उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्वतीय नगर नैनीताल में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही तेज वर्षा के कारण शहर की प्रमुख पहचान नैनीझील के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। झील का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने और ओवरफ्लो होने की आशंका के कारण सिंचाई विभाग ने झील के निकासी गेट खोल दिए हैं। इसके साथ ही, आसपास की पहाड़ियों से पानी के तेज बहाव के साथ आई मिट्टी और गाद (सिल्ट) नैनीझील के तटों पर बड़ी मात्रा में एकत्र हो गई है। विशेष रूप से बोट हाउस क्लब के समीपवर्ती क्षेत्र में लगभग 20 फीट तक सिल्ट की परत जम जाने से झील का किनारा दूर से देखने पर किसी समतल मैदान जैसा प्रतीत हो रहा है।
नैनीझील का जलस्तर बढ़ा, सिंचाई विभाग ने खोले निकासी द्वार
सिंचाई विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नैनीताल क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के भीतर रिकॉर्ड 217 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस भीषण वर्षा के चलते शहर के मुख्य मार्गों, नालों और ढांचागत व्यवस्थाओं पर व्यापक असर पड़ा है। कई स्थानों पर पानी का बहाव इतना तीव्र है कि सड़कों पर आवाजाही बाधित हुई है। इस स्थिति ने स्थानीय निवासियों के दैनिक कार्यों के साथ-साथ वहां मौजूद पर्यटकों की आवाजाही को भी काफी कठिन बना दिया है।
मूसलाधार बारिश का सीधा प्रभाव नैनीझील के जलस्तर में हो रही वृद्धि के रूप में सामने आया है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता ललित मोहन कश्यप ने जानकारी दी कि गुरुवार सुबह नैनीझील का जलस्तर 88 फीट मापा गया था। हालांकि, दिन भर हुई निरंतर बारिश के बाद यह बढ़कर 88.4 फीट के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में झील का जलस्तर सामान्य औसत के दायरे में ही है और झील के पर्यावरण एवं संरचना के संरक्षण हेतु निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत ही जल निकासी का संचालन किया जा रहा है।
सहायक अभियंता ने आगे बताया कि यदि क्षेत्र में बारिश का क्रम इसी तरह जारी रहता है या और बढ़ता है, तो उसी अनुपात में निकासी द्वारों के संचालन में बदलाव किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य झील को ओवरफ्लो होने से बचाना और जलस्तर को पूरी तरह नियंत्रित रखना है। मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आने वाले दिनों में और अधिक बारिश की चेतावनी दिए जाने के मद्देनजर सिंचाई विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
पहाड़ियों की गाद से बना मैदानी दृश्य, बोट हाउस क्लब पर जमा हुई 20 फीट सिल्ट
पहाड़ों पर हो रही अत्यधिक वर्षा के कारण नैनीताल को घेरने वाली पहाड़ियों से भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और गाद बहकर नैनीझील में समा रही है। इससे झील के तटीय इलाकों में सिल्ट की एक मोटी परत बिछ गई है। बोट हाउस क्लब के पास यह स्थिति सबसे अधिक विकराल दिख रही है, जहां पानी के ऊपर सिल्ट का जमाव लगभग 20 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया है।
नैनीताल के स्थानीय निवासी और नाव चालक अरुण जाटव ने परिस्थिति का विवरण देते हुए बताया कि दो दिनों की अविरल वर्षा के कारण झील का जल स्तर बढ़ा है। पहाड़ियों से आने वाला मलबा झील के किनारों पर जमा हो गया है। उनके अनुसार, कई हिस्सों में करीब 20 फीट तक सिल्ट जम जाने से पानी दिखाई देना बंद हो गया है और किनारा किसी मैदानी भूभाग जैसा लग रहा है। हालांकि, अरुण जाटव ने यह भी कहा कि मानसून के मौसम में नैनीझील के जलस्तर का बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है और फिलहाल शहर के आंतरिक हिस्सों में आवागमन को लेकर कोई गंभीर समस्या पैदा नहीं हुई है।
पहाड़ी रास्तों से डरे पर्यटक, खूबसूरत मौसम भी बना आकर्षण का केंद्र
नैनीताल पहुंचे पर्यटक जहां पर्वतीय सुंदरता और बदले हुए मौसम को देखकर आनंदित हैं, वहीं पहाड़ी मार्गों की सुरक्षा को लेकर उनके मन में गहरा डर भी दिखाई दे रहा है। बिहार की राजधानी पटना से नैनीताल घूमने आए पर्यटक डॉक्टर इमरान ने अपनी यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे यहां के प्राकृतिक दृश्यों का लुत्फ उठाने बेहद उत्साह के साथ आए थे। हालांकि, यात्रा के दौरान रास्ते में मिली मूसलाधार बारिश और जगह-जगह हो रहे भूस्खलन ने उन्हें बेहद चिंतित कर दिया।
डॉक्टर इमरान ने बताया कि कई विषम परिस्थितियों और रुकावटों को पार करने के बाद ही वे नैनीताल पहुंच सके। रास्ते की भयावह स्थिति को देखते हुए एक समय उन्होंने बीच सफर से ही वापस पटना लौटने का मन बना लिया था, लेकिन अंततः जोखिम उठाकर वे गंतव्य तक पहुंचे। उनका कहना है कि नैनीताल शहर के भीतर का माहौल तो सुरक्षित महसूस होता है, परंतु बारिश के मौसम में पहाड़ों पर बने पहुंच मार्ग अत्यंत जोखिम भरे और असुरक्षित हैं।
इस सब के बावजूद, लगातार हो रही बारिश ने शहर के मौसम में एक अद्भुत आकर्षण पैदा कर दिया है। पहाड़ियों को ढकती घनी धुंध, बादलों से घिरी नैनीझील और चारों तरफ फैली हरियाली पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है। पर्यटकों का मानना है कि बारिश और कोहरे के बीच नैनीताल का प्राकृतिक सौंदर्य एक नया रूप ले चुका है। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारी मौसम के मिजाज और झील के जलस्तर की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। पर्वतीय नदियों, नालों और झीलों के उफान ने एक बार फिर प्रकृति के प्रचंड रूप का अहसास करा दिया है, जबकि नैनीझील में स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए गेटों के जरिए पानी की निकासी लगातार जारी है।



















