उत्तर प्रदेश के मौसम में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूरे राज्य में मानसूनी हवाओं ने दोबारा जोर पकड़ लिया है, जिससे बीते कुछ दिनों से लगातार तेज बौछारें पड़ रही हैं। नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने एक ताजा चेतावनी जारी की है। इस सूचना के मुताबिक आज भी राज्य के कई हिस्सों में बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली चमकने के साथ जोरदार बारिश होने की प्रबल संभावना है, जिसके लिए प्रशासन को पूरी तरह से सतर्क कर दिया गया है।
बारिश के ताजा आंकड़े और प्रभावित इलाके
राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में बारिश का सिलसिला सप्ताहांत से ही तेज हो गया था। रविवार शाम पांच बजे तक लखनऊ शहर में पांच मिलीमीटर तक पानी बरसा। हालांकि, ग्रामीण और तराई वाले क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा व्यापक रहा। मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो लखीमपुर खीरी में सबसे अधिक 65.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसी तरह बहराइच में 23.2 मिलीमीटर और सुल्तानपुर में 20.4 मिलीमीटर पानी गिरने से जनजीवन प्रभावित हुआ।
अन्य इलाकों की बात करें तो गोरखपुर में 8.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि आजमगढ़ और हरदोई में यह आंकड़ा क्रमशः 6.6 और 6.4 मिलीमीटर रहा। उरई के निवासियों को 5.4 मिलीमीटर बारिश का सामना करना पड़ा। इसके अलावा बाराबंकी में 3.8 मिलीमीटर, फुरसतगंज में 3.2 मिलीमीटर और मुरादाबाद में 3 मिलीमीटर पानी बरसा है। ये सटीक आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि बादलों का डेरा समूचे राज्य में किस कदर फैला हुआ है।
मौसम बिगड़ने का मुख्य कारण
इस अचानक आई मौसमी तब्दीली के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को भी स्पष्ट किया गया है। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने स्थिति की गंभीरता को समझाया है। उनके अनुसार वर्तमान में मानसून ट्रफ लाइन काफी शक्तिशाली स्थिति में आ गई है। यह मौसमी रेखा अपनी सामान्य जगह के बेहद करीब श्रीगंगानगर से होते हुए रोहतक, हरदोई, वाराणसी और रांची के रास्ते सागर द्वीप को पार करके सीधे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तक जा रही है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि इसी मजबूत मौसमी प्रणाली के कारण आगामी चौबीस घंटों के दौरान समूचे प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। कई जगहों पर सामान्य बौछारें पड़ेंगी तो कुछ स्थानों पर जलभराव वाली भीषण बारिश हो सकती है। इस अवधि में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने का भी भारी खतरा बना हुआ है। मौसम का यह उग्र रूप 22 जुलाई तक शांत होने की कोई उम्मीद नहीं है।
खतरे के निशान वाले जिलों की सूची
भारी वर्षा से होने वाले नुकसान की आशंका को देखते हुए कुल 62 जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। ऑरेंज अलर्ट के दायरे में वे इलाके हैं जहां अत्यधिक भारी वर्षा और वज्रपात का सबसे ज्यादा खौफ है। इनमें शामिल प्रमुख जिले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद और ज्योतिबा फुले नगर हैं। इसके अलावा रामपुर, संभल, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, खीरी, पीलीभीत, बहराइच तथा सीतापुर में भी खतरा है। इसी सूची में बाराबंकी, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, गोरखपुर, संतकबीरनगर, अंबेडकरनगर के साथ-साथ सुल्तानपुर, अमेठी, अयोध्या और बस्ती को भी रखा गया है।
वहीं दूसरी तरफ येलो अलर्ट वाले जिलों में भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस सूची की शुरुआत पश्चिमी और मध्य हिस्से से होती है जिसमें शामली, बागपत, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, कांशीरामनगर, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, उन्नाव, कानपुर और कानपुर देहात के नाम हैं। इसके अतिरिक्त बुंदेलखंड क्षेत्र के जालौन, झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर को शामिल किया गया है। वहीं अवध और पूर्वांचल के इलाकों जैसे लखनऊ, फतेहपुर, कौशांबी, प्रयागराज, संतरविदासनगर, चंदौली, सोनभद्र, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया, देवरिया, जौनपुर, प्रतापगढ़, अमेठी और रायबरेली में भी नागरिकों को सतर्क रहने को कहा गया है।


















