राज्य सरकार ने स्थानीय युवाओं को वैश्विक कार्यबल की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को विधिवत मंजूरी दे दी गई। इस नए नीतिगत कदम का मुख्य ध्येय राज्य को कुशल कार्यबल का एक ऐसा प्रमुख केंद्र बनाना है, जहां से देश के अन्य प्रांतों के साथ-साथ विदेशी बाजारों की जरूरतों को भी पूरा किया जा सके। पूरी प्रशासनिक मशीनरी राज्य के सभी 75 जनपदों को नौ अलग-अलग जोन में संगठित करके एक समन्वित ट्रेनिंग व प्लेसमेंट ढांचा खड़ा करने की दिशा में काम करेगी।
लघु और मध्यम उद्योगों की रीढ़ को मजबूत करने की पहल
प्रांतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का योगदान अत्यंत व्यापक है। समूचे भारत में मौजूद लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों में से 14.2 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले इसी राज्य के पास है, जहां तकरीबन 96 लाख इकाइयां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। यह क्षेत्र राज्य के समग्र औद्योगिक निर्माण में करीब 60 प्रतिशत की भागीदारी निभाता है, जबकि कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंचती है। वर्तमान में तीन करोड़ से भी अधिक नागरिक इस सेक्टर के सहारे अपनी आजीविका चला रहे हैं। आधुनिक उत्पादन तंत्र में प्रशिक्षित कर्मियों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ही इस नई व्यवस्था का सूत्रपात किया गया है, ताकि युवाओं को व्यावहारिक हुनर सिखाकर सीधे कारखानों और कॉर्पोरेट जगत की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सके।
हब एवं स्पोक पद्धति पर आधारित नौ संभागीय जोन
प्रशिक्षण तंत्र को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए हब एवं स्पोक मॉडल अपनाया जाएगा। इसके जरिए प्रत्येक इलाके की विशिष्ट औद्योगिक विशेषताओं, क्षेत्रीय वाणिज्यिक गतिविधियों और बाजार में मौजूद रोजगार की संभावनाओं का बारीक विश्लेषण करके पाठ्यक्रम तय किए जाएंगे। विभिन्न कॉरपोरेट घरानों, सरकारी महकमों और सेवा क्षेत्रों की जरूरतों का पूर्व आकलन करके रिक्तियों के अनुसार मानव संसाधन तैयार किया जाएगा। शुरुआती दौर में पांच प्रमुख औद्योगिक केंद्रों पर बड़े प्रशिक्षण कॉम्प्लेक्स विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
शुरुआती चरण के केंद्रों का आवंटन विभिन्न सरकारी व औद्योगिक प्राधिकरणों के बीच किया गया है। राजधानी लखनऊ में यह जिम्मेदारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग संभालेगा। औद्योगिक नगर कानपुर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत परिसर खड़ा होगा। गोरखपुर में गीडा यानी गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण इसका निर्माण कराएगा। पश्चिमी हिस्से में गौतमबुद्ध नगर जिले के भीतर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा का संयुक्त तंत्र मिलकर केंद्र स्थापित करेगा। इसी क्रम में बुंदेलखंड इलाके के लिए बीडा यानी बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण झांसी में आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र तैयार करेगा।
प्रशासनिक निगरानी और कार्य संचालन को सुगम बनाने के लिए पूरे राज्य को निम्नलिखित नौ जोनों में वर्गीकृत किया गया है
- गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़ को मिलाकर जोन संख्या एक का गठन किया गया है।
- सहारनपुर मंडल के साथ मेरठ, बागपत और बुलंदशहर को जोन संख्या दो के तहत रखा गया है।
- मुरादाबाद तथा बरेली के पूरे प्रशासनिक मंडलों को जोन संख्या तीन में शामिल किया गया है।
- पश्चिमी व ब्रज क्षेत्र के आगरा और अलीगढ़ मंडलों को जोन संख्या चार में जगह मिली है।
- राजधानी क्षेत्र के लखनऊ और अयोध्या मंडलों को मिलाकर जोन संख्या पांच बनाया गया है।
