कानपुर के प्रसिद्ध चौक सर्राफा बाजार में कम शुद्धता वाले सोने के आभूषणों पर लेजर मशीन से हूबहू हॉलमार्क जैसा निशान बनाकर बेचने और गिरवी रखने के गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। फीलखाना थाना क्षेत्र में सामने आई इस घटना में पुलिस ने मौके से लेजर कटिंग मशीन को अपने कब्जे में ले लिया है। इस फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
ज्वेलर्स की दुकान पर जब जांच में खुली पोल
इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक महिला फीलखाना इलाके में स्थित एक ज्वेलर्स की दुकान पर अपने सोने के जेवर बेचने पहुंची। सुनार ने जब सोने की शुद्धता परखने के लिए आभूषणों की बारीकी से जांच की, तो पता चला कि उनमें सोने की मात्रा काफी कम थी। इसके बावजूद उन जेवरों पर आधिकारिक हॉलमार्क जैसा दिखने वाला निशान छपा हुआ था। शक गहराने पर ज्वेलर्स ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब मामले की पड़ताल की, तो पता चला कि यह साधारण मिलावट का मामला नहीं बल्कि संगठित तरीके से सरकारी निशान की नकल कर ग्राहकों को चूना लगाने का खेल था। पूछताछ में सामने आया कि अक्षय गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने महिला को ये आभूषण दिए थे। इन कम शुद्धता वाले जेवरों के बदले अक्षय गुप्ता ने महिला से 40 हजार रुपये की रकम ली थी।
चौक सर्राफा की दुकान में चल रहा था लेजर का खेल
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि चौक सर्राफा क्षेत्र में स्थित दिनेश वर्मा की दुकान पर लेजर कटिंग मशीन का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी उपकरण के जरिए कम कैरेट वाले हल्के सोने के आभूषणों पर फर्जी हॉलमार्क उकेरा जा रहा था, ताकि वे बाजार में सामान्य खरीदारों को पूरी तरह खरे और अधिक कैरेट के दिखें।
आरोप है कि इस तरीके का इस्तेमाल कम शुद्धता वाले सोने को अधिक कैरेट का बताकर खुले बाजार में खपाने और वित्तीय संस्थानों या लोगों के पास गिरवी रखने के लिए किया जा रहा था। किसी भी सोने के आभूषण पर हॉलमार्क इसलिए लगाया जाता है ताकि आम खरीदार को उसकी शुद्धता की पुख्ता और आधिकारिक गारंटी मिल सके। जब कम कैरेट वाले जेवर पर लेजर तकनीक से फर्जी मुहर लगा दी जाती है, तो आम ग्राहकों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है और पूरे सर्राफा कारोबार की साख पर गहरा असर पड़ता है।
मशीन जब्त कर नेटवर्क की पड़ताल में जुटी पुलिस
कानून व्यवस्था की टीम ने कार्रवाई करते हुए फर्जी हॉलमार्क बनाने के काम में लाई जा रही लेजर कटिंग मशीन को जब्त कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दर्ज प्राथमिकी के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान पूरी हो चुकी है। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस मशीन से अब तक कितने गहनों पर फर्जी निशान बनाए जा चुके थे और इस खेल के जरिए कितने खरीदारों को निशाना बनाया गया है। आभूषणों की वास्तविक शुद्धता की जांच के साथ पूरे सिंडिकेट पर सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।



















