झारखंड में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में तीन विदेशी नागरिकों के नाम दर्ज पाए गए, जिनकी जांच के बाद उनके अफगानिस्तान के नागरिक होने की पुष्टि हुई है। निर्वाचन विभाग के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और तीनों व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं। अब प्रशासनिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि भारतीय मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम दर्ज कराने के पीछे किस स्तर की चूक या नेटवर्क शामिल था।
गोलमुरी के बूथ संख्या 286 में दर्ज थे तीनों नाम
निर्वाचन विभाग द्वारा जारी विवरण के अनुसार, ये तीनों नाम जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित हिंदुस्तानी संघ स्कूल में बनाए गए बूथ संख्या 286 की मतदाता सूची में शामिल थे। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत तैयार की गई प्रारूप मतदाता सूची में भी इन्हें स्थान मिल गया था। क्रम संख्या के आधार पर तीनों के नाम इस प्रकार दर्ज थे
- आसिल खान: मतदाता सूची में क्रम संख्या 30 पर नाम दर्ज था।
- मोहम्मद असलम: मतदाता सूची में क्रम संख्या 31 पर दर्ज किया गया था।
- मोहम्मद इब्राहिम: मतदाता सूची में क्रम संख्या 33 पर नाम शामिल था।
दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया के दौरान जब अधिकारियों को इन नामों पर संदेह हुआ, तो निर्वाचन विभाग ने संबंधित तीनों व्यक्तियों को औपचारिक नोटिस जारी किया। उनसे भारतीय नागरिकता और मतदाता होने से संबंधित आवश्यक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया। तय समय-सीमा के भीतर जब कोई संतोषजनक या प्रामाणिक दस्तावेज़ पेश नहीं किया गया, तो विभाग ने उनके पासपोर्ट की गहन जांच करवाई। पासपोर्ट पड़ताल में स्पष्ट रूप से साबित हो गया कि तीनों व्यक्ति अफगानिस्तान के नागरिक हैं, जिसके तुरंत बाद उनका नाम मतदाता सूची से विलोपित कर दिया गया।
धालभूम एसडीओ अर्णव मिश्रा की अगुवाई में जांच कमेटी गठित
विदेशी नागरिकों के नाम भारतीय मतदाता सूची में शामिल होने का मामला सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्राथमिक सत्यापन के समय यह बड़ी चूक पकड़ में क्यों नहीं आई और किन परिस्थितियों में अफगानिस्तान के नागरिकों को मतदाता पहचान पत्र जारी होने की नौबत तक मामला पहुंचा।
इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए धालभूम के एसडीओ अर्णव मिश्रा ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति निम्नलिखित मुख्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी
- नेटवर्क और साज़िश की जांच: यह पता लगाया जाएगा कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने में किसी स्थानीय व्यक्ति, बिचौलिए या गिरोह का हाथ तो नहीं था।
- लापरवाही की जवाबदेही: यह स्पष्ट किया जाएगा कि यह घटना केवल निचले स्तर की प्रशासनिक लापरवाही थी या जानबूझकर की गई अनियमितता।
- दस्तावेज़ों का पुनर्मूल्यांकन: पुनरीक्षण अभियान के दौरान जमा किए गए सभी आवेदनों और संलग्न दस्तावेज़ों की दोबारा बारीकी से जांच की जाएगी।
निर्वाचन अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।





















