उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में कानपुर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया, जिसमें माफिया से नेता बने अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद और उनके एक साथी की दर्दनाक मौत हो गई। दुर्घटनास्थल पर एक तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकराकर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पाई गई। सड़क पर पड़े दो युवकों के शव और दर्द से कराहते तीन घायलों को देखकर शुरुआत में मौके पर मौजूद लोगों या पुलिस टीम को इस बात की तनिक भी जानकारी नहीं थी कि मृतकों में अतीक अहमद का बेटा शामिल है। हादसे के वक्त कार में कुल पांच लोग सवार थे, जो प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन के अंदर से बरामद हुए एक शादी के कार्ड के जरिए पूरी घटना की परतें खोलीं और मृतकों तथा घायलों की आधिकारिक पहचान स्थापित की।
झांसी-कानपुर मार्ग पर भीषण दुर्घटना और राहत कार्य
झांसी जिले के पूंछ थाना क्षेत्र अंतर्गत कानपुर-झांसी मार्ग पर गुरुवार की सुबह करीब 10:30 बजे पुलिस को हादसे की सूचना प्राप्त हुई। स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने देखा कि एक तेज गति से आ रही क्रेटा कार अचानक अपना संतुलन खो बैठी और सड़क के बीच बने सीमेंट के डिवाइडर से जोरदार तरीके से जा टकराई। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से पिचक गया, विंडशील्ड के परखच्चे उड़ गए और वाहन के दरवाजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पूंछ थाने की पुलिस टीम एम्बुलेंस के साथ तत्काल मौके पर पहुंची।
बचाव दल ने स्थानीय लोगों की सहायता से कार में फंसे और सड़क पर बिखरे लोगों को बाहर निकाला। मौके पर दो युवकों की मौत हो चुकी थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल थे। घायलों की नाजुक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने बिना समय गंवाए उन्हें इलाज के लिए नजदीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज भिजवाया। दुर्घटनाग्रस्त वाहन की स्थिति को देखकर वहां मौजूद हर कोई स्तब्ध था, परंतु उस समय तक मृत पड़े युवकों और घायलों की असल पहचान किसी के सामने नहीं आ सकी थी।
सड़क पर पड़ा था अबान का शव, पहचान बनी बड़ी चुनौती
दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और पुलिस अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि कार सवार लोग कौन हैं और वे कहां से आ रहे थे। अबान अहमद सड़क पर बेहद गंभीर हालत में पड़ा हुआ था, लेकिन उसके कपड़ों या जेबों से कोई ऐसा पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं मिला जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। स्थानीय लोगों के लिए यह एक सामान्य किंतु अत्यंत गंभीर हाईवे दुर्घटना जैसी स्थिति थी।
पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचाए जा रहे घायलों से बात करके उनकी पहचान जानने का प्रयास किया। हालांकि, अत्यधिक दर्द और मानसिक सदमे के कारण घायल युवक अपनी पूरी जानकारी देने में असमर्थ थे। वे बार-बार केवल एक ही वाक्य दोहरा रहे थे, 'भाई कैसे हैं?' घायलों द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जा रहे 'भाई' शब्द ने पुलिस प्रशासन के समक्ष नई उलझन खड़ी कर दी। पुलिस यह समझ नहीं पा रही थी कि घायल युवक अपने किस साथी या रिश्तेदार के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। इस एक शब्द के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं था।
चार मोबाइल फोन और शादी के कार्ड से सुलझी गुत्थी
दुर्घटनाग्रस्त क्रेटा कार की अंदरूनी तलाशी के दौरान पुलिस को चार मोबाइल फोन मिले। सामान्य परिस्थितियों में मोबाइल फोन के माध्यम से परिजनों या परिचितों से तुरंत संपर्क स्थापित किया जा सकता है। परंतु इस हादसे के बाद बरामद हुए मोबाइल फोन लॉक थे, क्षतिग्रस्त हो चुके थे या फिर उनसे संपर्क साध पाना तत्काल संभव नहीं हो पा रहा था। इस वजह से शुरुआती घंटों में पुलिस की तफ्तीश आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
पहचान का सुराग खोजने के उद्देश्य से जब पुलिस टीम ने कार के भीतर रखे अन्य सामानों की गहराई से जांच की, तब उनके हाथ एक शादी का निमंत्रण पत्र (शादी का कार्ड) लगा। इस कार्ड पर स्पष्ट अक्षरों में 'मोहम्मद जैद' का नाम दर्ज था। शादी के कार्ड पर लिखे इस नाम और उससे जुड़े संपर्क नंबरों के आधार पर पुलिस ने संभावित परिचितों को फोन करना शुरू किया। कुछ ही देर में फोन पर बातचीत के जरिए कार में सवार सभी व्यक्तियों की विस्तृत जानकारी सामने आ गई। इसके बाद यह साफ हुआ कि मोहम्मद जैद ही कार चला रहा था, और फिर एक-एक करके पुलिस की टीम अतीक अहमद के परिजनों तक पहुंच गई।
कार में सवार लोगों की स्थिति और बैठने की व्यवस्था
प्राप्त विवरण के अनुसार, दुर्घटना के समय मोहम्मद जैद कार की ड्राइविंग सीट पर मौजूद था और वही वाहन चला रहा था। अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा अबान अहमद आगे की पैसेंजर सीट यानी चालक के ठीक बगल वाली सीट पर बैठा हुआ था। हादसे में जान गंवाने वाला दूसरा युवक पीछे की सीट पर बैठा हुआ था, जिसकी पहचान सोनू उर्फ मोहम्मद शाकिर के रूप में हुई। पुलिस रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के माध्यम से सोनू के पूरे नाम की अंतिम पुष्टि की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कार की पिछली सीट पर दो अन्य युवक भी सवार थे, जिनके नाम मोहम्मद उमर और असलम बताए गए हैं। ये दोनों हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। अस्पताल में भर्ती घायल मोहम्मद उमर ने बाद में शुरुआती पूछताछ में बताया कि कार की गति बहुत अधिक थी। तेज रफ्तार होने के कारण चालक अचानक वाहन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा, जिसके बाद कार बेकाबू होकर सीधे सीमेंट के डिवाइडर से जा टकराई और यह बड़ा हादसा घटित हो गया।
झांसी जेल में बंद भाई अली अहमद से मिलने जा रहे थे युवक
तफ्तीश के दौरान यह बात भी साफ हो गई कि कार में सवार सभी पांचों लोग प्रयागराज से अपनी यात्रा शुरू करके झांसी की ओर आ रहे थे। अबान अहमद अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करने के लिए झांसी जेल जा रहा था, जहां अली अहमद वर्तमान में निरुद्ध है। प्रयागराज से निकला यह समूह झांसी शहर पहुंचने से कुछ ही दूरी पहले पूंछ थाना क्षेत्र में इस भीषण हादसे का शिकार हो गया।
पुलिस की शुरुआती जांच में भी यही निष्कर्ष निकला है कि ओवरस्पीडिंग यानी अत्यधिक तेज रफ्तार ही इस हादसे की मुख्य वजह बनी। तेज गति के कारण वाहन अनियंत्रित हुआ और सीमेंट के डिवाइडर से टकराकर चकनाचूर हो गया। इस तरह शादी के कार्ड पर लिखे एक नाम मोहम्मद जैद ने पुलिस को उस उलझन से निकाला और सड़क पर अतीक अहमद के बेटे की पहचान को उजागर किया।



















