हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ शुद्धिकरण का विवाद अब पूरे उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सियासी भूचाल बन चुका है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति का तापमान काफी बढ़ा दिया है। एक तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस पूरी घटना को दलित समाज और देश के संविधान का सीधा अपमान करार देते हुए पूरे प्रदेश में उग्र प्रदर्शन कर रही है और पुलिस प्रशासन को एफआईआर रद्द करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे चुकी है, तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इन तमाम आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पार्टी पर इस संवेदनशील मुद्दे को बेवजह जातिगत रंग देने की गंभीर कोशिश करने का आरोप लगाया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच किस तरह की बयानबाजी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
पुलिस मुख्यालय पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन और 48 घंटे का अल्टीमेटम
हल्द्वानी में सांसद राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इसी कड़ी में राजधानी देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा और जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में पहुंचे इन कार्यकर्ताओं ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा और तत्काल प्रभाव से दर्ज मुकदमे को खारिज करने की पुरजोर मांग की। कांग्रेस पार्टी ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि आगामी 48 घंटों के भीतर राहुल गांधी पर दर्ज इस मुकदमे को वापस नहीं लिया गया, तो कांग्रेस हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगी। पार्टी कार्यकर्ता और अधिक आक्रामक होकर सड़कों पर उतरेंगे और इस पूरे मामले को सीधे जनता की अदालत में ले जाकर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे।
भाजपा का पलटवार और रामलीला मैदान की ऐतिहासिक धार्मिक मान्यता
कांग्रेस पार्टी के इन तीखे आरोपों और प्रदर्शनों पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़ा एतराज जताया है। रामलीला समिति हल्द्वानी के पूर्व कोषाध्यक्ष और भाजपा के प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस इस पूरी तरह से धार्मिक और आस्था से जुड़े मामले को जानबूझकर राजनीतिक और जातिगत रंग देने का कुत्सित प्रयास कर रही है। तरुण बंसल के अनुसार, हल्द्वानी का यह ऐतिहासिक रामलीला मैदान पिछले 135 सालों से कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी दिन की रामलीला के मंचन का गवाह बनता आया है। इस मैदान का धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व यहां के लोगों के लिए अत्यंत खास है और यहां मंच पर अभिनय करने वाले सभी पात्रों को भगवान का प्रत्यक्ष रूप माना जाता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले साल 2009 और साल 2010 में भी इस मैदान की पारंपरिक शुचिता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन हो चुके हैं। भाजपा का मुख्य तर्क यही है कि इस पूरे विवाद का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह केवल और केवल लोगों की गहरी आस्था और मैदान की धार्मिक पवित्रता से जुड़ा एक संवेदनशील विषय है।
विकासनगर से लेकर अल्मोड़ा और बागेश्वर तक फैली कांग्रेस की नाराजगी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कड़े निर्देशों के बाद अब यह पूरा विवाद केवल हल्द्वानी शहर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका दायरा बढ़कर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के थानों तक पहुंच गया है जहां लगातार पुलिस को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपे जा रहे हैं। विकासनगर कोतवाली में जिला कांग्रेस कमेटी की तरफ से पुलिस को एक लिखित तहरीर दी गई। इस महत्वपूर्ण मौके पर चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष और चकराता से विधायक प्रीतम सिंह तथा वरिष्ठ नेता नवप्रभात समेत कई दिग्गज कांग्रेसी नेता मौके पर मौजूद रहे। प्रीतम सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के तुरंत बाद सभा स्थल का कथित शुद्धिकरण किया जाना एक अत्यंत गंभीर मामला है, जिसकी अनुमति न तो देश का संविधान देता है और न ही कानून। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए घोषणा की कि यदि सरकार ने इस मामले में संलिप्त दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो आगामी 7 तारीख को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास का जोरदार घेराव किया जाएगा। दूसरी तरफ, अल्मोड़ा जिले में जिलाध्यक्ष भूपेंद्र भोज के नेतृत्व में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता स्थानीय कोतवाली पहुंचे और दोषियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज न किए जाने की स्थिति में कार्यकर्ताओं ने कोतवाली परिसर के भीतर ही अनिश्चितकालीन धरना देने की कड़ी चेतावनी दी। इसी क्रम में बागेश्वर जिले में भी कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट के नेतृत्व में पुलिस को शिकायत पत्र सौंपा गया। कांग्रेस नेताओं ने पुरजोर आरोप लगाया कि खड़गे की विशाल जनसभा के ठीक बाद मैदान में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया और जगह-जगह गंगाजल छिड़का गया, जो सीधे तौर पर देश के दलित समाज का खुला अपमान है।





















