उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक अदालत ने एक बेहद चौंकाने वाले हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महिला और उसके प्रेमी को मौत के घाट उतारने के जुर्म में फांसी के फंदे पर लटकाने का आदेश दिया है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को समाज की मूल मान्यताओं और रिश्तों की पवित्रता के खिलाफ करार देते हुए अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतने से इनकार कर दिया। বিচার प्रक्रिया के दौरान अदालत की ओर से की गई टिप्पणियां काफी चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जिनमें प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए इस अपराध की क्रूरता को रेखांकित किया गया है।
हत्या की खौफनाक साजिश और सांप का ड्रामा
यह पूरा मामला मेरठ का है जहां अकबरपुर सादात गांव के रहने वाले अमित कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पिछले साल 13 अप्रैल को अमित अपने घर के अंदर एक खाट पर मृत अवस्था में पाया गया था और हैरान करने वाली बात यह थी कि उसकी लाश के ठीक पास एक जिंदा सांप घूम रहा था। शुरुआती दौर में इस घटना को देखकर परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को यही लगा कि उसकी मौत किसी जहरीले सांप के काटने की वजह से हुई है। लेकिन जब पुलिस ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करते हुए पोस्टमार्टम कराया, तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की गर्दन और नाक पर गंभीर चोट के निशान मिले, जिससे यह साफ हो गया कि उसकी मौत सांप के डसने से नहीं बल्कि गला घोंटकर की गई थी। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि उसकी पत्नी रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया था और सांप को महज एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके।
अदालत की सख्त टिप्पणी और प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख
मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने अपना फैसला सुनाते हुए महाभारत और मनुस्मृति का विशेष रूप से जिक्र किया। जज ने महाभारत के सावित्री प्रसंग का हवाला देते हुए कहा कि सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से वापस ले आई थी, जबकि इस मामले में रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अपने ही पति की सांसें छीन लीं। हिंदू परंपराओं में पत्नी को अर्द्धांगिनी का दर्जा दिया गया है और इस तरह अपनों को धोखा देकर हत्या करना पूरे सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देता है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के लिए समाज में किसी भी प्रकार की माफी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। अदालत ने इस आधार पर रविता और अमरदीप को अमित कश्यप की हत्या के आरोप में फांसी की सजा का ऐलान कर दिया।
बच्चों की परवरिश और परिजनों की प्रतिक्रिया
इस सनसनीखेज फैसले के बाद मृतक के परिवार के भीतर न्याय मिलने का संतोष साफ तौर पर दिखाई दिया। अमित कश्यप की मां मुनेश ने न्यायालय के इस कदम पर संतोष जताते हुए कहा कि अब उनके बेटे की आत्मा को आखिरकार शांति मिल गई है। दूसरी तरफ, अदालत ने कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए दोषी रविता के तीन मासूम बच्चों के भरण-पोषण और भविष्य की देखभाल की जिम्मेदारी जिला मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश दिया है, ताकि बच्चों का जीवन सुरक्षित रह सके। इस बहुचर्चित मामले में अदालत के कड़े रुख ने एक बार फिर यह संदेश देने का काम किया है कि गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को कानून के कटघरे से राहत नहीं मिलने वाली है। अधिक जानकारी के लिए मेरठ और उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ी जा सकती हैं।























