लखनऊ में बिजली विभाग के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए खंभे पर चढ़कर फॉल्ट सुधारना अब रोज़ाना जान दांव पर लगाने जैसा बन गया है। बीते डेढ़ महीने का जो लेखा-जोखा सामने आया है, वह UPPCL के सुरक्षा दावों की पोल खोल देता है। महज 49 दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बिजली से जुड़ी 56 बड़ी दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें 30 आउटसोर्सिंग बिजली कर्मचारियों की करंट लगने से मौत हो चुकी है, जबकि 26 कर्मचारी इतनी बुरी तरह झुलसे कि उनमें से कई जीवन भर के लिए अपंग हो गए। हालात इतने गंभीर हैं कि UPPCL निविदा/संविदा कर्मचारी संघ ने प्रबंधन के खिलाफ सीधी टक्कर का ऐलान कर दिया है।
संघ ने प्रबंधन को ठहराया सीधा जिम्मेदार
संविदा संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र पांडे ने लखनऊ में जारी अपने बयान में इन मौतों के लिए सीधे तौर पर UPPCL प्रबंधन को कठघरे में खड़ा किया। उनका कहना है कि सरकारी आंकड़े और मैदानी सच्चाई दोनों एक ही इशारा कर रहे हैं कि विभाग संविदाकर्मियों की जान से खेल रहा है।
पांडे के मुताबिक 49 दिनों की इस अवधि में 56 बड़े हादसे हुए, जिनमें 30 आउटसोर्सिंग लाइनमैन और बिजली कर्मियों को करंट के कारण जान गंवानी पड़ी। इसी दौरान 26 से ज़्यादा कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। करंट का झटका इतना भीषण था कि कई कर्मचारियों के हाथ-पैर काटने तक की नौबत आई और वे स्थायी रूप से विकलांग हो गए।
सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति
संघ का सबसे बड़ा आरोप सुरक्षा उपकरणों को लेकर है। पांडे ने कहा कि फील्ड पर काम करने वाले संविदाकर्मियों को ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट या आधुनिक टूलकिट जैसी बुनियादी और तकनीकी सुरक्षा तक मुहैया नहीं कराई गई है। यही वजह है कि हर छोटी चूक सीधे जानलेवा साबित हो रही है।
डेढ़ करोड़ नए उपभोक्ता, मगर 20 हज़ार कर्मचारी बाहर
इस पूरे मामले में जो प्रशासनिक विरोधाभास सामने आया है, वह सबसे ज़्यादा चौंकाता है। एक ओर उत्तर प्रदेश में बीते कुछ समय में रिकॉर्ड डेढ़ करोड़ (1.5 करोड़) नए बिजली उपभोक्ता जुड़े हैं। दूसरी ओर UPPCL ने करीब 20 हज़ार पुराने और अनुभवी संविदाकर्मियों को अचानक काम से हटा दिया।
नतीजा यह हुआ कि जो कर्मचारी बचे हैं, उन पर काम का दबाव कई गुना बढ़ गया। नियम कहता है कि फॉल्ट दुरुस्त करने वाली एक गैंग यानी टीम में कम से कम 4 कुशल कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन बजट बचाने के नाम पर अकेले एक ही कर्मचारी को खंभे पर भेज दिया जाता है। एक अकेला आदमी आखिर कितना काम संभाले, यही वजह है कि प्रदेश की जनता को भी भयंकर बिजली संकट और अघोषित कटौती झेलनी पड़ रही है।
अनुभव के बिना ही हाई-वोल्टेज लाइनों पर धकेले जा रहे लोग
देवेंद्र पांडे ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अनुभवी स्टाफ को बाहर करने के बाद प्रबंधन अब पूरी तरह अकुशल और अयोग्य श्रमिकों से खतरनाक हाई-वोल्टेज लाइनों का काम करवा रहा है। जिन लोगों को शटडाउन लेने, अर्थिंग जांचने या ग्रिड की बारीकियों का कोई अनुभव ही नहीं है, उन्हें सीधे जोखिम भरे काम में झोंक दिया जा रहा है। संघ का कहना है कि इसी घोर लापरवाही के चलते मौतों का आंकड़ा रोज़ बढ़ रहा है, और यह प्रबंधन की तानाशाही तथा मजदूर विरोधी नीति का नतीजा है।
संघ का अल्टीमेटम और शक्ति भवन घेराव की चेतावनी
संघ ने प्रबंधन को साफ चेतावनी दी है। उसका कहना है कि अगर UPPCL ने अपनी तानाशाही नीतियां तुरंत बंद नहीं कीं और बढ़े हुए उपभोक्ताओं के अनुपात में योग्य व प्रशिक्षित संविदाकर्मियों की नई भर्ती नहीं की, तो पूरे उत्तर प्रदेश के संविदाकर्मी काम बंद कर देंगे। संघ के अनुसार जल्द ही लखनऊ स्थित शक्ति भवन का घेराव कर एक ऐतिहासिक और आर-पार का महा-आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।













