पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले 48 घंटों के दौरान राज्य के मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला लगातार बना हुआ है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन ने आम जनता के लिए आवागमन को बेहद खतरनाक बना दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 21 अगस्त 2026 के लिए एक ताजा चेतावनी जारी करते हुए राज्य के पांच प्रमुख पर्वतीय जिलों में भारी बारिश की आशंका व्यक्त की है। विभाग की ओर से देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, टिहरी गढ़वाल और पिथौरागढ़ जिलों के लिए पीला (येलो) अलर्ट घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और अत्यंत तीव्र बारिश के दौर चलने की गंभीर संभावना जताई गई है। पर्वतीय इलाकों में लगातार पानी बरसने से संवेदनशील पहाड़ियों के दरकने का जोखिम बढ़ गया है और प्रमुख नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मारवाड़ी पुल के पास धंसाव और लामबगड़ में मार्ग अवरुद्ध
राज्य के सीमांत जिले चमोली में बारिश के बाद नदियां रौद्र रूप धारण कर चुकी हैं। अलकनंदा नदी और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय इलाकों में तेजी से कटाव शुरू हो गया है। इस भू-कटाव के कारण सड़कों को सहारा देने वाली सुरक्षा दीवारें कमजोर होकर खिसकने लगी हैं। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मारवाड़ी पुल के निकट सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया है, जिससे इस प्रमुख मार्ग पर यातायात के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। इसके साथ ही, लामबगड़ क्षेत्र में पहाड़ी ढलानों से विशालकाय पत्थरों के साथ मलबे का बड़ा ढेर और कई पेड़ टूटकर सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गिरे। इस कारण बदरीनाथ की ओर जाने वाला यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं।
उधम सिंह नगर में भारी बारिश की चेतावनी के बाद कक्षा 12 तक के सभी संस्थान बंद
मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के मद्देनजर मैदानी जिले उधम सिंह नगर के स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से प्राप्त दिशा-निर्देशों के आधार पर जिलाधिकारी ने 21 अगस्त 2026 को जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया है। इस फैसले के तहत कक्षा 1 से 12 तक के समस्त सरकारी, गैर-सरकारी और निजी संचालित विद्यालयों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को भी एक दिन के लिए पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को उफनते नालों, जलभराव और खराब मौसम की वजह से होने वाली किसी भी संभावित अप्रिय घटना या दुर्घटना से सुरक्षित रखना है।
बागेश्वर के कपकोट क्षेत्र में 11 सड़कें ध्वस्त, 36 से अधिक गांवों का संपर्क कटा
कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिले में लगातार हो रही बरसात के कारण स्थिति अत्यधिक चिंताजनक रूप ले चुकी है। पहाड़ों की मिट्टी में पानी का रिसाव अधिक होने से चट्टानों की पकड़ कमजोर पड़ गई है, जिससे जगह-जगह भूस्खलन और भारी पत्थरों के गिरने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। जिले का कपकोट तहसील क्षेत्र इस प्राकृतिक प्रकोप से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। कपकोट के आसपास की पहाड़ियों से भारी मलबा और बोल्डर गिरने के कारण मुख्य मार्गों को जोड़ने वाली 11 ग्रामीण सड़कें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इन रास्तों के अवरुद्ध होने से क्षेत्र के 36 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय और मुख्य कस्बों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ग्रामीण इलाकों में दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बन गया है और मरीज या बुजुर्गों को मुख्य अस्पताल तक ले जाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
राजधानी देहरादून और टिहरी गढ़वाल में जलभराव एवं भूस्खलन की गंभीर आशंका
मौसम विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को राजधानी देहरादून और आसपास के इलाकों में आकाशीय बिजली चमकने के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। देहरादून शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की पूरी संभावना है, जिससे सड़कों पर यातायात धीमा हो सकता है। इसके अतिरिक्त, देहरादून जिले के प्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, ऋषिकेश और चकराता को जोड़ने वाले पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन की आशंका जताई गई है। उधर, टिहरी जिले में पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले निवासियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले ग्रामीणों को उफनते जलधाराओं से दूर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान दोनों जिलों में तापमान सामान्य स्तर पर ही दर्ज किया गया, हालांकि हवा में अत्यधिक नमी और बादलों के जमावड़े के कारण उमस और ठंडक का मिलाजुला प्रभाव देखा जा रहा है।
ऋषिकेश में उफान पर गंगा और चंद्रभागा नदी, सुरक्षा के लिए जल पुलिस व एसडीआरएफ तैनात
प्रसिद्ध तीर्थनगरी ऋषिकेश और उसके समीपवर्ती क्षेत्रों में हो रही वर्षा के कारण गंगा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। गंगा की सहायक नदियां और पहाड़ी नाले पूरे वेग के साथ बह रहे हैं। ऋषिकेश शहर को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाले चंद्रभागा पुल के पास सड़क की स्थिति काफी जर्जर हो गई है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से वे छोटे तालाबों जैसे दिखाई दे रहे हैं। इन गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई स्थानों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश के प्रमुख गंगा घाटों पर जल पुलिस और एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीमों को मुस्तैद कर दिया गया है ताकि कोई भी श्रद्धालु गलती से गहरे पानी की तरफ न जा सके।
नैनीताल व पिथौरागढ़ में यात्रा पर असर, मौसम विभाग ने जारी किया 5 दिवसीय पूर्वानुमान
कुमाऊं मंडल के पर्वतीय जिलों नैनीताल और सीमांत पिथौरागढ़ के लिए भी 21 अगस्त 2026 को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। नैनीताल की संवेदनशील ढलानों और पिथौरागढ़ के सुदूर सीमांत मार्गों पर मलबा आने से यातायात रुकने का खतरा बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने अपने 5 दिवसीय मौसम पूर्वानुमान में बताया है कि संपूर्ण उत्तराखंड में मानसून की गतिविधियां आने वाले दिनों में भी इसी तरह जारी रहेंगी। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वाले यात्री और श्रद्धालु मौसम की अद्यतन जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और जोखिम भरे रास्तों पर जाने से बचें।



















