अयोध्या में 7 नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव से पहले सरयू तट के धार्मिक स्थलों को भव्य स्वरूप देने की तैयारियां जोरों पर हैं। राम की पैड़ी सहित नदी के तमाम प्रमुख घाटों के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में पहुंचाया जा रहा है। इस पूरी परियोजना का दायरा दैनिक आरती स्थल से शुरू होकर ऐतिहासिक गुप्तार घाट तक फैला हुआ है। उत्सव के अवसर पर रामनगरी पहुंचने वाले लाखों दर्शनार्थियों और स्थानीय निवासियों के लिए ये संवरे हुए तट आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र साबित होंगे।
पौराणिक पहचान और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय
तटवर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को सुधारते समय अयोध्या के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को केंद्र में रखा गया है। निर्माण कार्य के दौरान घाटों पर पारंपरिक छतरियां, नक्काशीदार जालियां और विशिष्ट स्थापत्य कलाकृतियां स्थापित की जा रही हैं। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि पवित्र नदी में स्नान करने और पूजन अनुष्ठान संपन्न करने आने वाले लोगों को प्राचीन विरासत की सजीव अनुभूति हो सके। विकास योजनाओं को इस ढंग से लागू किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं भी मिलें और क्षेत्र का पौराणिक स्वरूप भी पूरी तरह अक्षुण्ण बना रहे।
महापौर ने बताया सांस्कृतिक संरक्षण का रोडमैप
अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी के अनुसार, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान शहर की पारंपरिक संस्कृति को दिव्यता और भव्यता प्रदान करने वाला एक अभूतपूर्व कदम है। उन्होंने जानकारी दी कि घाटों के बुनियादी ढांचे में खूबसूरत छतरियों और जालियों का संयोजन इसी सोच के तहत किया गया है। निर्माण का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल स्नान का अवसर ही न मिले, बल्कि एक अलौकिक और यादगार आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त हो सके।
त्रेतायुग के वैभव को दर्शाती निर्माण शैली
वास्तुकला और डिजाइन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण निर्माण शैली में त्रेतायुगीन अयोध्या की आभा दर्शाने का पूरा प्रयास किया गया है। घाटों का वातावरण ऐसा तैयार किया जा रहा है जिससे श्रद्धालु कदम रखते ही खुद को शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक जड़ों से जुड़ा हुआ महसूस करें। तटों का बदलता हुआ स्वरूप नगरी के समग्र विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है। दीपोत्सव के मुख्य पर्व पर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी भारी तादाद में श्रद्धालु पहुंचेंगे, जिनके स्वागत के लिए ये सुसज्जित घाट पूरी तरह तैयार किए जा रहे हैं।



















