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वाराणसी में गंगा का बढ़ा जलस्तर, 84 घाटों का टूटा आपसी संपर्क और नावों का संचालन ठपउत्तर प्रदेश
18 अग॰ 2026, 9:16 pm (1 घंटे पहले)· 2

वाराणसी में गंगा का बढ़ा जलस्तर, 84 घाटों का टूटा आपसी संपर्क और नावों का संचालन ठप

वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण सभी 84 घाटों का आपस में संपर्क टूट गया है और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है।

वाराणसी: धार्मिक नगरी काशी में इन दिनों गंगा नदी का जलस्तर काफी तेजी से ऊपर उठ रहा है, जिससे पूरे इलाके में विकट स्थिति पैदा हो गई है। केंद्रीय जल आयोग की ओर से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में गंगा का जलस्तर लगभग 67 मीटर रिकॉर्ड किया गया है और यह लगातार प्रति घंटे चार सेंटीमीटर की रफ्तार से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। इस बढ़ते जलस्तर और सावन के पवित्र महीने में उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वाराणसी कमिश्नर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इसी क्रम में अगले आदेश तक नदी में नावों के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

बढ़ते पानी के कारण काशी के प्रसिद्ध घाटों की रूपरेखा और वहां होने वाले दैनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। स्थिति यह है कि हरीशचंद्र घाट पर अब केवल आखिरी हिस्से में ही शवदाह किया जा रहा है, जबकि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार छत के ऊपर करने की मजबूरी आन पड़ी है। इसके अलावा, गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती भी अपने तय स्थान से बदलकर छतों पर आयोजित की जा रही है। इन तमाम बदलावों के बीच सभी 84 घाटों का आपस में जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिसके चलते आवागमन और पैदल चलना भी लगभग ठप हो गया है।

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बाढ़ के पानी से बिगड़े हालात

प्रयागराज से होते हुए काशी पहुंची बाढ़ की इस स्थिति ने यहां के हालात को पूरी तरह से बेलगाम कर दिया है। दशाश्वमेघ घाट और शीतला घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर दैनिक गंगा आरती अब जमीन के बजाय छतों पर संपन्न कराई जा रही है, वहीं अस्सी घाट पर भी आरती का स्थान बदलना पड़ा है। नदी के किनारे बने छोटे से लेकर बड़े सभी मंदिर अब बाढ़ के पानी में जलमग्न हो चुके हैं।

नदी का जलस्तर बढ़ने से 84 घाटों का आपसी संपर्क कट जाने की वजह से वहां होने वाले तमाम धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बंद कर दिए गए हैं। सावन के महीने में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। हालात पर लगातार नजर रखने के लिए पुलिस द्वारा ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है, जबकि जल पुलिस और NDRF के दल लगातार नदी में पेट्रोलिंग कर रहे हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो सके।

सैलानी और स्थानीय लोग परेशान

पर्यटन के एक बड़े वैश्विक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले बनारस में इस बाढ़ के कारण पर्यटक काफी मायूस नजर आ रहे हैं। कई सैलानियों को इस बात का गहरा मलाल है कि वे मां गंगा की भव्य आरती का दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, तो कुछ लोग बोटिंग न हो पाने के कारण निराश हैं। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

इस बाढ़ का सीधा असर अंतिम संस्कार और मोक्ष की परंपराओं पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। हरीशचंद्र घाट पर श्मशान का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही बचा है जहां अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इस बारे में जानकारी देते हुए घाट के डोमराजा बहादुर चौधरी ने बताया कि यदि पानी का स्तर सिर्फ 2 फुट और बढ़ जाता है, तो घाट पर शवदाह का काम पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में मजबूरन तंग गलियों के भीतर अंतिम संस्कार करना होगा, जहां अभी तक नगर निगम की ओर से कोई सफाई नहीं कराई गई है, जिससे आने वाले दिनों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, मणिकर्णिका घाट पर भी शवों का अंतिम संस्कार जमीन के बजाय छतों पर ही किया जा रहा है।

बता दें कि कुछ समय पहले ही सावन के पहले सोमवार पर काशी के मंदिरों में भक्तों का भारी तांता लग गया था, लेकिन अब बढ़ती बाढ़ ने प्रशासन और आम जनता दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सवाल-जवाब

वाराणसी में गंगा का जलस्तर कितना दर्ज किया गया है?
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में गंगा का जलस्तर करीब 67 मीटर दर्ज किया गया है और यह 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
वाराणसी में नावों के संचालन पर रोक क्यों लगाई गई है?
बढ़ते जलस्तर और सावन के महीने में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस कमिश्नर ने नावों के संचालन पर रोक लगाई है।
84 घाटों की क्या स्थिति है?
गंगा का पानी बढ़ने से सभी 84 घाटों का आपस में संपर्क टूट चुका है और वहां आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
शवदाह और अंतिम संस्कार कहां किए जा रहे हैं?
हरीशचंद्र घाट पर अंतिम संस्कार केवल आखिरी बचे हिस्से में हो रहा है, जबकि मणिकर्णिका घाट पर शवों का दाह संस्कार छत के ऊपर किया जा रहा है।
गंगा आरती कहां आयोजित की जा रही है?
दशाश्वमेघ घाट और शीतला घाट पर दैनिक गंगा आरती अब जमीन के बजाय छतों पर की जा रही है, और अस्सी घाट पर भी आरती का स्थान बदल दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था कवर करने के अनुभव से यह स्पष्ट है कि सावन जैसे संवेदनशील समय में जब लाखों श्रद्धालु काशी आते हैं, तब 84 घाटों का संपर्क टूटना और शवदाह व्यवस्था का छतों पर शिफ्ट होना गंभीर आपदा प्रबंधन की चुनौती है। एनडीआरएफ और ड्रोन से निगरानी के बीच, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार जैसी अनिवार्य अंतिम क्रियाओं में कोई व्यवधान न आए और भगदड़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएं।

Rohan Verma@rohan-verma·4 मिनट पहले

वरिष्ठ संवाददाता होने के नाते मेरा मानना है कि गंगा का 4 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ना और घाटों का संपर्क कटना बुनियादी ढांचे और लोक नीति के स्तर पर एक गंभीर चेतावनी है। सावन के इस संवेदनशील दौर में जब प्रशासनिक अमला एनडीआरएफ और ड्रोन निगरानी के जरिए सुरक्षा संभालने में जुटा है, तब यह देखना होगा कि प्रयागराज से आ रहे इस बाढ़ के दबाव के बीच पर्यटन और अंतिम संस्कार जैसी अनिवार्य परंपराओं के प्रभावित होने से उपजा जनजीवन का यह संकट आने वाले दिनों में स्थानीय अर्थव्यवस्था और नगरीय प्रबंधन पर कितना भारी पड़ता है।

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