उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों और झीलों के शहर नैनीताल की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का लजीज खान-पान भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। इस पर्यटन नगरी में देश के कोने-कोने से आने वाले सैलानी स्थानीय व्यंजनों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के खास जायकों का स्वाद भी लेते हैं। इसी फेरबहिश्त में एक बेहद लोकप्रिय नाम तमांग मोमो का है, जहां पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक अंदाज में बनने वाले मोमो और अन्य चाइनीज व्यंजन बरसों से लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।
कुछ हफ्तों पहले इस लोकप्रिय प्रतिष्ठान के सामने एक गंभीर संकट आ खड़ा हुआ, जिसने इस पूरे कारोबार को हिला कर रख दिया था। अचानक हुए शॉर्ट सर्किट के कारण दुकान में भीषण आग भड़क उठी, जिसने देखते ही देखते पूरे रेस्टोरेंट को अपनी आगोश में ले लिया और दुकान का एक बहुत बड़ा हिस्सा जलकर पूरी तरह राख हो गया। इस दुर्घटना से व्यापार को बहुत बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी, मगर तमांग परिवार ने इस बड़ी आपदा के आगे झुकने या हार मानने के बजाय नए सिरे से शुरुआत करने का दृढ़ संकल्प लिया। आखिरकार करीब 20 दिनों के अंतराल के बाद तमांग मोमो एक बार फिर अपने पुराने कलेवर और चिर-परिचित अंदाज में ग्राहकों की सेवा में वापस आ गया है। दुकान के भीतर दोबारा वही चहल-पहल देखने को मिल रही है और चाहने वालों को वही पुराना और अनूठा स्वाद परोसा जा रहा है, जिसने इस छोटी सी जगह को पूरे नैनीताल में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
सरोवर नगरी में पिछले 17 वर्षों से परोसा जा रहा है पूर्वोत्तर का जायका
इस प्रतिष्ठान की संचालक पासंग तमांग के अनुसार, नैनीताल में उनकी यह दुकान लगभग 17 साल पुरानी है। उन्होंने जानकारी दी कि यहां शाकाहारी मोमो, मांसाहारी मोमो और थुक्पा समेत कई तरह के स्वादिष्ट चाइनीज व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन तमाम व्यंजनों को पूर्वोत्तर के पारंपरिक तरीकों और विशिष्ट मसालों के मिश्रण से बनाया जाता है, जिसके कारण इनका स्वाद सामान्य जगहों पर मिलने वाले मोमो से बिल्कुल अलग और अनूठा महसूस होता है। पासंग तमांग मूल रूप से दार्जिलिंग की रहने वाली हैं और उनका विवाह नैनीताल में हुआ था। वह बताती हैं कि पूर्वोत्तर से जुड़ी उनकी पैतृक जड़ें ही उनके बनाए गए खान-पान की असल विशेषता का मुख्य आधार हैं। इसी प्रेरणा के चलते उन्होंने नैनीताल के निवासियों को पूर्वोत्तर के असली स्वाद से परिचित कराने का बीड़ा उठाया और थोड़े ही समय में यह जायका स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां घूमने आने वाले सैलानियों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हो गया।
भीषण आग ने सब कुछ तबाह किया, लेकिन हिम्मत को नहीं डिगा पाई
पासंग तमांग बताती हैं कि लगभग 20 दिन पहले हुए शॉर्ट सर्किट हादसे ने उनकी दुकान को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। इस भयंकर दुर्घटना में उन्हें बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ा और एक पल के लिए ऐसा प्रतीत हुआ मानो वर्षों की उनकी कड़ी मेहनत और पूंजी पल भर में नष्ट हो गई हो। हालांकि उन्होंने इस परिस्थिति में अपना हौसला नहीं खोया। उन्होंने बताया कि आम जनता का बेशुमार प्यार और उनके अपने परिवार का अटूट साथ ही वह ताकत था जिसने उन्हें इस मुसीबत से उबरकर दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने की प्रेरणा दी। इसके तुरंत बाद दुकान के ढांचे को नए सिरे से तैयार किया गया और पुराने स्वाद के साथ इसे दोबारा ग्राहकों के वास्ते खोल दिया गया। आज इस दुकान के भीतर फिर से मोमो की सौंधी खुशबू और खाने के शौकीनों की आवाजाही साफ देखी जा सकती है। तमांग परिवार के वास्ते यह सिर्फ एक व्यवसाय का दोबारा पटरी पर लौटना भर नहीं है, बल्कि यह बेहद कठिन समय के बाद संघर्ष करके अपने दम पर फिर से उठ खड़े होने की एक प्रेरणादायक दास्तान है।
आम नागरिकों से लेकर जानी-मानी हस्तियां भी ले चुकी हैं स्वाद का लुत्फ
नैनीताल की स्थानीय निवासी दीप्ति का कहना है कि तमांग मोमो के उत्पाद बेहद लजीज होते हैं और यहां हमेशा खाने के शौकीनों की अच्छी खासी भीड़ जमा रहती है। उनके मुताबिक, इस दुकान पर वेज और नॉनवेज मोमो के अलावा ड्राई थुक्पा और अन्य चाइनीज पकवान परोसे जाते हैं। दीप्ति ने बताया कि आगजनी की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद दुकान कुछ हफ्तों के लिए बंद हो गई थी, लेकिन इसके दोबारा शुरू होने के बाद इलाके में फिर से पहले जैसी रौनक लौट आई है और लोग पुराने जायके का मजा लेने के लिए खिंचे चले आ रहे हैं। पासंग तमांग के अनुसार, उनके इस छोटे से आउटलेट पर अब तक कई बड़ी और प्रसिद्ध हस्तियां भी पूर्वोत्तर के इस खास स्वाद का आनंद ले चुकी हैं। इन तमाम मशहूर चेहरों में सुप्रसिद्ध गायक पैपोन और लोकप्रिय अभिनेत्री उर्वशी रौतेला जैसी जानी-मानी शख्सियतें भी शामिल हैं।
नैनीताल के तमांग मोमो की यह पूरी गाथा केवल मोमो और चाइनीज खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मजबूत जज्बे की कहानी है जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों के बाद भी हार नहीं मानता और नए सिरे से शुरुआत करता है। आग ने भले ही दुकान की भौतिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन तमांग परिवार के अंदर छिपे आत्मविश्वास और हिम्मत को नहीं जला सकी। आज के समय में जो भी पर्यटक नैनीताल की वादियों की सैर करने आते हैं और पहाड़ों के सुंदर माहौल के बीच पूर्वोत्तर के पारंपरिक जायके का अनुभव करना चाहते हैं, वे अनायास ही तमांग मोमो की तरफ खिंचे चले आते हैं और यहां के बेजोड़ स्वाद का लुत्फ उठाना कभी नहीं भूलते।




















