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हिमाचल के मर्चेंट नेवी कैडेट की मौत पर परिवार बेचैन: 'चेतावनी के बावजूद जहाज ओमान क्यों गया, सांसें चलते हुए फर्स्ट एड क्यों नहीं मिली'उत्तर प्रदेश
13 जून 2026, 3:29 pm (45 दिन पहले)· 0

हिमाचल के मर्चेंट नेवी कैडेट की मौत पर परिवार बेचैन: 'चेतावनी के बावजूद जहाज ओमान क्यों गया, सांसें चलते हुए फर्स्ट एड क्यों नहीं मिली'

हमीरपुर के भालू गांव के 23 वर्षीय मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य शर्मा की अमेरिकी हमले में मौत के बाद उनके पिता और चाचा ने रेस्क्यू में देरी, सुरक्षा इंतजाम और जहाज को ओमान भेजे जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भालू गांव में इस वक्त हर आंख नम है। यहां के रहने वाले 23 साल के मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य शर्मा की अमेरिकी हमले में जान चली गई, और तीन दिन बीत जाने के बाद भी परिवार अपने बेटे का पार्थिव शरीर घर आने की राह देख रहा है। माता-पिता, दादी और बाकी परिजन रो-रोकर बेहाल हैं, घर में मातम पसरा है और पूरे गांव पर शोक की छाया है।

पिता ने खड़े किए कई सवाल

बेटे की मौत के बाद आदित्य के पिता राजेश शर्मा का दर्द अब सवालों में बदल गया है। उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आदित्य की सांसें चल रही थीं, तो उसे समय रहते फर्स्ट एड क्यों नहीं दी गई। उन्होंने यह भी पूछा कि जब हादसे में 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, तो बाकी तीन नाविकों को बचाने में देरी क्यों हुई और उनकी जान क्यों नहीं बचाई जा सकी।

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राजेश शर्मा की सबसे बड़ी आपत्ति जहाज की रवानगी को लेकर है। उनका कहना है कि कई दिनों से अमेरिका की तरफ से हमले की चेतावनी दी जा रही थी, फिर भी कंपनी के कैप्टन ने नाविकों को ओमान की ओर क्यों भेजा। पिता ने मांग की है कि ओमान में आदित्य की मौत की पूरी जांच होनी चाहिए।

शव अभी जहाज पर, सिर में गंभीर चोट

राजेश शर्मा ने बताया कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक आदित्य का शव अभी भी जहाज पर ही है और उसे पोस्टमार्टम के लिए किसी दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आदित्य के सिर में गंभीर चोट आई थी। परिवार को अब भी इंतजार है कि पार्थिव शरीर कब भारत पहुंचेगा।

चाचा बोले- जहाज की लोकेशन पर कंपनी का दावा झूठा

आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल का कहना है कि उनकी डीजी शिपिंग के अधिकारियों से फोन पर बात हुई है। अधिकारियों ने इस हादसे पर दुख जताया और भरोसा दिलाया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी।

लखनपाल ने कंपनी के बयान पर सीधा सवाल उठाया। उनके मुताबिक कंपनी दावा कर रही है कि जहाज एक ही जगह खड़ा था, जबकि आदित्य ने खुद अपने पिता को बताया था कि जहाज ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी की तरफ से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई और न्याय की मांग

संजीव लखनपाल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि डीजी शिपिंग ने परिवार को आश्वासन दिया है कि आदित्य की मौत से जुड़े हर तथ्य की गहराई से जांच होगी, ताकि सच्चाई सामने आए और परिवार को इंसाफ मिल सके।

परिवार चाहता है कि केंद्र सरकार भी ओमान से बात कर पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने के लिए दबाव बनाए। लखनपाल ने बताया कि आदित्य से कई बार बातचीत होती रहती थी और उसने यह तक कहा था कि ओमान के मौजूदा हालात को देखते हुए समुद्र में सिग्नल बंद किए जा सकते थे, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया।

'चेतावनी के बाद सीधा हमला नहीं होता'

संजीव लखनपाल ने तीखे लहजे में कहा कि अगर दो दिन पहले ही किसी जहाज पर हमला हो चुका था, तो एहतियात क्यों नहीं बरती गई। उनका कहना है कि अमेरिका ने जब चेतावनी दी थी, तो सीधा अटैक कभी नहीं होता — यह घिनौनी हरकत की गई है, जिसका सबक भगवान ही देगा। फिलहाल पूरे परिवार की निगाहें उसी पल पर टिकी हैं, जब आदित्य का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई के लिए अपने घर पहुंचेगा।

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