उत्तराखंड के हरिद्वार शहर स्थित कनखल के दिव्य योग मंदिर में 28 अक्टूबर को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और प्राचीन मान्यताओं पर उठ रहे विवादित बयानों के खिलाफ कठोर रुख अपनाया। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं को लेकर समाज में फैलाए जा रहे भ्रम पर गहरा आक्रोश जताया और स्पष्ट किया कि धर्मशास्त्रों की आड़ में आराध्य देवी-देवताओं की छवि धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सहन नहीं किया जाएगा। स्वामी रामदेव ने बताया कि इस प्रकार के मिथ्या प्रचार और मनगढ़ंत दावों की असलियत उजागर करने के लिए पतंजलि की ओर से एक विशेष मंच तैयार किया जा रहा है, जहां विद्वानों की मौजूदगी में प्रमाणिक एवं तथ्यात्मक साक्ष्य देश के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।
देवी-देवताओं पर अनुचित बयानों और ग्रंथों में छेड़छाड़ पर बड़ा प्रहार
प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने सनातन परंपरा के प्रमुख आराध्यों को लेकर हाल के दिनों में दिए गए बयानों पर बिंदुवार आपत्ति उठाई। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण और महायोगी भगवान शिव को लेकर ऐसी बातें कही जा रही हैं जो पूरी तरह निराधार हैं। भगवान राम और माता सीता को शराब तथा मांसाहार से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को गलत संदर्भों में पेश करने और आदियोगी भगवान शिव को गांजा, भांग या नशे से जोड़ने जैसे प्रयासों पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। इसके अलावा, भगवान ब्रह्मा और अन्य देवताओं को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों को सनातन धर्म की मर्यादा पर सीधा प्रहार बताया।
स्वामी रामदेव ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 1,000 वर्षों के दौरान, विशेषकर मुगल काल और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान, सनातन धर्म के विरोधियों और धर्मद्रोही तत्वों ने हमारे मूल ग्रंथों में कई मनगढ़ंत बातें जोड़ीं। इसी प्रक्षिप्त या मिलावटी सामग्री का सहारा लेकर आज के समय में कुछ लोग सनातन धर्म की जड़ों पर हमला करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आस्था के विषयों पर मनमाने तरीके से व्याख्या करने के बजाय इतिहास, परंपरा और मूल साक्ष्यों के आधार पर ही कोई निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
आर्यों के आगमन का नैरेटिव और प्रवासन के सिद्धांतों पर तथ्य
इतिहास से जुड़े विवादित मुद्दों पर बात करते हुए बाबा रामदेव ने आर्य आक्रमण सिद्धांत (आर्यन इनवेजन थ्योरी) को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि देश में यह झूठी धारणा फैलाई गई कि आर्य बाहर से आए थे, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। अपने दुनिया भर के भ्रमण के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब भी उन्होंने वैश्विक मंचों पर विदेशी नागरिकों से पूछा कि क्या उनके पूर्वज भारत गए थे, तो सभी ने स्पष्ट किया कि भारत से लोग ज्ञान और योग का संदेश लेकर दुनिया भर में फैले थे।
प्रवासन के कारणों को समझाते हुए उन्होंने तीन मुख्य स्थितियां बताईं। पहली स्थिति तब बनती है जब कोई विद्वान या योग गुरु पूरी दुनिया में ज्ञान, संस्कृति और स्वास्थ्य का प्रचार-प्रसार करने के लिए यात्रा करता है। दूसरी स्थिति तब आती है जब रोजगार या आजीविका की तलाश में लोग मिडिल ईस्ट, अमेरिका, यूरोप या ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों का रुख करते हैं। तीसरी स्थिति व्यापार और बड़े कारोबारी उपक्रमों से जुड़ी होती है। स्वामी रामदेव ने कहा कि 'मूल निवासी' का झूठा नैरेटिव गढ़कर और 'ब्राह्मणों भारत छोड़ो' जैसे नारों के जरिए समाज को बांटने की साजिश रची जा रही है, जिसका मुंहतोड़ जवाब देना बेहद जरूरी है।
150 करोड़ सनातनियों की जनसांख्यिकी और 104वां अधिवेशन
जनसंख्या और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि जन्म, डीएनए और पारिवारिक वंश परंपरा के दृष्टिकोण से आज पूरे विश्व में 150 करोड़ से अधिक सनातन धर्म के अनुयायी मौजूद हैं। यदि अखंड भारत के भौगोलिक दायरे को देखा जाए तो यह आंकड़ा 200 करोड़ के पार पहुंच जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले 99 प्रतिशत मुसलमानों के पूर्वजों का इतिहास देखा जाए तो वे स्वयं स्वीकार करेंगे कि उनके पूर्वज ऋषि-मुनि, महर्षि, देवी-देवता और वैदिक सनातनी परंपरा का पालन करने वाले थे, जिन्होंने कालांतर में धर्म परिवर्तन किया था।
इन सभी मुद्दों का तार्किक एवं प्रामाणिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए स्वामी रामदेव ने पतंजलि द्वारा आयोजित किए जाने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि पतंजलि की ओर से भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश के प्रख्यात इतिहासकार, विद्वान और धर्मशास्त्रों के विशेषज्ञ जुटेंगे। अधिवेशन के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्मशास्त्रों और ऐतिहासिक साक्ष्यों की गहन पड़ताल की जाएगी तथा भ्रम फैलाने वाले सभी दावों का प्रमाण सहित सटीक जवाब दिया जाएगा।


















