उत्तराखंड के भीतर पिछले चार दिनों से लगातार बरस रहे बादलों ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य के विभिन्न इलाकों में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि नदी-नाले उफान पर हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं आम हो चुकी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के देहरादून स्थित केंद्र ने 4 सितंबर 2026 के लिए पूरे प्रदेश में गरज-चमक और वज्रपात के साथ भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। खास तौर पर छह जिलों को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है, जिनमें देहरादून, नैनीताल, चम्पावत, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर शामिल हैं। इन सभी जगहों पर मूसलाधार बौछारें पड़ने की आशंका जताई गई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह ठहर गया है।
चमोली और उत्तरकाशी में तबाही का मंजर
सीमांत जिले चमोली में पिछले 36 घंटों से लगातार आसमान से पानी बरस रहा है, जिससे पहाड़ी घाटियों में हाहाकार मचा हुआ है। मूसलाधार बारिश के साथ पहाड़ों से टूटकर गिर रहे भारी बोल्डर और मलबा मुख्य रास्तों पर आ गए हैं। गोपेश्वर-कुंड मोटर मार्ग पर स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां सड़क पर कीचड़ का सैलाब बहने के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है। उत्तरकाशी जिले के उडरी गांव में भी प्रकृति का भयंकर रूप देखने को मिला है, जहां पहाड़ी दरकने से भारी मलबा सीधे लोगों के घरों में जा घुसा। इस अचानक हुई घटना से ग्रामीणों में भगदड़ मच गई और कई घरों के कमरों में टनों मलबा भर जाने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। लोग खुद ही बारिश के बीच अपने घरों से मलबा साफ करते नजर आए।
राजधानी देहरादून और कुमाऊं के मैदानी इलाकों में हाई अलर्ट
राजधानी देहरादून और प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थल मसूरी में भी बादलों का डेरा बना हुआ है और रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी है। शहर के निचले इलाकों और मुख्य मार्गों पर जलभराव होने से दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, कुमाऊं मंडल के जिलों में भी नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। कोसी और गौला नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी हैं। बनबसा बैराज से शारदा नदी में एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण तराई और सीमांत क्षेत्रों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति को भांपते हुए अल्मोड़ा जिले में एहतियात के तौर पर सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। लगातार हो रही बरसात के चलते पूरे प्रदेश में तापमान सामान्य से नीचे आ गया है, जिससे सितंबर के शुरुआती दिनों में ही ठंडक का अहसास होने लगा है।
अन्य जिलों में मौसम का मिजाज और प्रशासन की चौकसी
बागेश्वर, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और टिहरी जैसे जिलों में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बागेश्वर और पिथौरागढ़ में हल्की फुहारों के बीच भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जबकि धारचूला और मुनस्यारी जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों के बंद होने का खतरा बना हुआ है। रुद्रप्रयाग और टिहरी में चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा मार्गों पर कई जगह भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। संवेदनशील डेंजर जोन पर पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल के जवानों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत रास्ता साफ किया जा सके। मौसम विभाग के अनुसार यह मानसूनी सक्रियता आगामी 7 सितंबर तक यूं ही बनी रहने की संभावना है।



















