पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही महिलाओं के पहनावे और श्रृंगार में मौसम के रंग साफ तौर पर झलकने लगे हैं। हरे, गुलाबी और रानी जैसे चमकीले रंगों के बीच साड़ियों के बाजार में पारंपरिक लहरिया का क्रेज एक बार फिर सिर चढ़कर बोल रहा है। यूं तो मार्केट में लहरिया की अनगिनत वैरायटी और नए पैटर्न मौजूद हैं, लेकिन इनमें एक ऐसा खास डिजाइन है जिसकी साख और पहचान आज भी कायम है और वह है मोठड़ा लहरिया।
पुराने दौर का अंदाज लौटा बाजार में
एक समय में घर-घर में लोकप्रिय रहा मोठड़ा लहरिया अब आधुनिक फैशन दौर में नए कलेवर के साथ लौट आया है। स्थानीय साड़ी कारोबारियों के अनुसार, सावन के पूरे सीजन के दौरान इस विशेष पैटर्न की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है। यही वजह है कि त्योहार की शुरुआत होने से पहले ही करौली की स्थानीय दुकानों पर मोठड़ा लहरिया की नई और आकर्षक रेंज स्टॉक कर ली जाती है ताकि ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिल सकें।
व्यापारी पंकज गुप्ता ने साझा की खासियत
करौली के साड़ी व्यापारी पंकज गुप्ता बताते हैं कि मोठड़ा लहरिया कोई हालिया ईजाद नहीं है, बल्कि इसका इतिहास काफी पुराना है। पीढ़ियों से महिलाएं सावन के पारंपरिक पर्व और त्योहारों पर इसे पहनना पसंद करती आई हैं। बीच के कुछ वर्षों में आधुनिक और फैंसी साड़ियों का दौर जरूर आया था, लेकिन इस पारंपरिक परिधान की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई और आज महिलाएं एक बार फिर इसे बड़े चाव से खरीद रही हैं।
रंगों की विविधता और रानी शेड का जलवा
इस परिधान की सबसे बड़ी पहचान इसके अनूठे रंग संयोजन और बारीक लहरिया पैटर्न में छिपी है। हालांकि बाजार में इसके कई रंग विकल्प मौजूद हैं, लेकिन महिलाओं के बीच रानी रंग की मोठड़ा साड़ियों की डिमांड सबसे अधिक है। इन साड़ियों के दाम कपड़े की गुणवत्ता और उन पर किए गए काम के आधार पर तय होते हैं।
शिफॉन और जॉर्जेट का हल्का और आरामदायक सफर
इस साल करौली के बाजारों में मोठड़ा लहरिया कई तरह के फैब्रिक में बिक रहा है। इनमें शिफॉन और जॉर्जेट की साड़ियां महिलाओं को सबसे ज्यादा लुभा रही हैं। हल्के वजन का कपड़ा होने के कारण महिलाएं इसे लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के पहन सकती हैं, जो इसे सावन की उमस भरे मौसम के लिए बेहद आरामदायक बनाता है।
बाजार के जानकारों के अनुसार, बिना डिजाइन वाली प्लेन मोठड़ा साड़ियों का मुख्य निर्माण गुजरात के सूरत शहर में होता है, जबकि इन पर पारंपरिक गोटा और जयपुरी कारीगरी जयपुर में की जाती है। यही कारण है कि एक ही नाम के इस परिधान में डिजाइन और कारीगरी के आधार पर कीमतों में काफी विविधता देखने को मिलती है।
कीमतें और रक्षाबंधन की परंपरा
सादी या प्लेन मोठड़ा साड़ियों की शुरुआती कीमत करीब 300 रुपये से शुरू होकर 1500 रुपये तक जाती है, जबकि जयपुर के प्रसिद्ध गोटा वर्क वाली प्रीमियम साड़ियों के दाम 3000 से 4000 रुपये तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के गोटा और हैंडवर्क से सजी साड़ियों की मांग रक्षाबंधन के आसपास विशेष रूप से बढ़ जाती है, खासकर जब भाई-बहन के त्योहार पर सोगी की रस्म अदा करनी होती है।



















