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अंबाला में नवरात्रि की अष्टमी और नवमी को लेकर असमंजस, राजकुमार शर्मा ने बताई सही तिथिहरियाणा
17 अक्तू॰ 2026, 6:01 pm (9 मिनट पहले)· 0

अंबाला में नवरात्रि की अष्टमी और नवमी को लेकर असमंजस, राजकुमार शर्मा ने बताई सही तिथि

अंबाला में नवरात्रि के अंतिम दिनों में महाष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। ज्योतिषाचार्य राजकुमार शर्मा ने इन तिथियों और कन्या पूजन के नियमों पर पूरी जानकारी दी है।

अंबाला के विभिन्न घरों और मंदिरों में शारदीय नवरात्रि के अंतिम चरण के दौरान महाष्टमी, नवमी और कन्या पूजन को लेकर तैयारियां चरम पर पहुंच चुकी हैं। इस बार पंचांग की गणनाओं के कारण कई श्रद्धालुओं के मन में तिथियों के मिलान को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग अठारह अक्टूबर को महाष्टमी का पर्व मनाने का विचार कर रहे हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि यह पूजन उन्नीस अक्टूबर को किया जाना चाहिए। ऐसे में व्रत का पारण करने, हवन संपन्न कराने और कन्याओं को जिमाने के लिए कौन सा दिन सबसे उपयुक्त रहेगा, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है। आगामी बीस अक्टूबर को विजयादशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसके चलते तिथियों का यह फेर और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

तिथियों की सही गणना और समय

इस विषय पर अंबाला के जाने-माने ज्योतिषाचार्य राजकुमार शर्मा का कहना है कि सामान्य तौर पर सनातन धर्म के कई पर्वों में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को मुख्य आधार माना जाता है। इसी शास्त्रीय नियम के आधार पर उन्नीस अक्टूबर को अष्टमी का पूजन करना उचित रहेगा। हालांकि, सभी धार्मिक आयोजनों में एक ही नियम लागू नहीं होता क्योंकि कुछ विशेष पर्वों में दिनभर की तिथि की स्थिति और विशेष मुहूर्तों को भी देखना पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर परिवार अपने स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपराओं का पूरी तरह से पालन करते हुए ही पूजन का विधान पूरा करे।

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अष्टमी और नवमी का विस्तृत पंचांग समय

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अष्टमी तिथि की शुरुआत अठारह अक्टूबर की सुबह आठ बजकर सत्ताईस मिनट पर होगी और इसका समापन उन्नीस अक्टूबर की सुबह दस बजकर इक्यावन मिनट पर हो जाएगा। इसके तुरंत पश्चात नवमी तिथि का आगमन होगा, जो बीस अक्टूबर की दोपहर बारह बजकर पचास मिनट तक अपनी प्रभावशीलता में रहेगी। इस प्रकार उन्नीस अक्टूबर को सुबह दस बजकर इक्यावन मिनट तक अष्टमी का प्रभाव रहेगा, जिसके चलते भक्त अपनी मान्यता के अनुसार इसी अवधि में या इसके बाद नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन संपन्न कर सकते हैं। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के अनुष्ठानों में पंचांग के नियमों का विशेष स्थान होता है। इसके अलावा विजयादशमी की तिथि बीस अक्टूबर को दोपहर बारह बजकर पचास मिनट से शुरू होकर इक्कीस अक्टूबर की दोपहर दो बजकर ग्यारह मिनट तक रहेगी।

कन्या पूजन की विधि और परंपराएं

नवरात्रि की महाष्टमी और नवमी के पावन अवसरों पर नौ दिनों के व्रत और पूजन के बाद कन्याओं को साक्षात माता रानी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। परंपरा के अनुसार आमतौर पर दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की आयु की कन्याओं को आदर सहित आमंत्रित कर भोजन कराया जाता है। कई घरों में इस दिन विशेष रूप से हवन का आयोजन भी किया जाता है। अनुष्ठान की शुरुआत में सबसे पहले कन्याओं के चरण धोए जाते हैं और उन्हें स्वच्छ आसन पर ससम्मान बैठाया जाता है। इसके पश्चात उन्हें पूरी, हलवा और चने का प्रसाद श्रद्धापूर्वक परोसा जाता है। लोग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार कन्याओं को दक्षिणा और उपहार भेंट करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

व्रत का पारण और शुभ मुहूर्त

पंडित राजकुमार शर्मा बताते हैं कि इस दिन सुबह सबवे उठकर स्नान करना चाहिए और घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद माता रानी को ताजे फूल अर्पित करके उनकी विधि-विधान से आराधना करनी चाहिए और तैयार किए गए भोग को कन्याओं में बांटना चाहिए। कई परिवारों में इस दौरान भैरव बाबा और हनुमान जी को भी भोग लगाने की गहरी परंपरा चली आ रही है। जो श्रद्धालु पूरे नौ दिन या अष्टमी-नवमी का व्रत रखते हैं, वे हवन और कन्या पूजन संपन्न होने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलते हैं। इस बार अनुष्ठान के लिए दोपहर की पूजा का समय एक बजकर चौदह मिनट से तीन बजकर तीस मिनट तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर एक बजकर उन्सठ मिनट से दो बजकर पैंतालीस मिनट तक का है। श्रद्धालु इन निर्धारित मुहूर्तों में अपनी परंपरा के अनुसार कार्य कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

इस वर्ष महाष्टमी का पूजन किस दिन किया जा सकता है?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्योदय की तिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी पूजन किया जा सकता है।
अष्टमी तिथि कब से कब तक रहेगी?
अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे तक रहेगी।
कन्या पूजन में किस आयु वर्ग की कन्याओं को शामिल किया जाता है?
सामान्यतः 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन कराया जाता है।
विजयादशमी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा?
विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
दोपहर की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
अपराह्न पूजा दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक और विजय मुहूर्त 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा।
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