उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित जिला कारागार में अपनी माताओं के साथ दिन बिता रहे मासूम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को ध्यान में रखते हुए विशेष कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। ऐसे बच्चे जिनकी उम्र छह साल से कम है और जिनकी माताएं विभिन्न अपराधों के तहत जेल में सजा काट रही हैं या विचाराधीन बंदी हैं, उन्हें मजबूरीवश अपनी मां के साथ ही रहना पड़ता है। वर्तमान में मुरादाबाद जिला कारागार में दो मासूम बच्चे अपनी माताओं के साथ निवास कर रहे हैं। इन बच्चों के बचपन पर जेल के माहौल का कोई विपरीत प्रभाव न पड़े, इसके लिए जेल प्रशासन द्वारा नियमावली के अनुरूप स्वास्थ्य, आहार, खेलकूद और शिक्षा से जुड़ी तमाम सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जेल नियमावली के अंतर्गत स्वास्थ्य और पोषण की विशेष व्यवस्था
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि कारागार परिसर में रह रहे मासूम बच्चों और उनकी माताओं की देखभाल पूरी तरह से निर्धारित जेल मैनुअल के नियमों के अधीन की जाती है। जेल नियमावली में बच्चों के स्वास्थ्य, दैनिक खान-पान और नियमित डॉक्टरी जांच से संबंधित सभी व्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं। प्रशासन इन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करा रहा है। इसके साथ ही, स्तनपान कराने वाली महिला बंदियों के स्वास्थ्य और शिशुओं के पोषण को ध्यान में रखते हुए उनके लिए विशेष पौष्टिक आहार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत माताओं को नियमानुसार दूध, फल और सभी आवश्यक पौष्टिक सामग्रियां नियमित रूप से प्रदान की जाती हैं ताकि बच्चा और मां दोनों पूरी तरह स्वस्थ रहें।
छह वर्ष की अधिकतम आयु सीमा और परिजनों को सुपुर्दगी की प्रक्रिया
कारागार प्रशासन द्वारा बच्चों को जेल में रखे जाने के संदर्भ में समय-सीमा के नियमों का भी कड़ाई से पालन कराया जाता है। नियमों के अनुसार, कोई भी बच्चा अधिकतम छह वर्ष की आयु तक ही अपनी मां के साथ जेल के अंदर रह सकता है। जैसे ही किसी बच्चे की उम्र छह वर्ष पूर्ण हो जाती है, उसे कारागार परिसर में आगे रहने की अनुमति नहीं दी जाती है। ऐसी स्थिति निर्मित होने पर जेल प्रशासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जाती है। बच्चे को संबंधित महिला बंदी के परिजनों अथवा उनके कानूनी संरक्षकों के सुपुर्द कर दिया जाता है। बच्चे को परिजनों के हवाले करने के साथ ही संपूर्ण मामले की औपचारिक लिखित सूचना संबंधित माननीय न्यायालय को प्रेषित की जाती है ताकि सभी कानूनी अभिलेख अद्यतन रहें।
क्रेच और चिल्ड्रेंस पार्क के जरिए सर्वांगीण विकास का प्रयास
जेल की चारदीवारी के भीतर रहते हुए भी बच्चों का स्वाभाविक बचपन प्रभावित न हो, इसके लिए मुरादाबाद जेल प्रशासन ने विशेष भौतिक सुविधाएं विकसित की हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कारागार परिसर के भीतर ही एक समर्पित क्रेच यानी शिशु गृह और एक सुंदर चिल्ड्रेंस पार्क की स्थापना की गई है। इस पार्क और क्रेच में बच्चों के मनोरंजन, खेलने-कूदने और आपस में घुलने-मिलने के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे जेल के नीरस और तनावपूर्ण वातावरण से दूर रहकर एक सामान्य, खुशहाल और भयमुक्त परिवेश में अपना शुरुआती बचपन बिता सकें।
प्रारंभिक शिक्षा और बाहरी विद्यालयों में प्रवेश का प्रबंध
मासूम बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी शिक्षा-दीक्षा का भी व्यापक खाका तैयार किया गया है। जेल परिसर में रह रहे बच्चों को बुनियादी शिक्षा और संस्कार देने के उद्देश्य से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के सहयोग से एक योग्य शिक्षिका की नियुक्ति की गई है। यह शिक्षिका नियमित रूप से कारागार का दौरा कर बच्चों की प्रारंभिक पढ़ाई-लिखाई और देखरेख का कार्य संभालती हैं। इसके अतिरिक्त, यदि कारागार में रह रहे किसी बच्चे की उम्र चार वर्ष से अधिक हो जाती है, तो जेल प्रशासन आगे बढ़कर उसकी औपचारिक शिक्षा की व्यवस्था करता है। इसके तहत बच्चे का दाखिला कारागार के बाहर स्थित किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया जाता है, जिससे बच्चा नियमित रूप से बाहर जाकर स्कूली शिक्षा प्राप्त कर सके और मुख्यधारा से जुड़ा रहे।



















