उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहर और खूबसूरत झीलों से घिरा नैनीताल इन दिनों युवाओं के एक जनआंदोलन का गवाह बन रहा है। वादियों और पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक व अन्य अपशिष्टों के बोझ से मुक्त कराने के मकसद से युवाओं की टोली हर हफ्ते शहर के चप्पे-चप्पे पर सफाई अभियान चला रही है। 'क्लीन नैनीताल' नाम से पहचान बना चुकी यह जमीनी पहल किसी औपचारिक संगठन या सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं, बल्कि आम नागरिकों और युवाओं के निजी समर्पण की नींव पर खड़ी हुई है। महज एक व्यक्ति के संकल्प से शुरू हुआ यह सफर आज सौ से ज्यादा संवेदनशील नागरिकों और उत्साही युवाओं का साझा मंच बन चुका है।
21 दिनों के व्यक्तिगत संकल्प से जगी बदलाव की अलख
इस पूरे जनअभियान की नींव 1 मार्च 2026 को पड़ी थी, जब स्थानीय युवा आशु निगम ने शहर के बिगड़ते वातावरण को देखकर स्वयं मैदान में उतरने का फैसला लिया। उन्होंने शुरुआती चरण में खुद के लिए 21 दिनों का एक विशेष सफाई चैलेंज निर्धारित किया। इस अवधि में वे नैनीताल झील के किनारों और शहर के अलग-अलग कोनों में अकेले ही थैला लेकर निकलते थे और बिखरा हुआ कचरा समेटते थे। आशु निगम ने अपने इस दैनिक प्रयास के दृश्य सोशल मीडिया पर भी साझा करने शुरू किए, ताकि आमजन तक यह स्पष्ट संदेश पहुंचे कि सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता केवल नगर निगम या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। उनका मानना था कि जब तक स्थानीय नागरिक अपनी जवाबदेही नहीं समझेंगे, तब तक कोई भी शहर स्वच्छ नहीं रह सकता। सोशल मीडिया पर उनके इन प्रयासों को देखकर धीरे-धीरे अन्य लोग भी प्रेरित होने लगे और देखते ही देखते कारवां बड़ा होता गया।
80 से ज्यादा अभियान और 12000 किलो अपशिष्ट का निस्तारण
शुरुआती हफ्तों में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद यह पहल एक संगठित अभियान में बदल गई। पिछले सात महीनों के दौरान इस दल ने नैनीताल के अलग-अलग क्षेत्रों में 80 से अधिक स्वच्छता अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इन अभियानों के दौरान झील के तटीय क्षेत्रों, व्यस्ततम बाजारों, मुख्य सार्वजनिक स्थानों, ऊंचे ट्रैकिंग मार्गों और पर्यटकों के पसंदीदा व्यू पॉइंट्स से भारी मात्रा में कचरा एकत्र किया गया। जमीनी आंकड़ों के अनुसार, औसतन हर एक ड्राइव में 150 किलो से अधिक कचरा समेटा जाता है, जिसके चलते अब तक कुल 12000 किलो से ज्यादा अपशिष्ट हटाया जा चुका है।
फाउंडर मेंबर आशु निगम को प्रकृति के बीच पहाड़ों में ट्रैकिंग करने का पुराना शौक रहा है। अपनी कई पदयात्राओं के दौरान उन्होंने देखा कि नैनीताल के दूरदराज और बेहद शांत प्राकृतिक रास्तों पर भी प्लास्टिक की खाली बोतलें, चिप्स के पैकेट, खाद्य सामग्रियों के रैपर और शराब की टूटी कांच की बोतलें बिखरी पड़ी रहती थीं। इन खूबसूरत दुर्गम स्थलों पर फैली गंदगी ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, जिसके बाद उन्होंने केवल खुद कचरा उठाने तक सीमित न रहकर समाज में व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता फैलाने का बीड़ा उठाया।
पर्यटकों के साथ स्थानीय आदतों में सुधार पर जोर
इस अभियान से पिछले करीब पांच महीनों से जुड़ी सक्रिय सदस्य निहारिका का कहना है कि पहाड़ों पर कचरा फैलने की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर एकतरफा धारणा देखने को मिलती है। आमतौर पर यही माना जाता है कि केवल बाहरी पर्यटक ही पहाड़ी रास्तों पर गंदगी फैलाते हैं। हालांकि, जब टीम ने शहर के आंतरिक हिस्सों और स्थानीय बस्तियों के नजदीक सफाई अभियान चलाए, तो पाया गया कि स्थानीय निवासियों द्वारा भी गैर-जिम्मेदाराना तरीके से कूड़ा फेंका जाता है।
निहारिका के अनुसार, ट्रैकिंग रूट्स और जंगलों में कांच की खाली बोतलें फोड़कर छोड़ देना सबसे अधिक जोखिम भरा है। यह नुकीला कांच न केवल ट्रैकिंग करने वाले अन्य यात्रियों के लिए गंभीर चोट का सबब बन सकता है, बल्कि वन्यजीवों के पैरों को जख्मी कर उनके जीवन को भी खतरे में डाल देता है। इसलिए टीम सफाई करने के साथ-साथ मौके पर मौजूद लोगों को यह समझाती है कि वे अपने साथ लाया गया सारा कचरा वापस समेटकर ले जाएं और पहाड़ों की प्राकृतिक गरिमा को नुकसान न पहुंचाएं।
सोशल मीडिया की ताकत और युवाओं की बढ़ती भागीदारी
इस पूरे जमीनी आंदोलन का सबसे प्रेरणादायक पहलू युवा पीढ़ी यानी जेन जी की बड़े पैमाने पर सक्रियता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जब हर हफ्ते चलाए जाने वाले अभियानों की तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं, तो कई छात्र और युवा खुद आगे बढ़कर टीम से जुड़ने की इच्छा जताते हैं। निहारिका का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश जितनी तेजी से युवाओं के बीच फैलेगा, बदलाव उतना ही स्थायी होगा।
स्थानीय स्तर पर नगर पालिका नैनीताल भी इस अभियान को अपना सहयोग दे रही है, जिससे युवाओं का हौसला और मजबूत हुआ है। एक व्यक्ति के 21 दिनों के व्यक्तिगत संकल्प से शुरू हुआ यह सफर आज सौ से अधिक लोगों की सामूहिक शक्ति बन चुका है। 'क्लीन नैनीताल' अभियान का स्पष्ट और अंतिम उद्देश्य यह स्थापित करना है कि प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेने के साथ-साथ उसकी शुद्धता और पारिस्थितिकी को संजोए रखना प्रत्येक नागरिक का बुनियादी कर्तव्य है।


















