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मानसून में जन्नत बन जाती है बागेश्वर की भद्रकाली गुफा, कमस्यार घाटी का यह प्राकृतिक खजाना करता है आकर्षितउत्तराखंड
4 सित॰ 2026, 6:15 am (21 मिनट पहले)· 2

मानसून में जन्नत बन जाती है बागेश्वर की भद्रकाली गुफा, कमस्यार घाटी का यह प्राकृतिक खजाना करता है आकर्षित

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी में स्थित भद्रकाली गुफा मानसून के दौरान प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत केंद्र बन जाती है। बारिश के मौसम में यहां के पहाड़, झरने और हरियाली पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी में स्थित भद्रकाली गुफा मानसून के मौसम में अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विशेष पहचान रखती है। बारिश का मौसम आते ही इस पूरे क्षेत्र का परिदृश्य पूरी तरह बदल जाता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। पहाड़ों की छांव में बसी यह जगह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक बेहतरीन ठिकाना साबित होती है। जिला मुख्यालय बागेश्वर से इस स्थान की दूरी करीब 40 किलोमीटर है, जबकि कांडा से यह लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए यात्रियों को सानिउडियार से गुजरते हुए बास पटान-सेराघाट मार्ग का उपयोग करना पड़ता है।

कमस्यार घाटी की गोद में समाई भद्रकाली गुफा एक ऐसा स्थल है जहां आध्यात्मिकता और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। जब मानसून में बारिश होती है, तो गुफा के आसपास मौजूद पहाड़ी चट्टानों से पानी की कई छोटी-बड़ी धाराएं नीचे की ओर बहने लगती हैं। इनमें से कई जलधाराएं मिलकर सुंदर झरनों का रूप ले लेती हैं, जो इस पूरे इलाके की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। इस गुफा के भीतर एक प्राकृतिक जलधारा और पवित्र शक्ति कुंड भी मौजूद है, जो यहां आने वाले हर शख्स को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पहाड़ियों के बीच से आती पानी की कलकल आवाज और चारों तरफ फैली हरियाली इस जगह को बेहद खास बनाती है।

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यदि कोई व्यक्ति बागेश्वर की भागदौड़ और भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और प्राकृतिक माहौल की तलाश में है, तो भद्रकाली गुफा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। भौगोलिक रूप से यह स्थान बागेश्वर से लगभग 40 किलोमीटर और कांडा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। सानिउडियार के रास्ते बास पटान-सेराघाट मार्ग से होकर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। मानसून के दिनों में बारिश थमने के बाद आसपास की पहाड़ियों पर पानी की अनगिनत धाराएं साफ नजर आती हैं। गुफा के समीप गिरता हुआ पानी किसी झरने जैसा मनमोहक दृश्य पैदा करता है। शुद्ध हवा, ऊंचे पहाड़ और पानी की गूंज इस सफर को प्रकृति प्रेमियों के लिए यादगार बना देती है।

कमस्यार घाटी की यह भद्रकाली गुफा धार्मिक और प्राकृतिक दोनों ही दृष्टिकोण से काफी महत्व रखती है। इस क्षेत्र में प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर के साथ-साथ यह प्राचीन गुफा भी स्थित है, जहां की प्राकृतिक जलधारा और शक्ति कुंड श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं। मानसून के मौसम में जब आसमान से मेघ बरसते हैं, तो आसपास की पहाड़ियों से पानी का बहाव शुरू हो जाता है। इससे गुफा के आसपास का नजारा और भी ज्यादा रमणीय हो जाता है। मंदिर में माथा टेकने वाले धार्मिक श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति के सौंदर्य को निहारने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

पहाड़ी इलाकों की खूबसूरती मानसून के दिनों में अपने सबसे भव्य रूप में नजर आती है, और बागेश्वर की भद्रकाली गुफा इसका एक जीवंत उदाहरण है। बारिश के बाद आसपास के सभी पहाड़ जीवंत हरे रंग में रंग जाते हैं, और चट्टानों के सीने से पानी नीचे की ओर उतरता है। कहीं यह पानी बारीक धाराओं के रूप में तो कहीं स्पष्ट झरनों के रूप में दिखाई देता है। मानसून की बौछारों के बाद गुफा के आसपास की वनस्पति और हरियाली में भी भारी इजाफा होता है। भीतर मौजूद प्राकृतिक जलधारा और शक्ति कुंड इस पूरे पर्यटन स्थल को और अधिक विशिष्ट बनाते हैं। यहां आने वाले पर्यटक इस शांत वातावरण में कुछ सुकून भरे पल बिताना पसंद करते हैं।

बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है, और इसी मनमोहक भूभाग में भद्रकाली गुफा अवस्थित है। मानसून के दौरान इस पूरे इलाके का मौसमी मिजाज बिल्कुल बदल जाता है। बारिश के पश्चात पहाड़ पूरी तरह से हरे-भरे नजर आने लगते हैं, और चट्टानों के बीच से पानी की धाराएं फूट पड़ती हैं। गुफा के पास बनने वाला यह प्राकृतिक झरना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन जाता है। अपने धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण यहां लगातार श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। गुफा के अंदरूनी हिस्से में स्थित प्राकृतिक जलधारा और शक्ति कुंड भी देखने लायक होते हैं।

हालांकि मानसून के सीजन में भद्रकाली गुफा बेहद मनमोहक दिखाई देती है, लेकिन इस दौरान यहां यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। लगातार होने वाली बारिश की वजह से पहाड़ी रास्तों पर फिसलन का खतरा काफी बढ़ जाता है। एक पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई स्थानों पर अचानक पानी का तेज बहाव भी देखने को मिल सकता है। गुफा और झरनों के पास जाते समय पानी के तेज प्रवाह से सुरक्षित दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। अकेले यात्रा करने के बजाय स्थानीय लोगों से दिशा-निर्देश और जानकारी लेना ज्यादा समझदारी भरा कदम रहता है। मौसम खराब होने की स्थिति में अपनी यात्रा को कुछ समय के लिए टाल देना भी एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

यदि आप किसी शांत और प्रदूषण मुक्त वातावरण में अपने कुछ दिन बिताना चाहते हैं, तो मानसून के दिनों में भद्रकाली गुफा की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है। कमस्यार घाटी में स्थित यह अनूठा स्थल मंदिर, गुफा, प्राकृतिक जलधारा और आसपास के पर्वतीय सौंदर्य के कारण अपनी एक अलग पहचान रखता है। बारिश के बाद यहां की हरियाली आंखों को गहरी शांति और सुकून देती है। पहाड़ों की ऊंचाइयों से नीचे गिरता हुआ पानी झरने का एक अद्भुत और भव्य दृश्य रचता है। बागेश्वर और कांडा से सड़क मार्ग के माध्यम से आसानी से इस स्थान तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मानसून के दिनों में पहाड़ी मार्गों पर सफर करना जोखिम भरा हो सकता है।

सवाल-जवाब

भद्रकाली गुफा कहां स्थित है?
भद्रकाली गुफा उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी में स्थित है।
बागेश्वर और कांडा से इस गुफा की दूरी कितनी है?
यह स्थान बागेश्वर से लगभग 40 किलोमीटर और कांडा से लगभग 15 किलोमीटर दूर है।
यहां तक पहुंचने का मार्ग कौन सा है?
यहां सानिउडियार होते हुए बास पटान-सेराघाट मार्ग के जरिए सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
मानसून के दौरान गुफा के पास क्या खास दिखाई देता है?
बारिश के बाद आसपास की पहाड़ियों से पानी बहने लगता है और झरने जैसा सुंदर दृश्य बनता है।
गुफा के भीतर कौन सी मुख्य चीजें देखने को मिलती हैं?
गुफा के भीतर एक प्राकृतिक जलधारा और पवित्र शक्ति कुंड मौजूद हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

हालांकि यह लेख क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती को अच्छे से उजागर करता है, लेकिन एक क्राइम रिपोर्टर के दृष्टिकोण से यह देखना भी आवश्यक है कि मानसून के दिनों में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। विशेषकर सानिउडियार और बास पटान-सेराघाट मार्ग जैसे संपर्क मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक निगरानी की पुख्ता व्यवस्था होना अनिवार्य है, ताकि पर्यटकों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे और किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

सहकर्मी करण मल्होत्रा की बात को आगे बढ़ाते हुए, हमें यह भी रेखांकित करना होगा कि कमस्यार घाटी जैसे आंतरिक क्षेत्रों में मानसून के दौरान सड़क सुरक्षा और यात्रा प्रबंधन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। बागेश्वर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को कांडा से सानिउडियार और बास पटान-सेराघाट मार्ग पर संभावित भूस्खलन जोन की पहचान कर पहले से ही भारी मशीनरी तैनात रखनी चाहिए। केवल पर्यटन को बढ़ावा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनियोजित आवाजाही को नियंत्रित करने और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत ग्राउंड प्रोटोकॉल तैयार करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।

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