उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम एक बार फिर अंतरधार्मिक विवाह और धर्म परिवर्तन के आयोजनों के कारण सामाजिक और कानूनी चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। इस आश्रम के आचार्य पंडित केके शंखधार वर्ष 2013 से लगातार ऐसे वैवाहिक संस्कारों का संपादन करा रहे हैं, जिनमें अन्य धर्मों की युवतियां अपनी इच्छा से सनातन धर्म स्वीकार कर हिंदू युवकों के साथ परिणय सूत्र में बंधती हैं। आचार्य का दावा है कि बीते एक दशक से भी अधिक समय के दौरान वे 500 से ज्यादा मुस्लिम युवतियों का धर्म परिवर्तन संपन्न कराकर वैदिक रीति-रिवाज से उनका विवाह करा चुके हैं। इस गतिविधि को लेकर स्थानीय स्तर पर जहां सनातन धर्म के प्रसार की बातें कही जा रही हैं, वहीं कानूनी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
वैदिक विवाह प्रक्रिया और आयु का सत्यापन
आश्रम प्रबंधन के अनुसार किसी भी अंतरधार्मिक विवाह या धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले कड़ी जांच-पड़ताल की जाती है। पंडित केके शंखधार का कहना है कि आश्रम में आने वाले प्रत्येक जोड़े के आवश्यक कानूनी दस्तावेजों, पहचान पत्रों और आयु प्रमाणपत्रों का बारीकी से निरीक्षण किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दोनों पक्ष कानूनन बालिग हैं। इसके उपरांत, विवाह की इच्छा रखने वाली युवती की स्वतंत्र सहमति दर्ज करने के लिए एक औपचारिक शपथ पत्र तैयार कराया जाता है। संपूर्ण कागजी औपचारिकताएं और कानूनी सत्यापन पूरा होने के बाद ही आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न कराया जाता है।
डिजिटल माध्यमों से संपर्क और सुरक्षा की धमकियां
अगस्त्य मुनि आश्रम की गतिविधियों और वहां कराई जाने वाली शादियों के बारे में जानकारी मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचती है। पंडित केके शंखधार के अनुसार, सहायता पाने वाले जोड़े फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, गूगल, ब्लॉग और विभिन्न मीडिया समाचारों के माध्यम से आश्रम से संपर्क स्थापित करते हैं। आचार्य का कहना है कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार की प्रेरणा से वे इस कार्य से जुड़े हैं और भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन व प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। हालांकि इस प्रकार के संवेदनशील कार्य के कारण उन्हें कई बार अनजान टेलीफोन नंबरों से धमकी भरे कॉल भी प्राप्त हुए हैं। पंडित शंखधार का कहना है कि वे ऐसी धमकियों से भयभीत नहीं होते और भगवान शिव की कृपा पर पूर्ण विश्वास रखते हुए अपना कार्य आगे बढ़ा रहे हैं।
कानूनी शिकायतें और रजामंदी का पक्ष
हालांकि आश्रम में होने वाले विवाहों पर समय-समय पर आरोप भी लगते रहे हैं। अगस्त 2024 में एक युवती द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पंडित केके शंखधार के विरुद्ध जबरन धर्म परिवर्तन कराने और दबाव बनाकर विवाह संपन्न कराने का मामला सामने आया था। आचार्य ने इन आरोपों का पूरी तरह खंडन किया था और स्पष्ट किया था कि उनके आश्रम में किसी भी व्यक्ति पर दबाव नहीं डाला जाता। उनका कहना है कि वे केवल उन्हीं बालिगों का विवाह कराते हैं जो अपनी स्वेच्छा और पूर्ण रजामंदी से उनके पास आते हैं। इसके बावजूद, अगस्त्य मुनि आश्रम में लगातार आयोजित होने वाले ये विवाह बरेली में धार्मिक, सामाजिक और कानूनी बहसों का मुख्य विषय बने हुए हैं।



















