गुजरात पुलिस की एक विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में कार्रवाई करते हुए करीब चार दशक से फरार चल रहे एक कुख्यात अपराधी को धर दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी हबीब अहमद अब्दुल साल 1981 में गुजरात के राजकोट से मुंबई जा रही एक लग्जरी बस में हुई सशस्त्र डकैती का मुख्य सूत्रधार था। वारदात को अंजाम देने के बाद से ही वह अपना नाम और पहचान छिपाकर अलग-अलग जगहों पर छिपता फिर रहा था। हाल के समय में वह कासगंज के तातारपुर कांशीराम आवासीय कॉलोनी इलाके में कबाड़ का धंधा चलाकर पुलिस की नजरों से बच रहा था। स्थानीय पुलिस की मदद से कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गुजरात पुलिस उसे अपने साथ ले गई है।
राजकोट-मुंबई हाईवे पर हथियारों के बल पर 32 हजार की लूट
इस पूरे मामले की शुरुआत 27 जनवरी 1981 को हुई थी, जब राजकोट से मुंबई के लिए रवाना हुई एक प्राइवेट लग्जरी बस को रास्ते में डकैतों के एक गिरोह ने जबरन रुकवा लिया। डकैतों के पास घातक हथियार मौजूद थे। उन्होंने बस में सवार यात्रियों और कंडक्टर को हथियारों का भय दिखाकर आतंकित कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने सभी से करीब 32 हजार रुपये नकद लूट लिए। उस दौर में 32 हजार रुपये की रकम एक बहुत बड़ी राशि मानी जाती थी। वारदात के बाद हबीब अहमद अब्दुल और उसके साथी मौके से चंपत हो गए। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की, लेकिन मुख्य आरोपी हबीब का कोई सुराग नहीं मिल सका।
डिजिटल साक्ष्यों के अभाव में 45 साल तक चकमा देता रहा भगोड़ा
हबीब अहमद अब्दुल ने खुद को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए पूरी तरह से भूमिगत जीवन अपनाया। उसके पास न तो कोई आधार कार्ड था, न ही कोई नया पहचान पत्र और न ही वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी या डिजिटल फुटप्रिंट न होने के कारण पुलिस सालों तक उसके ठिकाने का पता नहीं लगा सकी। इस दौरान वह उत्तर प्रदेश के कासगंज शहर में आ बसा और तातारपुर कांशीराम आवासीय कॉलोनी में एक आम कबाड़ी बनकर रहने लगा। उसके आसपास के लोगों को भी कभी उसकी पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि का अंदाजा नहीं हुआ।
पुराने फाइलों के पुनरीक्षण और खुफिया तंत्र से मिली सफलता
लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े इस पुराने मामले को सुलझाने के लिए गुजरात पुलिस ने पुराने अभिलेखों और केस डायरी को नए सिरे से खंगालना शुरू किया। पुलिस की एक समर्पित टीम ने गोपनीय सूचनाओं और खुफिया तंत्र के नेटवर्क को सक्रिय किया। कागजी दस्तावेजों की गहन जांच और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस को हबीब के कासगंज में छिपे होने की ठोस जानकारी मिली। इसके बाद गुजरात पुलिस की टीम ने कासगंज सदर कोतवाली क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में शामिल एक अन्य सह-आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है, जिसके बाद हबीब ही इस केस की आखिरी कड़ी बचा हुआ था।
उत्तर प्रदेश में राजमार्ग डकैती के हालिया मामले का भी हुआ समाधान
पुराने मामलों में पुलिस की इस बड़ी कामयाबी के बीच उत्तर प्रदेश में भी राजमार्ग पर हुई एक अन्य बड़ी डकैती का पर्दाफाश हुआ है। ग्रेटर नोएडा के थाना बीटा-2 क्षेत्र में 4-5 अगस्त की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर चांदी के एक बड़े व्यापारी को निशाना बनाया गया था। कार सवार हथियारबंद अपराधियों ने व्यापारी और उनके साथी को घेरकर उनसे 1.38 करोड़ रुपये मूल्य की सोने की अंगूठियां, चांदी के बिस्किट और अन्य कीमती सामान लूट लिए थे। इस सनसनीखेज वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस उपायुक्त के निर्देशन में पांच विशेष टीमों का गठन किया गया था। जांच टीमों ने लगभग 2,000 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से 5 लुटेरों को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत लूटा गया माल बरामद कर लिया।



















