राज्य भर में व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा की जा रही कर चोरी और लेखा बहियों में हेराफेरी को पकड़ने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों की विशेष टीमों ने विभिन्न शहरों में एक साथ दबिश देकर खरीद और बिक्री के बुनियादी दस्तावेजों, भौतिक स्टॉक तथा कर दावों की पड़ताल की। इस सघन अभियान के दौरान व्यापारियों द्वारा कर अदायगी में गंभीर खामियां उजागर हुईं, जिसके दबाव में कई प्रतिष्ठानों ने तत्काल प्रभाव से सरकारी खजाने में देय राशि जमा कराना स्वीकार कर लिया।
पाँच प्रमुख जिलों में नौ व्यापारिक ठिकानों पर सघन पड़ताल
अधिकारियों के दस्ते ने 9 और 10 अक्टूबर को सुनियोजित रूप से पांच जिलों में फैले 9 कारोबारी परिसरों को अपनी जांच के दायरे में लिया। इन शहरों में जयपुर, अलवर, कोटा, हनुमानगढ़ और दौसा शामिल रहे। प्राथमिक तौर पर जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, इन इकाइयों में लगभग 3 करोड़ 15 लाख रुपये के संभावित कर राजस्व का गोलमाल पकड़ा गया। विभागीय शिकंजा कसते ही संबंधित व्यवसायियों ने स्वेच्छा प्रकट करते हुए करीब 2 करोड़ 21 लाख रुपये का कर भुगतान तत्काल कर दिया।
यह व्यापक धरपकड़ केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। विभाग ने कपड़ा मिलों, प्रिंटिंग इकाइयों, मिष्ठान्न भंडारों, खानपान केंद्रों, खाद्य तेल मिलों, माल परिवहन एजेंसियों, फर्नीचर विक्रय केंद्रों तथा मोबाइल शोरूमों पर एक साथ दस्तक दी। जांच अधिकारियों ने गोदामों में रखे वास्तविक माल का मिलान बहीखातों में दर्ज प्रविष्टियों से किया। इसके साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट जिसे संक्षेप में आईटीसी कहा जाता है, उसके दावों का गहन सत्यापन किया गया। अनियमितता पाए जाने पर कई संस्थानों के हिसाब-किताब से संबंधित कागजात जब्त कर लिए गए और व्यापारियों को आधिकारिक समन थमाए गए हैं।
कोटा की तेल मिल में आईटीसी का अनुचित उपभोग
कोटा में स्थित मैसर्स रिद्धि सिद्धि ऑयल इंडस्ट्रीज में जांच के दौरान अत्यंत गंभीर अनियमितता उजागर हुई। इस औद्योगिक इकाई पर आरोप है कि इसने करमुक्त आपूर्ति के विरुद्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रावधानों का अनुचित लाभ उठाया। वाणिज्यिक कर विभाग के आकलन में यहां संभावित कर देनदारी का आंकड़ा करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपये आंका गया। निरीक्षण प्रक्रिया के बीच कारोबारी ने अपनी देयता स्वीकारते हुए 10 अक्टूबर तक 1 करोड़ 21 लाख 38 हजार रुपये का भुगतान विभाग के खाते में जमा करवा दिया। इस फर्म के पिछले वर्षों के वित्तीय ब्योरों की छानबीन अभी जारी है।
जयपुर में कपड़ा छपाई और खानपान कारोबारियों की जांच
राजधानी जयपुर के बगरू इलाके में संचालित मैसर्स बगरू हस्तकला प्रिंटर्स पर जब जांच दल पहुंचा, तो वहां कपड़ों के विक्रय पर लागू होने वाली कर दरों में हेरफेर का मामला पकड़ में आया। फर्म पर निर्धारित अलग-अलग स्लैब के बजाय सभी तैयार परिधानों पर केवल 5 प्रतिशत की दर से कर अदायगी करने का आक्षेप लगा। इसके अतिरिक्त, मौके पर मौजूद कपड़ों के वास्तविक थानों और बहीखातों में दर्ज विवरण में भारी विसंगति दर्ज की गई। इस पूरे मामले में कर निर्धारण शाखा ने करीब 15 लाख रुपये की देनदारी निकाली, जिसके एवज में संबंधित इकाई ने 13 लाख 17 हजार 74 रुपये जमा करा दिए।
इसी प्रकार जयपुर के सी-स्कीम क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध गोपाल सिंह पतासी भंडार पर भी कर अदायगी की जांच की गई। प्रतिष्ठान के रोजाना के टर्नओवर और जमा कराए गए टैक्स में अंतर पाए जाने पर लगभग 20 लाख रुपये की संदिग्ध राशि चिन्हित हुई। इसके बाद इस खानपान केंद्र की ओर से 3 लाख 32 हजार रुपये की राशि सरकारी कोष में अदा की गई।
मिष्ठान्न भंडार में 40 लाख रुपये की गड़बड़ी उजागर
