उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हजारों कर्मियों और डॉक्टरों ने गुरुवार से अपना कामकाज ठप कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। लगातार तीन माह से वेतन का भुगतान न होने की वजह से कर्मियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसी समस्या से आक्रोशित होकर जिले भर के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय परिसर में एकत्र होकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
वेतन संकट और आर्थिक तंगी का सामना
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि तीन महीने से मानदेय न मिलने के चलते उनके परिवारों का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम के तहत कार्यरत संविदा कर्मी लंबे समय से नाममात्र के मानदेय पर काम कर रहे हैं। आंदोलन में शामिल डॉक्टर दयाशंकर, सोनम सिसोदिया और रश्मि सेंगर ने अपनी व्यथा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वे हर आपात स्थिति में मरीजों की देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं। मात्र ₹10000 के मासिक वेतन में आज के दौर में घर चलाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि सरकारी चिकित्सकों और कर्मचारियों की तरह उन्हें भी उचित वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ हैं संविदा कर्मी
उत्तर प्रदेश में एनएचएम के तहत लगभग 1 लाख संविदा कर्मी पिछले 15 से 18 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्य रीढ़ बने हुए हैं। कोरोना महामारी जैसी जानलेवा आपदा के दौरान भी इन कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार अपनी सेवाएं दी थीं। कर्मचारियों ने साफ किया कि उनका मकसद सरकार का अकारण विरोध करना नहीं है, बल्कि वे केवल अपने वाजिब हक और काम के बदले सम्मानजनक पारिश्रमिक की मांग कर रहे हैं। उनका यह धरना गुरुवार से शुरू होकर 12 अक्टूबर तक जारी रहने का कार्यक्रम है।
प्रमुख 6 सूत्रीय मांगें
कर्मचारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का खाका तैयार किया है। इन मांगों में प्रमुख रूप से स्वास्थ्य विभाग में सभी एनएचएम संविदा कर्मियों का नियमितीकरण शामिल है। इसके अलावा समान कार्य के लिए समान वेतन का नियम लागू करने और सम्मानजनक वेतन वृद्धि की मांग उठाई गई है।
कर्मियों की अन्य मांगों में ₹10 लाख का कैशलेस फैमिली हेल्थ बीमा, महंगाई भत्ता (DA), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), मकान किराया भत्ता (HRA), ग्रेच्युटी और राजकीय आवास की सुविधा प्रदान करना शामिल है। साथ ही पारस्परिक स्थानांतरण (Mutual Transfer) सहित गैर जनपद स्थानांतरण नीति बनाने, सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति देने, और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ MCTS, IDSP, HMIS तथा कोविड स्टाफ को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करने की मांग की गई है। इसके अलावा नियमित भर्तियों में संविदा कर्मियों के लिए 25% आरक्षण देने का प्रावधान करने की बात भी कही गई है।
चरणबद्ध आंदोलन और लखनऊ कूच की योजना
तय कार्यक्रम के अनुसार 8, 9 और 10 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण तरीके से कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो 12 अक्टूबर 2026 को पूरे प्रदेश के लाखों संविदा कर्मी लखनऊ कूच करेंगे और मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे।



















