उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से न्याय प्रणाली की कार्यकुशलता और त्वरित न्याय की एक बहुत बड़ी मिसाल सामने आई है। यहाँ की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे के साथ कुकर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी को फांसी की सजा मुकर्रर की है। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन इस मामले में सबसे अहम और ध्यान देने योग्य बात यह रही कि पुलिस द्वारा अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जाने के महज एक महीने के भीतर ही पूरी न्यायिक सुनवाई संपन्न कर ली गई। अदालत ने बिना किसी देरी के मामले की गंभीरता को समझा और समाज में एक कड़ा संदेश देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुना दिया।
शादी समारोह की वह खौफनाक रात
यह दिल दहला देने वाली वारदात इसी साल मई महीने में कैसरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दयालपुरवा (जिसे मझारा तौकली भी कहा जाता है) गांव में हुई थी। पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना की शुरुआत 12 मई, 2026 की रात को हुई। उस रात 7 साल का मासूम बच्चा अपने दो अन्य भाइयों के साथ गांव में ही आयोजित एक विवाह समारोह में शामिल होने के बाद वापस घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में उन्हें गांव का ही रहने वाला 21 वर्षीय मुकेश निषाद मिल गया। मुकेश निषाद ने उस छोटे बच्चे को नृत्य का कार्यक्रम दिखाने का लालच दिया और अपने झांसे में लेकर उसे भाइयों से अलग कर अपने साथ ले गया। जब काफी देर रात तक बच्चा घर नहीं लौटा, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी और उन्होंने रात में ही उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
झाड़ियों में मिला मासूम का शव
पूरी रात की बेचैनी और खोजबीन के बाद अगले दिन, यानी 13 मई की सुबह, गांव से करीब 400 से 500 मीटर की दूरी पर स्थित घनी झाड़ियों में उस लापता 7 वर्षीय बच्चे का शव बरामद हुआ। मृतक के पिता और ग्रामीणों ने जब मौके पर जाकर शव देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्चे का गला रेता गया था और उसकी हत्या बेहद ही क्रूर और अमानवीय तरीके से की गई थी। इस खौफनाक मंजर को देखकर पूरे गांव और आसपास के इलाके में भारी हड़कंप मच गया और लोग आक्रोशित हो उठे। घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस को मृतक के पिता ने एक लिखित तहरीर दी, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर बताया कि उनका बेटा पड़ोस के विवाह समारोह में मुकेश निषाद के साथ ही गया था।
वैज्ञानिक साक्ष्य और पुलिस की त्वरित जांच
मामले की नजाकत और गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फौरन संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया और अपनी जांच को तेजी से आगे बढ़ाया। शक की सुई सीधे तौर पर मुकेश निषाद की ओर इशारा कर रही थी, जिसके आधार पर उसे बिना समय गंवाए हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की कड़ी पूछताछ और दबाव के आगे आरोपी ज्यादा देर तक सच नहीं छिपा सका। पूछताछ में उसने अपना भयानक जुर्म कबूल कर लिया। उसने पुलिस को विस्तार से बताया कि उसने पहले उस 7 साल के मासूम बच्चे के साथ कुकर्म की वारदात को अंजाम दिया, और फिर जब उसे लगा कि बच्चा उसका राज खोल देगा, तो उसने सबूत मिटाने के इरादे से मासूम का गला काटकर उसकी हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में फेंक दिया। जुर्म कुबूलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तुरंत जेल भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने गवाहों के बयानों और घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपनी विवेचना पूरी की और घटना के कुछ ही हफ्तों बाद, 22 जून को न्यायालय के समक्ष एक बेहद मजबूत आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
एक महीने में आया अदालत का कड़ा फैसला
इस सनसनीखेज मामले की त्वरित सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अरबिंद कुमार गौतम की अदालत में नियमित रूप से हुई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष जिला शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो एक्ट) संत प्रताप सिंह ने अपनी कड़ी पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों का गहन अवलोकन करने के बाद, अदालत ने मुकेश निषाद को इस अमानवीय कृत्य के लिए पूरी तरह से दोषी ठहराया। अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ने दोषी मुकेश निषाद को फांसी की सजा सुनाई और साथ ही उस पर एक लाख रुपये का भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया। आरोप पत्र दाखिल होने के मात्र एक महीने के भीतर ऐसा कड़ा फैसला आना न्यायिक प्रक्रिया की तेजी और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति अदालत की सख्ती का एक बहुत ही महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। बेहद कम समय में आया यह फैसला पूरे क्षेत्र में न्याय की एक उम्मीद बनकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
बलिया में सुनील यादव हत्याकांड का अपडेट
न्यायिक और पुलिस जांच से जुड़ी एक अन्य हालिया खबर में, बलिया जिले के बहुचर्चित सुनील यादव हत्याकांड से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) की अदालत में पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले के तीन आरोपियों को और अधिक पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने हेतु एक याचिका दाखिल की थी। हालांकि, अदालत ने पुलिस के तर्कों का बारीकी से अध्ययन किया और उन आधारों को अपर्याप्त मानते हुए रिमांड की इस याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे आरोपियों को फिलहाल पुलिस रिमांड पर नहीं भेजा जाएगा।




















