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सुल्तानपुर का गौरवशाली इतिहास: 1921 में बाबू गणपत सहाय ने संभाली कांग्रेस की कमानउत्तर प्रदेश
28 जून 2026, 10:07 am (45 दिन पहले)· 2

सुल्तानपुर का गौरवशाली इतिहास: 1921 में बाबू गणपत सहाय ने संभाली कांग्रेस की कमान

सुल्तानपुर में साल 1921 में पहली बार जिला कांग्रेस कमेटी का गठन हुआ था, जिसकी कमान बाबू गणपत सहाय ने संभाली। उनके नेतृत्व में जिले में स्वतंत्रता आंदोलन ने नई गति पकड़ी और गांधी जी के असहयोग आंदोलन का प्रभाव गहरा हुआ।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सुल्तानपुर ने राष्ट्रव्यापी आंदोलनों में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद देश के कोने-कोने में संगठनात्मक ढांचे तैयार किए जा रहे थे, और इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में वर्ष 1921 में पहली बार जिला कांग्रेस कमेटी का गठन हुआ। उस समय देश में महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन पूरी तेजी पर था, जिसने स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया।

नेतृत्व और असहयोग आंदोलन का प्रभाव

महात्मा गांधी द्वारा 1920 में शुरू किए गए असहयोग आंदोलन के प्रभाव से पहले ही बाबू गणपत सहाय ने सुल्तानपुर से अपने समर्थकों के साथ लखनऊ अधिवेशन में हिस्सा लिया था। उसी दौर में खिलाफत कमेटी का भी उदय हुआ था। वर्ष 1921 में जब सुल्तानपुर में आधिकारिक तौर पर जिला कांग्रेस कमेटी बनी, तब बाबू गणपत सहाय को इसका पहला अध्यक्ष और रमाकांत सिंह को महामंत्री चुना गया। उनके साथ मोहम्मद नाजिम, बाबा रामलाल, अनंत बहादुर सिंह और रामजस यादव जैसे सहयोगियों ने मिलकर आंदोलन को धार दी। जिले के हसनपुर, तियरी, बैकुंठी, कादीपुर, बरवारीपुर, बहरौली, बाजार शुक्ल और बल्दीराय जैसी जगहों पर असहयोग आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिला।

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बाबू गणपत सहाय की महत्वपूर्ण भूमिका

वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह के अनुसार, सुल्तानपुर को राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाने में बाबू गणपत सहाय का योगदान अतुलनीय है। बंगाल विभाजन की घटना के पश्चात वे विपिन चंद्र पाल के संपर्क में आए और कॉलेज की अपनी नौकरी छोड़कर वकालत के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। लाल, बाल और पाल की विचारधारा से गहरे प्रभावित बाबू गणपत सहाय के कुशल नेतृत्व के कारण उन्हें जिला कांग्रेस कमेटी का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

संगठन से मिली आंदोलन को मजबूती

वर्ष 1921 में जिला कांग्रेस कमेटी के गठन से पूर्व जिले में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी गतिविधियां छिटपुट तरीके से संचालित हो रही थीं। कमेटी के गठन के बाद इन प्रयासों में सामंजस्य और एकता आई। कांग्रेस की केंद्रीय नीतियों को सुल्तानपुर में बेहतर तरीके से लागू किया जाने लगा, जिससे ब्रिटिश शासन के खिलाफ जिले में विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों की गति तीव्र हो गई और स्थानीय स्तर पर स्वतंत्रता की अलख और अधिक प्रभावशाली ढंग से जगी।

सवाल-जवाब

सुल्तानपुर में जिला कांग्रेस कमेटी का गठन कब हुआ?
सुल्तानपुर में जिला कांग्रेस कमेटी का गठन साल 1921 में हुआ था।
सुल्तानपुर जिला कांग्रेस कमेटी के पहले अध्यक्ष कौन थे?
बाबू गणपत सहाय को सुल्तानपुर जिला कांग्रेस कमेटी का पहला अध्यक्ष चुना गया था।
जिला कांग्रेस कमेटी के गठन के समय महामंत्री कौन बने?
रमाकांत सिंह को जिले की पहली कांग्रेस कमेटी का महामंत्री नियुक्त किया गया था।
बाबू गणपत सहाय किन नेताओं से प्रेरित थे?
बाबू गणपत सहाय लाल, बाल और पाल की राजनीति से गहराई से प्रेरित थे।
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