- मध्य और पूर्वी पट्टी के कानपुर तथा प्रयागराज मंडलों को जोन संख्या छह में रखा गया है।
- दक्षिणी पठारी इलाके के चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी मंडलों को जोन संख्या सात में समेटा गया है।
- पूर्वांचल के वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडलों को संयुक्त रूप से जोन संख्या आठ का रूप दिया गया है।
- गोरखपुर, बस्ती तथा देवीपाटन मंडलों के जनपदों को जोन संख्या नौ के अंतर्गत शामिल किया गया है।
विशाल भूखंडों पर आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण
परियोजना के तहत बनने वाले हर केंद्र के लिए 10 से 25 एकड़ तक की कानूनी अड़चनों से मुक्त जमीन चिन्हित की जाएगी। इन परिसरों तक प्रशिक्षुओं, शिक्षकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के निर्बाध आवागमन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी क्रम में यह अनिवार्य किया गया है कि नजदीकी हाईवे या एक्सप्रेसवे से इन केंद्रों तक अगले दो वर्षों के भीतर चार लेन की पक्की संपर्क सड़क तैयार की जाए। निर्माण और प्रबंधन के लिए निजी सहभागिता के तहत डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर यानी डीबीएफओटी मॉडल अथवा शासकीय एजेंसियों की सीधी निगरानी का रास्ता चुना जाएगा।
भाषा ज्ञान, इंजीनियरिंग हुनर और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा
यह योजना केवल पारंपरिक तकनीकी डिग्री धारकों तक सीमित नहीं रहेगी। कला, मानविकी और वाणिज्य विषयों से स्नातक करने वाले युवाओं को भी बुनियादी रोजगारोन्मुखी हुनर सिखाए जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राओं के व्यावहारिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के अनुरूप अपग्रेड किया जाएगा। जो युवा विदेश में काम करने के इच्छुक हैं या देश के अन्य राज्यों में सेवा देना चाहते हैं, उन्हें मांग के अनुसार चुनिंदा भारतीय बोलियों और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
दूरदराज के इलाकों से आने वाले शिक्षार्थियों के लिए इन परिसरों में व्यवस्थित हॉस्टल बनाए जाएंगे। युवाओं को रोजगार हासिल करने में किसी बिचौलिए पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए परिसर के भीतर ही समर्पित रोजगार दफ्तर और प्लेसमेंट सेल काम करेंगे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैनपावर हायरिंग करने वाली मान्यता प्राप्त शीर्ष रिक्रूटमेंट फर्मों से तालमेल बिठाकर पासआउट युवाओं को सीधे नौकरी के ऑफर दिलाए जाएंगे।
1,725 करोड़ का बजट और तकनीकी निगरानी प्रणाली
अगले तीन वर्षों की समयसीमा में इस समूचे ढांचे को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने 1,725 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय निर्धारित किया है। निजी क्षेत्र के निवेशकों और प्रशिक्षण प्रदाताओं को वित्तीय जोखिम से बचाने के लिए आवश्यकता पड़ने पर वायबिलिटी गैप फंडिंग यानी वीजीएफ का प्रावधान भी रखा गया है।
योजना के कामकाज में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र बनेगा, जो राज्य, जिला और प्रोजेक्ट स्तर पर काम करेगा। यह व्यवस्था प्रशिक्षण की गुणवत्ता, धन के सही उपयोग और युवाओं के वास्तविक रोजगार आंकड़ों का लगातार ऑडिट करेगी। पूरी प्रक्रिया को अत्याधुनिक बनाने के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड तैयार होगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई और उन्नत डेटा एनालिटिक्स की मदद से श्रम बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए एक कुशल तकनीकी पार्टनर को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।























