उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और जनसुविधाओं को दुरुस्त रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने व्यापक समीक्षा अभियान चलाया है। लखनऊ स्थित 5 कालिदास मार्ग पर स्थित अपने आधिकारिक निवास से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में प्रदेश के सभी प्रमुख प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ विभिन्न जनपदों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समीक्षा के दौरान मुख्य रूप से कांवड़ यात्रा के निर्विघ्न संचालन, आगामी धार्मिक पर्वों की तैयारियों, महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर कठोर रोकथाम, प्रदेश में उर्वरकों की पारदर्शी आपूर्ति, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत अभियानों तथा स्कूली वाहनों की यांत्रिक फिटनेस जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए।
कांवड़ यात्रा में अराजकता पर जीरो टॉलरेंस और सामाजिक समरसता की मिसाल
धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और शांति बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए यह स्पष्ट किया गया कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता का महान प्रतीक है। इस पावन अवसर पर किसी भी प्रकार की अराजकता, हुड़दंग या माहौल बिगाड़ने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपद्रवियों और शरारती तत्वों से निपटने के लिए प्रशासन को जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलाई जाने वाली भ्रामक और असत्य अफवाहों का समय रहते तथ्यात्मक खंडन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी असमाजिक तत्व शांति व्यवस्था में बाधा न डाल सके। वर्तमान समय में जातीय विद्वेष भड़काने के प्रयासों के विपरीत लाखों श्रद्धालुओं की इस अनुशासित भागीदारी को समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया गया, जिसमें सरकारी तंत्र के साथ साथ विभिन्न सामाजिक और स्वयंसेवी संगठन भी निष्काम भाव से सेवा में लगे हुए हैं।
सीमावर्ती राज्यों से समन्वय और बरेली में आपसी सौहार्द की सराहना
कानून व्यवस्था और सुरक्षा तैयारियों के व्यावहारिक पहलुओं का विवरण देते हुए मेरठ के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) ने जानकारी दी कि पड़ोसी राज्यों के पुलिस प्रशासन के साथ बेहतर अंतरराज्यीय समन्वय स्थापित किया गया है। वहीं गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त ने अवगत कराया कि अब तक लगभग 70 हजार कांवड़ यात्री गाजियाबाद जनपद की सीमाओं से सुरक्षित गुजर चुके हैं। आने वाले एक दो दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि होने का अनुमान है, जिसके लिए पुलिस और स्वयंसेवकों की चौकस तैनाती की गई है। इसके अतिरिक्त बरेली जनपद का विशेष रूप से उल्लेख किया गया जहां कांवड़ यात्रा और आला हजरत उर्स का आयोजन एक साथ हो रहा है। यहां मुस्लिम समुदाय द्वारा शिवभक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उर्स के कार्यक्रम को सीमित दायरे में रखने और आगंतुकों के लिए केवल शाकाहारी भोजन वितरण की पहल की गई है। इस व्यवहार को पारस्परिक सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक सद्भाव का अनुकरणीय उदाहरण माना गया।
किसानों के लिए खाद की उपलब्धता और कालाबाजारी रोकने के उपाय
प्रदेश के कृषि क्षेत्र और किसानों की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए यूरिया, डीएपी तथा अन्य रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति स्थिति का जायजा लिया गया। समीक्षा में स्पष्ट किया गया कि राज्य में खाद का कोई संकट नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। मुख्य चुनौती वितरण प्रणाली को पारदर्शी, सुचारू और न्यायसंगत बनाए रखने की है। सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) पर भीड़ नियंत्रण और सुगम वितरण हेतु आवश्यकतानुसार अतिरिक्त मानवबल की तैनाती की जाए। किसी भी दशा में उर्वरकों की कालाबाजारी या जमाखोरी न होने पाए। खाद का वितरण खतौनी के अनिवार्य सत्यापन के पश्चात ही किया जाएगा। विशेष रूप से नेपाल सीमा से सटे सीमावर्ती जिलों में खाद की तस्करी रोकने के लिए गहन निगरानी रखने की हिदायत दी गई है।
महिला सुरक्षा के लिए 'मिशन शक्ति' और 45 हजार महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती
महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए यह दोहराया गया कि महिला सुरक्षा सरकार की स्थापना के पहले दिन से ही सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। हाल की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासनों को निर्देश दिए गए कि ऐसे मामलों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य में संचालित 'मिशन शक्ति' अभियान को धरातल पर और अधिक आक्रामक तथा प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। उत्तर प्रदेश पुलिस बल में वर्तमान में 45 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मी सेवा में हैं, जिनकी उपस्थिति को संवेदनशील स्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और बाजारों में सुनिश्चित किया जाएगा। मनचलों, टप्पेबाजों और उपद्रवियों की पहचान सार्वजनिक करने के साथ-साथ पुलिस गश्त बढ़ाने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
बाढ़ राहत कार्य और नदियों के तटबंधों की कटान पर तात्कालिक कदम
प्रदेश के प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेते हुए बलिया, बाराबंकी और उन्नाव समेत बाढ़ प्रभावित 8 जनपदों के जिलाधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट ली गई। निर्देश दिए गए कि जलभराव या पानी से घिरे (मैरुण्ड) गांवों के निवासियों तक खाद्य सामग्री, पेयजल, दवाएं और नौकाएं तत्काल पहुंचाई जाएं। राहत सामग्री वितरण में कोई ढिलाई न हो। इसके अलावा सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, कुशीनगर, मुजफ्फरनगर और बलिया जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर से तटबंधों की कटान को रोकने के लिए तुरंत इंजिनियरिंग उपाय करने को कहा गया। बलिया में कटान के कारण बेघर हुए परिवारों को तुरंत भूमि पट्टा और आवास सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए। राहत आयुक्त ने अवगत कराया कि आगामी सप्ताह में राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी वर्षा की संभावना है, जिसके मद्देनजर सभी विभागों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच और युवाओं के लिए आगामी 'युवा नीति'
सड़क सुरक्षा और विद्यार्थियों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्कूली वाहनों, टैक्सी और ई-रिक्शा चालकों के अनिवार्य सत्यापन के निर्देश दिए गए। केवल वही वाहन सड़कों पर संचालित किए जा सकेंगे जो निर्धारित फिटनेस मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हों। वाहनों की यांत्रिक स्थिति में किसी भी प्रकार का समझौता बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ माना जाएगा। बैठक के अंत में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ युवाओं के सर्वांगीण विकास पर भी बल दिया गया। सरकार जल्द ही प्रदेश के नौजवानों की आकांक्षाओं, रोजगार और कौशल विकास को ध्यान में रखते हुए एक समर्पित 'युवा नीति' लागू करने की योजना बना रही है, जिसके लिए अधिकारियों को युवाओं की वास्तविक जरूरतों का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव गृह, राहत आयुक्त समेत सभी मंडलायुक्त और पुलिस कप्तान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े रहे।



















