कानपुर शहर में लगातार गंभीर होती जा रही वायु प्रदूषण की समस्या और जहरीली धूल के कणों पर अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई आधारित सेंसर के जरिए निगरानी रखी जाएगी। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के आंकड़ों में औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाला यह शहर पांचवें पायदान से फिसलकर सीधे 11वें स्थान पर पहुंच गया है। इस गिरावट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद अब अधिकारी हरकत में आ गए हैं। जिस धूल और गंदगी को लेकर आम नागरिक लंबे समय से शिकायतें दर्ज करा रहे थे, अब खुद नगर निगम के अधिकारियों ने भी उसे प्रदूषण में भारी वृद्धि का मुख्य कारण मान लिया है।
सड़कों की धूल और निर्माण कार्यों से बिगड़े हालात
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने खुलकर स्वीकार किया है कि शहर की सड़कों से उड़ने वाले धूल के गुबार और अनियंत्रित निर्माण कार्यों की वजह से हवा की गुणवत्ता लगातार बदतर होती जा रही है। इन बिगड़ते हालातों से निपटने और हवा को फिर से साफ बनाने के लिए नगर निगम ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से चलने वाली संस्था एरावत फाउंडेशन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत कानपुर के 150 से अधिक प्रमुख स्थानों पर कम लागत वाले एयर क्वालिटी सेंसर स्थापित किए जा रहे हैं। इन आधुनिक सेंसर की मदद से संबंधित अधिकारियों को कुछ ही मिनटों में यह सटीक जानकारी मिल जाएगी कि किस विशिष्ट चौराहे या इलाके में हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित है और उस प्रदूषण के पीछे की मुख्य वजह क्या है।
प्रदूषण बढ़ते ही अधिकारियों के पास पहुंचेगा अलर्ट
एरावत फाउंडेशन से जुड़े पदाधिकारियों ने जानकारी दी है कि इन सेंसर के माध्यम से मिलने वाले वास्तविक आंकड़ों के आधार पर प्रदूषण के स्तर पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि किसी इलाके या चौराहे पर अवैध रूप से कूड़ा जलाया जा रहा है या फिर अत्यधिक धूल उड़ रही है, तो तुरंत उसका अलर्ट संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच जाएगा। इस त्वरित सूचना प्रणाली के कारण समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सकेगी और प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए नगर निगम की तरफ से एक समर्पित पोर्टल भी विकसित कराया गया है, जिस पर हर दिन का वायु प्रदूषण से जुड़ा डाटा सार्वजनिक किया जाएगा। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने विश्वास जताया है कि आगामी तीन से चार महीनों के भीतर स्थिति में काफी हद तक सुधार लाने के लिए कड़े प्रयास किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि संबंधित संस्था द्वारा लखनऊ और दिल्ली सहित देश के कई अन्य प्रमुख शहरों में भी वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए इसी तरह के कार्य किए जा रहे हैं।
पिछले छह वर्षों में ऐसा रहा कानपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर की हवा का हाल साल दर साल उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2020 के दौरान कानपुर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 149 दर्ज किया गया था, जबकि वर्ष 2021 में यह मामूली रूप से बढ़कर 150 पर पहुंच गया। इसके बाद वर्ष 2022 में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह 133 हो गया, तथा वर्ष 2023 और 2024 दोनों ही सालों में यह 138 के बजाय 118 पर स्थिर रहा। हालांकि, वर्ष 2025 आते-आते यह एक बार फिर बढ़कर 138 तक पहुंच गया, जिससे साफ पता चलता है कि पिछले साल हवा की सेहत में फिर से बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
शहर के अलग-अलग हिस्सों में इन दिनों अनवरत सड़क और सीवर निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिनकी वजह से भारी मात्रा में धूल उड़ रही है। मुख्य मार्गों पर निर्माण सामग्री का खुले में पड़े रहना, मलबे को बिना ढंके छोड़ देना और निर्माण स्थलों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव न किया जाना इस समस्या को और अधिक विकट बना रहा है। कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी हरे पर्दे या बैरिकेडिंग के निर्माण कार्य अंजाम दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, खुले आसमान के नीचे कूड़ा जलाए जाने की घटनाएं भी हवा में खतरनाक और जहरीला धुआं घोलने का काम कर रही हैं।
क्या कहते हैं वायु गुणवत्ता के मानक
प्रदूषण के मानकों के अनुसार, शून्य से 50 तक का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा माना जाता है, जबकि 51 से 100 तक की स्थिति संतोषजनक कहलाती है। इसके बाद 101 से 200 तक का स्तर मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक का खतरनाक श्रेणी में गिना जाता है। कानपुर नगर निगम का कड़ा दावा है कि इन नए एआई सेंसरों और आधुनिक निगरानी प्रणाली के आने से प्रदूषण के सटीक कारणों का समय रहते पता चल सकेगा और लापरवाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।



