जयपुर के ही एक अन्य बड़े संस्थान बॉम्बे मिष्ठान भंडार में रेस्टोरेंट सेवा श्रेणी के अंतर्गत लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता पर सवाल खड़े हुए। अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लेनदेन से जुड़े रजिस्टरों, वाउचर्स और डिजिटल प्रविष्टियों का सूक्ष्म परीक्षण किया। इस विस्तृत पड़ताल में करीब 40 लाख रुपये के टैक्स क्रेडिट का गलत इस्तेमाल पाया गया। इस पर त्वरित कदम उठाते हुए संचालक ने निर्धारित चालान फॉर्म डीआरसी-03 का सहारा लेकर 25 लाख 4 हजार रुपये की राशि अदा कर दी।
अलवर में ट्रांसपोर्ट एजेंसियों और फर्नीचर फर्मों पर कार्रवाई
अलवर शहर में माल ढुलाई का काम करने वाली दो प्रमुख कंपनियों पर विभागीय गाज गिरी। इनमें शबीर खान ट्रांसपोर्ट कंपनी और राजस्थान गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी के नाम शामिल हैं। कर नियमों के अनुसार 5 प्रतिशत कर दर अथवा पूरी तरह करमुक्त माल की ढुलाई सेवाओं में आईटीसी का दावा मान्य नहीं होता, किंतु इन फर्मों द्वारा इस छूट का लाभ गलत तरीके से उठाने का तथ्य सामने आया। शबीर खान ट्रांसपोर्ट कंपनी के मामले में विभागीय गणना में 21.85 लाख रुपये की देनदारी तय हुई थी, जिसके जवाब में फर्म ने 21.29 लाख रुपये भर दिए। वहीं राजस्थान गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी के संदर्भ में लगभग 22.83 लाख रुपये की संभावित कर चोरी चिन्हित की गई, जिसे विभाग के अनुसार नियमानुसार जमा करा दिया गया है।
अलवर जिले में ही राहुल डेकोर तथा उससे संबद्ध फर्म निखिल फोम एंड फर्निशिंग पर भी अधिकारियों ने छापा मारा। इन फर्मों पर बिना वैध बीजक अथवा पक्के बिलों के माल की खरीद और बिक्री संचालित करने की गुप्त सूचना मिली थी। निरीक्षकों ने गोदामों में रखी गद्दों और सजावटी सामग्री की वास्तविक गिनती की तथा कंप्यूटर में दर्ज स्टॉक से उसकी तुलना की। इस प्रतिष्ठान पर लगभग 12 लाख रुपये की कर गड़बड़ी का प्राथमिक आकलन किया गया है।
हनुमानगढ़ और दौसा में भी की गई सख्त छानबीन
उत्तरी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर कस्बे में स्थित श्री हरि स्वीट्स पर कारोबार का वास्तविक आकार छिपाने का मामला पकड़ा गया। दुकान की दैनिक बिक्री को कम दिखाकर सरकार को मिलने वाले टैक्स में सेंध लगाई जा रही थी। प्राथमिक स्तर पर लगभग 7 लाख 30 हजार रुपये का टैक्स बकाया पाया गया, जिस पर मिठाई विक्रेता ने मौके पर ही 7 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
उधर दौसा जिले के महुवा कस्बे में मैसर्स खंडेलवाल टेलीकॉम सेंटर पर देय कर का समय पर भुगतान न करने के आरोप में कार्रवाई अमल में लाई गई। अधिकारियों ने न केवल व्यापारिक दुकान बल्कि उसके संचालक के निजी आवास की भी तलाशी ली। वहां रखे मोबाइल फोन, एक्सेसरीज तथा संबंधित लेखा पुस्तकों की जब्ती की गई। मोबाइल कारोबारी ने अपनी तरफ से 7 लाख रुपये का कर विभाग में जमा करवा दिया।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जारी रहेगा सघन अभियान
वाणिज्यिक कर विभाग के उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश भर में राजस्व रिसाव को रोकने और ईमानदार व्यवसायियों के कारोबारी माहौल को सुरक्षित रखने के लिए यह विशेष अभियान आगे भी लगातार चलाया जाएगा। विभागीय टीमें अब केवल वार्षिक रिटर्न तक सीमित न रहकर वास्तविक स्टॉक, ट्रांसपोर्ट ई-वे बिल और आईटीसी दावों के क्रॉस-वेरिफिकेशन पर जोर दे रही हैं। जिन कारोबारियों के यहां दस्तावेज जब्त किए गए हैं, उन्हें अपनी सफाई पेश करने के लिए बुलाया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि गलत कर दर लगाने, शून्य कर आपूर्ति पर क्रेडिट क्लेम करने अथवा बिना बिल लेनदेन करने वालों पर नियमों के मुताबिक भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



















