उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजमार्गों पर अपनी गाड़ियों को रोककर नींद पूरी करने वाले ट्रक चालक इन दिनों एक खतरनाक अपराधी गिरोह के निशाने पर थे। रात के सन्नाटे में ड्राइवरों के सोते ही उनके कीमती मोबाइल फोन और अन्य सामानों पर हाथ साफ करने वाले एक सक्रिय चोर गिरोह का कानपुर की महाराजपुर थाना पुलिस ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने त्वरित और सतर्क कार्रवाई को अंजाम देते हुए इस गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को धर दबोचा है। तलाशी के दौरान इन बदमाशों के पास से चोरी किए गए कुल 12 अत्याधुनिक स्मार्टफोन, 315 बोर का एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ये आपराधिक वारदातों के दौरान खौफ पैदा करने के लिए करते थे।
बदमाशों का पुराना आपराधिक और काला इतिहास
मंगलवार को आयोजित एक औपचारिक प्रेस वार्ता के दौरान एडीसीपी शिवा सिंह ने इस पूरी सनसनीखेज गिरफ्तारी और गिरोह के तौर-तरीकों का विस्तृत खुलासा किया। पुलिस के आधिकारिक बयानों के अनुसार पकड़े गए इन सभी चारों आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इनमें से कई बदमाश पहले से ही कई संगीन मामलों में संलिप्त रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर इन अभियुक्तों के खिलाफ लूटपाट, गैंगस्टर एक्ट, हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप और आर्म्स एक्ट के तहत कई मुकदमे पहले से ही विभिन्न थानों में दर्ज बताए जा रहे हैं, जो इनकी शातिर कार्यप्रणाली को उजागर करते हैं।
मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस का जाल
इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत एक गुप्त और पुख्ता जानकारी से हुई। पुलिस विवरण के मुताबिक मंगलवार को उपनिरीक्षक पवन शर्मा अपनी पुलिस टीम के साथ कुलगांव अंडरपास के पास संदिग्ध वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की सघन चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को एक मुखबिर से अत्यंत गोपनीय और महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई कि हाईवे पर ट्रक ड्राइवरों को लगातार निशाना बनाकर उनके मोबाइल फोन उड़ाने वाले चार संदिग्ध युवक रामादेवी की तरफ से महाराजपुर की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुखबिर ने यह भी बताया कि ये सभी आरोपी अपने पास मौजूद चोरी के इन मोबाइलों को किसी ग्राहक को बेचने की फिराक में घूम रहे हैं ताकि अवैध रूप से नकदी हासिल की जा सके।
पुलिस को देख भागने लगे, पर घेराबंदी में धरे गए
जैसे ही महाराजपुर पुलिस टीम को यह पुख्ता सूचना मिली, उन्होंने बिना वक्त गंवाए पूरे इलाके में अपनी बैरिकेडिंग और घेराबंदी मजबूत कर दी। पुलिस बल सर्विस रोड से गुजरते हुए केआईटी कॉलेज के ठीक सामने जा पहुंचा। ठीक उसी वक्त वहां से गुजर रहे संदिग्ध युवकों की नजर जब पुलिसकर्मियों पर पड़ी तो वे हड़बड़ा कर भागने की कोशिश करने लगे। हालांकि मौके पर पूरी तरह सतर्क और तैयार खड़ी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चारों आरोपियों को चारों तरफ से घेरकर आखिरकार दबोच ही लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने कबूला जुर्म और हुई पहचान
हिरासत में लिए जाने के बाद जब पुलिस ने इनसे कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने हाईवे के किनारे आराम कर रहे ट्रक चालकों को अपना आसान शिकार बनाने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए सभी चारों आरोपियों की आधिकारिक पहचान उजागर की है। इनमें अभिषेक सैनी उर्फ कद्दू जो नर्वल, कानपुर का रहने वाला है, आदित्य यादव उर्फ रफ्तार जो चकेरी का निवासी है, राघवेंद्र यादव उर्फ राघव उर्फ कल्लू जो चकेरी का रहने वाला है और बाबू सिंह जो चकेरी का ही रहने वाला है, शामिल हैं।
विभिन्न थानों में दर्ज हैं मामले और बरामद सामान का विवरण
पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि किस आरोपी के पास से क्या सामान बरामद हुआ और उनका पुराना इतिहास क्या है। मुख्य आरोपी अभिषेक सैनी उर्फ कद्दू के पास से पुलिस ने तीन चोरी के मोबाइल फोन के अलावा 315 बोर का एक अवैध तमंचा और कारतूस बरामद किया है। उसके खिलाफ कानपुर और फतेहपुर जिलों में लूट, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसे मामलों के तहत करीब आधा दर्जन मुकदमे पहले से दर्ज हैं। वहीं दूसरे आरोपी आदित्य यादव उर्फ रफ्तार के कब्जे से तीन मोबाइल फोन मिले हैं, और उसके खिलाफ जाजमऊ थाने में हत्या के प्रयास तथा आर्म्स एक्ट के मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस द्वारा दी गई है। तीसरे आरोपी राघवेंद्र यादव उर्फ राघव उर्फ कल्लू के पास से बाजार के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Oppo, Infinix, Redmi और Vivo कंपनियों के कुल चार स्मार्टफोन बरामद किए गए। इसके अलावा चौथे आरोपी बाबू सिंह के पास से Oppo और Motorola कंपनी के दो मोबाइल फोन पुलिस के हाथ लगे हैं।
कानूनी कार्रवाई और असली मालिकों तक वापसी की प्रक्रिया
महाराजपुर थाने की पुलिस ने पकड़े गए इन चारों शातिर आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में गंभीर मामला दर्ज कर लिया है और उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत माननीय न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही पुलिस उन तमाम लोगों का पता लगाने में जुटी है जिनके ये चोरी हुए स्मार्टफोन हैं, ताकि उनके वास्तविक मालिकों की पहचान कर ये कीमती उपकरण सुरक्षित तरीके से उन्हें वापस सौंपे जा सकें।



















