उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध देवभूमि और पवित्र तीर्थ नगरी ऋषिकेश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां अत्यंत धूमधाम और उत्साह के साथ आरंभ हो चुकी हैं। भाद्रपद माह के इस पावन पर्व पर शहर के मुख्य इस्कॉन मंदिर को विशेष रूप से केंद्र बिंदु बनाकर सजाया जा रहा है। इस वर्ष कृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर को भव्य और अलौकिक रूप देने के लिए मंदिर प्रशासन और स्वयंसेवकों द्वारा परिसर के जीर्णोद्धार और सजावट का कार्य तीव्र गति से संपन्न कराया जा रहा है। शाम ढलते ही जैसे ही अंधकार फैलता है, संपूर्ण मंदिर परिसर रंग-बिरंगी आधुनिक एलईडी लाइटों और कलात्मक सजावट से नहा उठता है। दूर से देखने पर मंदिर का यह दिव्य नजारा दीपावली के महापर्व की याद दिलाता है। रोशनी की यह विहंगम छटा मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक श्रद्धालु और पर्यटक का मन मोह रही है।
दीपावली जैसी चमक और कलात्मक रोशनी से सराबोर परिसर
जन्माष्टमी पर्व की आहट के साथ ही मंदिर परिसर की भव्यता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। इस्कॉन मंदिर प्रबंधन द्वारा मुख्य भवन, बाहरी प्रांगण, प्रवेश द्वारों और विशाल स्तंभों को बहुरंगी लाइटों और प्राकृतिक फूलों की सुंदर लड़ियों से सजाया गया है। रात्रि के समय जब ये सभी सजावटी लाइटें एक साथ प्रज्वलित की जाती हैं, तब मंदिर की स्थापत्य कला और बाहरी सुंदरता में कई गुना वृद्धि हो जाती है। संध्या काल में स्थानीय नागरिक, तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक भी मंदिर के समीप रुककर इस दिव्य वातावरण का आनंद ले रहे हैं। जन्माष्टमी का मुख्य दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सजावट के कार्य को और अधिक विस्तार दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मंदिर परिसर और भी भव्य, विहंगम और अलौकिक रूप में नजर आने वाला है।
तीन दिनों तक चलने वाले भक्तिमय धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम
ऋषिकेश के इस्कॉन मंदिर में केवल शारीरिक सजावट ही नहीं, बल्कि लगातार तीन दिनों तक चलने वाले विविध धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों की एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है। इन तीन दिनों के दौरान मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए अध्यात्म और भक्ति का एक अनूठा वातावरण सृजित किया गया है। प्रातः काल की आरती से लेकर देर रात्रि तक निरंतर नाम संकीर्तन, हरे कृष्णा महामंत्र का जप, संगीतमय भजन और श्रीमद्भागवत कथा के विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन आध्यात्मिक आयोजनों से संपूर्ण वातावरण कृष्ण भक्ति की पावन धारा में सराबोर हो उठा है। मंदिर में पधारने वाले प्रत्येक भक्त को प्रतिदिन नए और गहन आध्यात्मिक अनुभवों को महसूस करने का अवसर प्राप्त होगा।
बच्चों और श्रद्धालु परिवारों के लिए विशेष प्रतियोगिताएं
जन्माष्टमी के इस पावन उत्सव में जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से छोटे बच्चों और श्रद्धालु परिवारों के लिए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र, बाल लीलाओं, माखन चोरी के प्रसंगों और भगवद्गीता के उपदेशों पर आधारित कला, वेशभूषा व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं को शामिल किया गया है। बच्चों में कृष्ण रूप धरने और प्रतियोगिताओं में भाग लेने को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर में दर्शन हेतु आने वाले परिवारों के लिए यह आयोजन केवल पारंपरिक पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पूरे धार्मिक उत्सव में सक्रिय रूप से सम्मिलित होने और अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति दर्शाने का अवसर मिल रहा है।
अर्धरात्रि जन्मोत्सव पर उमड़ने वाली भीड़ और दर्शन व्यवस्था
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के मुख्य दिन भगवान के बाल रूप के दर्शन पाने के लिए मंदिर परिसर में भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। उत्तराखंड के कोने-कोने के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु ऋषिकेश पहुंचकर इस पवित्र बेला के साक्षी बनते हैं। जैसे-जैसे मध्यरात्रि का समय यानी भगवान के प्राकट्य का पावन क्षण समीप आता है, मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है। अपनी बारी की धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करते हुए श्रद्धालु पंक्तियों में खड़े होकर हाथ जोड़कर जयकारे लगाते हैं और भजन गाते हैं। पूरा मंदिर क्षेत्र 'जय श्री कृष्णा', 'राधे-राधे' और 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के भक्तिमय जयकारों से गूंज उठता है।
श्रद्धालुओं को वितरित किया जाने वाला विशेष खीर प्रसाद
ऋषिकेश इस्कॉन मंदिर की जन्माष्टमी की एक प्रमुख विशेषता यहां श्रद्धालुओं में बांटा जाने वाला विशेष खीर प्रसाद है। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन कर बाहर निकलने वाले प्रत्येक भक्त को शुद्ध दूध, मेवों और चावल से निर्मित पावन खीर का प्रसाद भेंट किया जाता है। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर पधारने वाले लोगों के लिए यह प्रसाद केवल खाद्य वस्तु नहीं, बल्कि भगवान का दिव्य आशीर्वाद और उत्सव की अमिट स्मृति बन जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन व पूजन के पश्चात श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा के साथ इस खीर प्रसाद को ग्रहण करते हैं और तत्पश्चात मंदिर प्रांगण में आयोजित हो रहे सांस्कृतिक मंचन और भजनों का आनंद उठाते हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू दर्शन हेतु बहुस्तरीय प्रबंध
तीन दिनों तक अनवरत चलने वाले इस विशाल धार्मिक महोत्सव को सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए मंदिर प्रबंधन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जन्माष्टमी के दौरान संभावित भारी जनसैलाब को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए पृथक प्रवेश व निकास द्वार, सुरक्षा जांच, पेयजल सुविधाएं और चिकित्सा सहायता बूथ स्थापित किए गए हैं। मंदिर समिति के सेवादार और स्वयंसेवक पंक्तिबद्ध दर्शन व्यवस्था को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। प्रबंधन का मुख्य ध्येय यह है कि मंदिर आने वाले किसी भी वरिष्ठ नागरिक, महिला या बच्चे को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और सभी सुगमता से भगवान के दर्शन कर सकें।



















