मुताबिक रिहायशी इलाकों में ध्वनि की अधिकतम सीमा दिन के समय 55 डेसिबल और रात के वक्त 45 डेसिबल तय की गई है। वहीं कमर्शियल यानी व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन में 65 डेसिबल और रात में 55 डेसिबल तक की आवाज की अनुमति दी गई है। पुलिस अब इन्हीं तय मानकों को धरातल पर उतारने के लिए लगातार निगरानी कर रही है।
हाल ही में हुआ था संभल से ट्रांसफर
कृष्ण कुमार बिश्नोई को हाल ही में संभल से ट्रांसफर करके बिजनौर का एसपी बनाया गया है। पदभार संभालते ही उनकी यह पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई यह स्पष्ट संदेश देती है कि जिला प्रशासन कानून व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।


















