तीर्थनगरी हरिद्वार के अपर रोड इलाके में स्थित पालीवाल धर्मशाला का राधा कृष्ण मंदिर सदियों से भक्तों की असीम आस्था का प्रतीक रहा है। लगभग दो सौ वर्ष पुराने इस देवालय का अपना एक अनूठा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। ब्रिटिश हुकूमत के समय निर्मित इस भवन का ढांचा इतना मजबूत है कि इसकी दीवारें लगभग बीस इंच मोटी बनाई गई हैं। इस मजबूती और देवीय कृपा के कारण ही यह संरचना कई प्राकृतिक आपदाओं को सहने के बाद भी जस की तस खड़ी है। इस पवित्र परिसर की सबसे खास बात यहां स्थापित भगवान श्री कृष्ण की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा है, जो बेशकीमती कसौटी पत्थर से तराशी गई है।
कसौटी पत्थर की दुर्लभ प्रतिमा और इसकी खासियत
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित योगेश पंत के अनुसार पूरे भारतवर्ष में कसौटी पत्थर से बनी देव प्रतिमाएं बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलती हैं। हरिद्वार के कनखल क्षेत्र के एक मंदिर और वृंदावन स्थित सुप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के अलावा यह दुर्लभ पाषाण रूप यहां पालीवाल धर्मशाला के राधा कृष्ण मंदिर में सुशोभित है। मान्यता है कि कसौटी पत्थर की इस दिव्य प्रतिमा के सम्मुख किया गया पूजन भक्तों के जीवन की हर कसौटी पर खरा साबित होता है। काले रंग के इस चमत्कारी पाषाण से निर्मित विग्रह के दर्शन मात्र से भक्तों को असीम मानसिक शांति की अनुभूति होती है और वातावरण में एक विशेष ऊर्जा का संचार महसूस होता है।
1970 की विनाशकारी बाढ़ और मंदिर की चमत्कारी घटना
इस पवित्र धाम के साथ वर्ष 1970 में आई हरिद्वार की प्रलयंकारी बाढ़ की एक बेहद हैरतअंगेज घटना जुड़ी हुई है। उस वर्ष जब भीषण जलप्रलय ने संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र में कोहराम मचाया था, तब बाढ़ का पानी हरिद्वार के मुख्य बाजारों को जलमग्न करते हुए अपर रोड तक पहुंच गया था। तेज बहाव के साथ पानी इस प्राचीन देवालय के भीतर तक प्रवेश कर गया। स्थानीय जनश्रुति और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, जैसे ही बाढ़ के जल ने गर्भगृह में विराजमान भगवान श्री कृष्ण के पावन चरणों को स्पर्श किया, वैसे ही जलस्तर में अप्रत्याशित रूप से गिरावट शुरू हो गई। देखते ही देखते पानी का विकराल सैलाब पीछे हटने लगा, जिससे नगर में होने वाला बड़ा नुकसान टल गया था।
श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं और दैनिक पूजा का समय
पंडित योगेश पंत बताते हैं कि जो भी भक्त सच्चे और निश्छल मन से यहां प्रार्थना करते हैं, उनकी कोई भी याचना निष्फल नहीं जाती। मान्यता है कि इस पावन स्थल पर शीश नवाने से निःसंतानों को संतान सुख मिलता है, साथ ही व्यापार और जीवन में आर्थिक सम्पन्नता एवं सुख समृद्धि का वास होता है। मंदिर प्रशासन और पुजारी ने हरिद्वार आने वाले सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे गंगा स्नान के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन के लिए अवश्य पधारें। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए नियमित खुलते हैं, जहां प्रतिदिन सुबह 6:15 बजे प्रभात आरती और शाम 6:15 बजे संध्या आरती विधि विधान के साथ संपन्न कराई जाती है।
























